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Market – रुपये की कमजोरी और तेल कीमतों से दबाव में आया शेयर बाजार

Market – भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत कमजोर रही। शुरुआती घंटों में निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल दिखाई दिया। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और रुपये में लगातार गिरावट का असर घरेलू बाजार पर साफ नजर आया। बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 शुरुआती कारोबार में करीब 161 अंक टूटकर 23,457 के आसपास पहुंच गया। वहीं, बीएसई सेंसेक्स भी लगभग 400 अंकों की कमजोरी के साथ 74,800 के स्तर के करीब खुला। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों की चिंता फिलहाल बढ़ती महंगाई और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को लेकर बनी हुई है।

कच्चे तेल और रुपये की गिरावट से बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ता है। इसके साथ ही भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नया रिकॉर्ड निचला स्तर छू लिया, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।

बैंकिंग और बाजार मामलों के जानकार अजय बग्गा ने कहा कि ऊंची तेल कीमतें, चालू खाते का बढ़ता दबाव और कमजोर होता रुपया बाजार की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मानसून को लेकर सामने आए अनुमान भी निवेशकों को सतर्क कर रहे हैं, क्योंकि इसका असर कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग पर पड़ सकता है।

वैश्विक हालात का भी दिखा असर

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता ने वैश्विक वित्तीय बाजारों पर दबाव बढ़ाया है। कई देशों में महंगाई बढ़ने की आशंका के बीच बॉन्ड प्रतिफल में तेजी देखी जा रही है। इसका असर निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर भी पड़ रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका, यूरोप, जापान और भारत जैसे बड़े बाजारों में महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है। निवेशकों की नजर अब बड़ी टेक कंपनियों और वैश्विक कॉर्पोरेट नतीजों पर भी है, क्योंकि इससे आने वाले समय में निवेश रुझानों का संकेत मिल सकता है।

लगभग सभी सेक्टरों में दिखी कमजोरी

शुरुआती कारोबार के दौरान शेयर बाजार के ज्यादातर सेक्टर दबाव में दिखाई दिए। ऑटो, एफएमसीजी, मीडिया, मेटल और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली का असर साफ देखा गया। निफ्टी ऑटो और मीडिया सूचकांक में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जबकि रियल्टी और पीएसयू बैंक शेयरों में भी कमजोरी बनी रही।

विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी वजह से इक्विटी बाजार में दबाव बढ़ा है। विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर भी बाजार की नजर बनी हुई है।

कंपनियों के नतीजों पर रहेगी नजर

बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच कई बड़ी कंपनियां अपने चौथी तिमाही के नतीजे जारी करने वाली हैं। इनमें ग्रासिम इंडस्ट्रीज, अपोलो हॉस्पिटल्स, बॉश, जुबिलेंट फूडवर्क्स और ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसी कंपनियां शामिल हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि कंपनियों के वित्तीय परिणाम आगे बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। निवेशक यह जानने की कोशिश करेंगे कि बढ़ती लागत और वैश्विक चुनौतियों का असर कंपनियों के प्रदर्शन पर कितना पड़ा है।

एशियाई बाजारों में भी गिरावट

भारतीय बाजार के साथ-साथ एशिया के कई प्रमुख शेयर बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंग सेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। वैश्विक निवेशकों के बीच बढ़ती अनिश्चितता का असर पूरे क्षेत्रीय बाजार पर दिखाई दे रहा है।

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