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बिज़नेस

RBIpolicy – मौद्रिक नीति में स्थिरता, वैश्विक चुनौतियों पर आरबीआई सतर्क

RBIpolicy – भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की हालिया बैठक में देश की आर्थिक स्थिति और आगे की दिशा पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच केंद्रीय बैंक फिलहाल संतुलित और सतर्क रुख अपनाए हुए है। मौद्रिक नीति में बड़े बदलाव से बचते हुए स्थिरता को प्राथमिकता दी गई है, ताकि अर्थव्यवस्था बाहरी झटकों से सुरक्षित रह सके।

नीतिगत दरों पर यथास्थिति बरकरार

मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया। इसके तहत रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही कायम रखा गया है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल परिस्थितियों को देखते हुए तटस्थ रुख अपनाना उचित है।

आरबीआई ने यह भी संकेत दिया कि तरलता प्रबंधन के मामले में वह जरूरत पड़ने पर सक्रिय और समय से पहले कदम उठाएगा। इससे यह स्पष्ट होता है कि केंद्रीय बैंक भविष्य की चुनौतियों को लेकर पहले से तैयार रहना चाहता है।

महंगाई और विकास दर का संतुलन

आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। फिलहाल मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के चार प्रतिशत के लक्ष्य के आसपास नियंत्रण में बनी हुई है।

हालांकि, ऊर्जा कीमतों में हालिया तेजी को एक संभावित जोखिम के तौर पर देखा जा रहा है। इसके विपरीत, खाद्य कीमतों को लेकर स्थिति फिलहाल संतुलित बताई गई है, जिससे महंगाई पर दबाव सीमित रहने की उम्मीद है।

आर्थिक विकास की बात करें तो वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के मुकाबले थोड़ा कम जरूर है, लेकिन उच्च-आवृत्ति संकेतक बताते हैं कि आर्थिक गतिविधियां अभी भी मजबूत बनी हुई हैं।

वैश्विक हालात पर करीबी नजर

आरबीआई गवर्नर ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को चुनौतीपूर्ण बताया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी संघर्ष और भू-राजनीतिक तनावों ने अनिश्चितता को बढ़ा दिया है, जिसका असर आर्थिक दृष्टिकोण पर पड़ सकता है।

ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम मार्गों में संभावित बाधाएं वैश्विक आपूर्ति शृंखला को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में केंद्रीय बैंक ने साफ किया है कि वह बदलते हालात पर लगातार नजर बनाए रखेगा और जरूरत पड़ने पर नीति में बदलाव करेगा।

विदेशी मुद्रा और रुपये की स्थिति

देश का विदेशी मुद्रा भंडार 3 अप्रैल तक बढ़कर 696.1 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर पहुंच गया है, जो बाहरी झटकों से निपटने की क्षमता को दर्शाता है।

हालांकि, पिछले वर्ष के दौरान भारतीय रुपये में औसत से अधिक गिरावट दर्ज की गई थी। इसके बावजूद आरबीआई ने अपनी विनिमय दर नीति में कोई बदलाव नहीं किया है। केंद्रीय बैंक ने दोहराया है कि वह बाजार में अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक हस्तक्षेप करता रहेगा।

रेमिटेंस में संभावित मजबूती के चलते चालू खाता घाटा संतुलित स्तर पर बने रहने की उम्मीद है। इसके अलावा, भारत अभी भी विदेशी निवेश, खासकर ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के लिए आकर्षक गंतव्य बना हुआ है।

बैंकिंग और एनबीएफसी क्षेत्र की मजबूती

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की स्थिति को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। इस क्षेत्र में पूंजी पर्याप्त स्तर पर है और तरलता की स्थिति मजबूत बनी हुई है।

एनपीए में सुधार के चलते एनबीएफसी सेक्टर की वित्तीय सेहत बेहतर हुई है, जिससे समग्र वित्तीय प्रणाली को मजबूती मिलती है।

कुल मिलाकर, मौद्रिक नीति से यह संकेत मिलता है कि वैश्विक दबावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था संतुलित स्थिति में है। आरबीआई का सतर्क और तटस्थ रुख यह दर्शाता है कि नीति निर्माता किसी भी संभावित जोखिम से निपटने के लिए तैयार हैं, जबकि विकास और स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश जारी है।

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