बिज़नेस

MutualFunds – मार्च में इक्विटी फंड्स में निवेश उछला, एसआईपी ने बनाया रिकॉर्ड

MutualFunds – मार्च महीने में म्यूचुअल फंड निवेश के रुझानों ने एक बार फिर निवेशकों के भरोसे को दर्शाया है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, एक्टिव इक्विटी फंड्स में शुद्ध निवेश बढ़कर 40,450 करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जो पिछले कई महीनों में सबसे ऊंचे स्तरों में गिना जा रहा है। फरवरी के मुकाबले इसमें उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक बाजार में सक्रिय रूप से बने हुए हैं।

एसआईपी के जरिए लगातार बढ़ रहा निवेश

खासतौर पर सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के माध्यम से निवेश में लगातार मजबूती देखी जा रही है। मार्च में एसआईपी के जरिए निवेश 32,000 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया, जो अब तक के उच्चतम स्तरों में शामिल है। यह दर्शाता है कि खुदरा निवेशक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद नियमित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह प्रवृत्ति दीर्घकालिक निवेश की सोच को भी मजबूत करती है।

कुल उद्योग से बड़ी निकासी दर्ज

हालांकि, एक दिलचस्प पहलू यह भी रहा कि पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग से मार्च में बड़ी निकासी दर्ज की गई। कुल मिलाकर करीब 2.39 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी सामने आई, जबकि फरवरी में निवेश सकारात्मक रहा था। इस बदलाव के पीछे प्रमुख कारण डेट फंड्स से बड़े पैमाने पर पैसा निकलना बताया जा रहा है।

इक्विटी कैटेगरी में अलग-अलग रुझान

इक्विटी फंड्स की विभिन्न श्रेणियों में निवेश का रुख सकारात्मक रहा। फ्लेक्सी-कैप फंड्स में सबसे ज्यादा निवेश आया, जो 10,000 करोड़ रुपये से अधिक रहा। इसके अलावा मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड्स में भी निवेशकों की रुचि बनी रही। लार्ज-कैप फंड्स और सेक्टोरल फंड्स में भी स्थिर निवेश देखने को मिला, जिससे यह स्पष्ट होता है कि निवेशक विविध पोर्टफोलियो बनाने पर ध्यान दे रहे हैं।

डेट फंड्स से भारी निकासी

डेट म्यूचुअल फंड्स में मार्च के दौरान बड़ी निकासी देखी गई, जो करीब 2.94 लाख करोड़ रुपये के आसपास रही। इसमें ओवरनाइट और लिक्विड फंड्स से सबसे ज्यादा पैसा निकला। विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय वर्ष के अंत में संस्थागत निवेशकों द्वारा पोर्टफोलियो में बदलाव इसके पीछे एक प्रमुख कारण हो सकता है।

अन्य श्रेणियों का प्रदर्शन

हाइब्रिड स्कीम्स और आर्बिट्राज फंड्स से भी निकासी दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक अपनी रणनीति में बदलाव कर रहे हैं। वहीं, गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में निवेश में भी गिरावट आई है। इसके अलावा, मार्च में कई नए फंड ऑफर लॉन्च किए गए, जिनके जरिए निवेशकों से हजारों करोड़ रुपये जुटाए गए।

बाजार के उतार-चढ़ाव का असर

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों और बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों ने गिरावट को अवसर के रूप में देखा है। खासकर नियमित निवेश करने वाले निवेशकों ने इस दौर में अपने निवेश को जारी रखा है। इससे यह संकेत मिलता है कि लंबी अवधि की रणनीति अपनाने वाले निवेशक बाजार की अस्थिरता से ज्यादा प्रभावित नहीं होते।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.