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SustainabilityWeek – ऑटो उद्योग में सर्कुलर और डिजिटल बदलाव पर जोर…

SustainabilityWeek – दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के रूप में भारत अब पर्यावरणीय जिम्मेदारी और कम कार्बन विकास की दिशा में तेज कदम बढ़ा रहा है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स द्वारा आयोजित सस्टेनेबिलिटी वीक 2026 का समापन बृहस्पतिवार को हुआ। समापन सत्र में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट संकेत दिया कि आने वाला समय सर्कुलर इकॉनमी और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम पर आधारित होगा। इस दौरान एएमसीएस से जुड़ी पहली अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की गई, जिसमें मटेरियल स्टीवर्डशिप और डीकार्बोनाइजेशन को भविष्य की अनिवार्य दिशा बताया गया।

नए ELV रूल्स 2025 से स्क्रैपेज व्यवस्था में बदलाव

कार्यक्रम में एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल्स यानी ELV रूल्स 2025 को उद्योग के लिए अहम मोड़ बताया गया। सोसाइटी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रशांत के बनर्जी ने कहा कि इन नियमों के लागू होने से पुरानी गाड़ियों के निपटान की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और वैज्ञानिक होगी।

अब वाहन कबाड़ में अनियंत्रित तरीके से नहीं जाएंगे, बल्कि प्रमाणित स्क्रैपिंग सेंटर में प्रोसेस किए जाएंगे। इससे गाड़ियों से निकलने वाले कीमती धातु और अन्य मटेरियल को दोबारा उपयोग में लाया जा सकेगा। साथ ही पूरी वैल्यू चेन में कार्बन उत्सर्जन कम करने पर जोर रहेगा।

मापनीय सस्टेनेबिलिटी के लिए डिजिटल टूल्स पर जोर

इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी के सीनियर एडवाइजर जयवंत हरडीकर ने कहा कि वाहन के जीवनचक्र के अंतिम चरण को रीयूज और रिसाइक्लिंग से सीधे जोड़ना जरूरी है। इसके लिए दो प्रमुख डिजिटल टूल्स पर चर्चा हुई।

पहला है डिजिटल प्रोडक्ट पासपोर्ट, जिसके जरिए हर वाहन में इस्तेमाल हुए मटेरियल और उससे जुड़े कार्बन डाटा को ट्रैक किया जा सकेगा। दूसरा है सस्टेनबल इंडेक्स, जो कार्बन फुटप्रिंट और मटेरियल कॉम्प्लायंस को मापने में मदद करेगा। इन प्रणालियों से ईएसजी रिपोर्टिंग अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनने की उम्मीद जताई गई।

ग्रीन मोबिलिटी को नीतिगत समर्थन

होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया के डायरेक्टर-परचेज संजीव जैन ने कहा कि भारत में ग्रीन मोबिलिटी की दिशा अब केवल बाजार की मांग पर निर्भर नहीं है, बल्कि सरकारी नीतियां भी इसे गति दे रही हैं।

एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी के तहत कंपनियों को अपने उत्पादों के पूरे जीवनचक्र की जिम्मेदारी लेने की अपेक्षा की गई है। स्क्रैपेज नॉर्म्स पुराने और अधिक प्रदूषणकारी वाहनों को हटाने को बढ़ावा दे रहे हैं। वहीं कॉर्पोरेट औसत ईंधन अर्थव्यवस्था मानक निर्माताओं को ईंधन दक्षता बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

उनके अनुसार ऑटो सेक्टर का अगला चरण इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, फ्लेक्स फ्यूल तकनीक, ग्रीन हाइड्रोजन आधारित मोबिलिटी और सस्टेनेबल लॉजिस्टिक्स पर आधारित होगा। इससे उद्योग को स्वच्छ और ऊर्जा-कुशल तकनीकों की ओर तेजी से बढ़ना होगा।

सप्लाई चेन में डिजिटल पारदर्शिता

सम्मेलन में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन भी प्रमुख विषय रहा। डीएक्ससी टेक्नोलॉजी के प्रतिनिधि फ्रैंक नॉटेबॉम ने बताया कि इंटरनेशनल मटेरियल डाटा सिस्टम में भारतीय उपयोगकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

कैटेना-एक्स से जुड़े हन्नो फोकेन ने उद्योग-प्रेरित और ओपन डिजिटल इकोसिस्टम की जरूरत पर बल दिया। उनका कहना था कि वैश्विक वैल्यू चेन जटिल होती जा रही हैं, ऐसे में पारदर्शी और साझा डेटा प्लेटफॉर्म जरूरी हैं।

भविष्य की दिशा

सम्मेलन के निष्कर्षों से यह संकेत मिला कि भारत का ऑटो उद्योग अब केवल उत्पादन क्षमता तक सीमित नहीं रहना चाहता। लक्ष्य एक ऐसे इकोसिस्टम का निर्माण है, जो डिजिटल रूप से सक्षम हो, संसाधनों का बेहतर उपयोग करे और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करे।

सर्कुलर इकॉनमी, डिजिटल ट्रैकिंग और नीतिगत समर्थन के मेल से उद्योग आने वाले वर्षों में वैश्विक मानकों के अनुरूप खुद को ढालने की तैयारी कर रहा है।

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