Market Update – पश्चिमी एशिया तनाव के बीच सेंसेक्स-निफ्टी में करीब 2% की दिखी गिरावट
Market Update – पश्चिमी एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। एक दिन की मामूली राहत के बाद बाजार में फिर से दबाव बढ़ गया और प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स तथा निफ्टी लगभग दो प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार में कमजोरी की मुख्य वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और बैंकिंग सेक्टर के बड़े शेयरों में आई गिरावट मानी जा रही है। इसके साथ ही मुद्रा बाजार में भी दबाव देखने को मिला और रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ।

बाजार में व्यापक बिकवाली का दबाव
दिनभर के कारोबार के दौरान निवेशकों का रुख सतर्क नजर आया। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया। बाजार खुलने के बाद से ही बिकवाली का दबाव बना रहा, जो कारोबार के अंत तक जारी रहा। निवेशकों ने विशेष रूप से बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के बड़े शेयरों में मुनाफावसूली की, जिससे सूचकांकों में गिरावट और गहरी हो गई। विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी से भी बाजार पर दबाव बना हुआ है।
ब्लू-चिप बैंक शेयरों में गिरावट का असर
बाजार की कमजोरी में बैंकिंग सेक्टर की बड़ी कंपनियों के शेयरों की गिरावट ने अहम भूमिका निभाई। ब्लू-चिप बैंकिंग शेयरों में आई बिकवाली का सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सूचकांकों पर पड़ा। निवेशकों के बीच यह चिंता भी बनी हुई है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम लेने से बचते हुए सतर्क रणनीति अपना रहे हैं।
रुपया भी दबाव में, डॉलर के मुकाबले कमजोर
शेयर बाजार की कमजोरी के साथ ही मुद्रा बाजार में भी गिरावट दर्ज की गई। बुधवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 16 पैसे कमजोर होकर 92.01 के स्तर पर बंद हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी पूंजी की निकासी और वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है। इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी रुपये की कमजोरी का एक बड़ा कारण मानी जा रही हैं।
निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर रह सकती है। पश्चिमी एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्थिति में स्पष्टता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और निवेशक सावधानी के साथ कारोबार करते रहेंगे।



