USSupremeCourt – ट्रंप की टैरिफ नीति पर कोर्ट का बड़ा फैसला
USSupremeCourt – अमेरिका की सर्वोच्च अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापक आयात शुल्क नीति को असंवैधानिक ठहराते हुए वैश्विक व्यापार पर असर डालने वाला अहम फैसला सुनाया है। इस निर्णय के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हलचल तेज हो गई है। अदालत के 6-3 के बहुमत से दिए गए फैसले में कहा गया कि राष्ट्रपति को 1977 के कानून के तहत इतने व्यापक स्तर पर आयात शुल्क लगाने का अधिकार प्राप्त नहीं है। फैसले के तुरंत बाद चीन ने भी अमेरिका से सभी एकतरफा शुल्क वापस लेने की मांग दोहराई है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव फिर चर्चा में आ गया है।

अदालत ने अधिकारों की सीमा स्पष्ट की
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि 1977 का इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट राष्ट्रपति को आपातकालीन परिस्थितियों में व्यापार को नियंत्रित करने की शक्ति देता है, लेकिन इसमें प्रत्यक्ष रूप से कर या टैरिफ लगाने का प्रावधान नहीं है। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत का मत लिखते हुए स्पष्ट किया कि ‘विनियमित’ शब्द का अर्थ कराधान की अनुमति नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि अब तक किसी भी राष्ट्रपति ने इस कानून की व्याख्या इस प्रकार नहीं की थी कि वह व्यापक आयात शुल्क लगा सके। हालांकि, तीन न्यायाधीशों ने इस निर्णय से असहमति जताई और इसे कार्यपालिका के अधिकारों में हस्तक्षेप बताया।
चीन की प्रतिक्रिया और कूटनीतिक संदेश
फैसले के बाद चीन ने सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी। चीन के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि बीजिंग हमेशा से एकतरफा शुल्क वृद्धि का विरोध करता आया है। उनका कहना था कि ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के अनुरूप नहीं हैं और इससे किसी भी देश को स्थायी लाभ नहीं मिलता। चीन ने संकेत दिया कि अमेरिका द्वारा पहले लगाए गए शुल्क, चाहे वे पारस्परिक हों या अन्य कारणों से जुड़े हों, वैश्विक व्यापार ढांचे को प्रभावित करते हैं। साथ ही, यह भी चेतावनी दी गई कि यदि अमेरिका अन्य कानूनी उपायों के जरिए शुल्क बनाए रखने की कोशिश करता है तो चीन स्थिति पर बारीकी से नजर रखेगा और अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
ट्रंप प्रशासन की नई रणनीति
अदालत के फैसले के बावजूद ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि वह अपने रुख से पीछे हटने वाला नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर लिखा कि वह पूर्व में घोषित 10 प्रतिशत वैश्विक शुल्क को बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की योजना बना रहे हैं, जिसे उन्होंने कानूनी रूप से उचित बताया। इस घोषणा ने व्यापार जगत में नई चर्चाओं को जन्म दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नया शुल्क लागू होता है तो यह अमेरिकी आयात लागत और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर डाल सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। इनके बीच व्यापारिक नीतियों में बदलाव का असर केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक बाजारों पर भी पड़ता है। निवेशक फिलहाल स्थिति का आकलन कर रहे हैं। कई विश्लेषकों का कहना है कि कानूनी और नीतिगत अनिश्चितता से बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। वहीं कुछ विशेषज्ञ इसे कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के संतुलन की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।
आगे की राह
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिकी प्रशासन आगे किस कानूनी आधार पर नई नीति लागू करता है और क्या कांग्रेस इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट रुख अपनाती है। चीन की ओर से भी आने वाले दिनों में औपचारिक प्रतिक्रिया और कूटनीतिक वार्ता की संभावना बनी हुई है। कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम केवल एक कानूनी विवाद नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार नीति के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।



