ShippingPolicy – फारस की खाड़ी तनाव के बीच निर्यातकों के लिए जारी हुए नए निर्देश
ShippingPolicy – पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के महानिदेशालय शिपिंग (DG Shipping) ने देशभर के सभी प्रमुख बंदरगाहों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में फंसे भारतीय निर्यातकों को मिलने वाली रियायतें बिना किसी बाधा के और पूरी पारदर्शिता के साथ उन तक पहुंचें। हाल के दिनों में सामने आए कुछ मामलों में यह पाया गया कि बंदरगाहों द्वारा दी गई सुविधाएं अंतिम लाभार्थियों तक समान रूप से नहीं पहुंच पा रही थीं, जिससे निर्यात गतिविधियों पर असर पड़ रहा था।

रियायतों के वितरण में पारदर्शिता पर जोर
जारी सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि डिटेंशन चार्ज, ग्राउंड रेंट और रीफर प्लग-इन शुल्क जैसी रियायतें कई बार बीच के स्तर पर अटक जा रही थीं। इस स्थिति को सुधारने के लिए अब यह अनिवार्य किया गया है कि ये सभी लाभ सीधे संबंधित हितधारकों—जैसे फ्रेट फॉरवर्डर्स और NVOCCs—के माध्यम से निर्यातकों तक पहुंचाए जाएं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसी भी स्तर पर देरी या असमानता न हो और हर निर्यातक को उसका उचित लाभ मिल सके।
पोर्ट अथॉरिटीज को निगरानी की जिम्मेदारी
महानिदेशालय ने पोर्ट अथॉरिटीज को यह जिम्मेदारी भी सौंपी है कि वे टर्मिनल स्तर पर पूरी प्रक्रिया की निगरानी करें। इसका उद्देश्य यह है कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, देरी या अपारदर्शिता को समय रहते रोका जा सके। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से इस प्रक्रिया की समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी राहत उपाय प्रभावी तरीके से लागू हो रहे हैं।
RELIEF योजना के तहत उठाया गया कदम
यह पहल 497 करोड़ रुपये की RELIEF योजना के अंतर्गत की गई है, जिसका लक्ष्य संकट की स्थिति में निर्यातकों को आवश्यक सहायता प्रदान करना है। इस योजना के जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि वैश्विक तनाव के बावजूद भारत का निर्यात प्रभावित न हो और व्यापारिक गतिविधियां सुचारू रूप से जारी रहें। मौजूदा परिस्थितियों में यह कदम व्यापारिक समुदाय के लिए राहत का काम कर सकता है।
शिपिंग कंपनियों के लिए सख्त निर्देश
डीजी शिपिंग ने शिपिंग लाइनों को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपने शुल्क निर्धारण में पूरी पारदर्शिता बनाए रखें और जरूरत पड़ने पर ऑडिट की सुविधा उपलब्ध कराएं। इसके अलावा, कार्गो पर लगाए जा रहे वार रिस्क प्रीमियम में हाल के बदलावों पर भी चिंता जताई गई है। अधिकारियों का कहना है कि ये बदलाव पहले जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं हो सकते, और इस मुद्दे को बीमा कंपनियों के साथ उठाया जा रहा है ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
भारतीय नाविकों के लिए सुरक्षा सलाह जारी
इसी बीच, ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नाविकों के लिए भी सुरक्षा निर्देश जारी किए गए हैं। उन्हें सलाह दी गई है कि वे तट पर अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें, संवेदनशील इलाकों से दूरी बनाए रखें और भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें। जहाजों पर तैनात कर्मियों को भी सतर्क रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से सुरक्षित रहा जा सके।



