RussiaTaxReform – नई कर नीति से छोटे कारोबारों पर बढ़ा दबाव
RussiaTaxReform – रूस में हाल ही में लागू की गई कर सुधार नीति का असर अब छोटे और मध्यम उद्यमों पर साफ दिखाई देने लगा है। कारोबारी समुदाय के बीच यह चिंता बढ़ रही है कि बढ़े हुए कर भार, उत्पादन लागत में वृद्धि और मांग में कमी ने व्यवसाय चलाना पहले से अधिक कठिन बना दिया है। कई उद्यमियों का कहना है कि यह बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके रोजमर्रा के संचालन और भविष्य की योजनाओं पर सीधा असर डाल रहा है।

छोटे कारोबारियों की बढ़ती मुश्किलें
कजान में पेस्ट्री की दुकान चलाने वाले डेनिस मैक्सिमोव ने हाल ही में अपना कारोबार बंद करने का फैसला किया। उनका कहना है कि यह निर्णय आर्थिक मजबूरी के चलते लेना पड़ा। उन्होंने वर्ष 2020 में महामारी के कठिन दौर में यह व्यवसाय शुरू किया था और कई उतार-चढ़ाव के बावजूद उसे संभाले रखा। लेकिन नई कर व्यवस्था के बाद बढ़ी लागत और घटती बिक्री ने उनके लिए संतुलन बनाए रखना मुश्किल कर दिया। उनके अनुसार, महामारी एक अस्थायी संकट थी, जबकि मौजूदा कर ढांचा लंबे समय तक प्रभाव डाल सकता है।
भविष्य में और बढ़ सकता है कर दायरा
व्यापारियों को चिंता है कि कर सुधार का असर आने वाले वर्षों में और गहरा हो सकता है। नई नीति के तहत 2027 और 2028 तक कम आय वाले कई व्यवसाय भी उच्च कर दायरे में आ सकते हैं। इससे उन उद्यमों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा, जो पहले ही सीमित संसाधनों में काम कर रहे हैं। छोटे कारोबार आम तौर पर स्थानीय बाजार पर निर्भर होते हैं, और उनके लिए अचानक बढ़ी कर देनदारी संभालना आसान नहीं होता।
अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका
आर्थिक विशेषज्ञों का आकलन है कि रूस की कुल अर्थव्यवस्था में छोटे और मध्यम उद्यमों की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से अधिक है। यह क्षेत्र रोजगार सृजन, नवाचार और स्थानीय बाजारों की गतिशीलता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। कंसल्टेंसी फर्म मैक्रो-एडवाइजरी के प्रमुख क्रिस वीफर के अनुसार, वैट के दायरे को विस्तारित करना वित्त मंत्रालय की एक रणनीतिक पहल है। सरकार तेल से होने वाली आय में कमी और बढ़ते बजट घाटे के बीच राजस्व के स्थायी स्रोत तलाश रही है। ऐसे में छोटे व्यवसायों को कर ढांचे में शामिल करना दीर्घकालिक आय सुनिश्चित करने की दिशा में कदम माना जा रहा है।
प्रतिबंधों के बाद से बढ़ता दबाव
विश्लेषकों का यह भी मानना है कि 2014 में क्रीमिया संकट के बाद लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने छोटे और मध्यम उद्यमों पर पहले ही दबाव बढ़ा दिया था। सरकारी सहायता का बड़ा हिस्सा बड़े औद्योगिक समूहों को मिला, जबकि छोटे कारोबार अपेक्षाकृत कम समर्थन के साथ काम करते रहे। अब नई कर नीतियां उस दबाव को और गहरा कर सकती हैं।
दीर्घकालिक प्रभाव की आशंका
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इन सुधारों से तत्काल आर्थिक व्यवस्था को बड़ा झटका लगने की संभावना कम है, लेकिन लंबी अवधि में विकास दर, नवाचार की गति और बाजार विस्तार प्रभावित हो सकते हैं। छोटे और मध्यम उद्यम किसी भी अर्थव्यवस्था की आधारशिला माने जाते हैं। यदि यह क्षेत्र कमजोर होता है तो रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
सरकार के लिए राजस्व संतुलन जरूरी है, लेकिन कारोबारी समुदाय उम्मीद कर रहा है कि नीतियों में ऐसे संतुलन की तलाश की जाएगी, जिससे आर्थिक स्थिरता और उद्यमिता दोनों को साथ लेकर चला जा सके।



