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Indian Two Wheeler Sales Report 2025: दोपहिया बाजार की रफ्तार ने सबको चौंकाया, निर्यात ने भी भरी ऊंची उड़ान

Indian Two Wheeler Sales Report 2025: भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए साल 2025 का अंत किसी उत्सव से कम नहीं रहा। दिसंबर के महीने में दोपहिया वाहनों की बिक्री में सालाना आधार पर (Automobile Market Trends) जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। हालांकि त्योहारों के समापन के बाद बाजार में थोड़ी नरमी की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन आंकड़ों ने साबित कर दिया कि भारतीय उपभोक्ताओं का भरोसा दोपहिया ब्रांड्स पर अडिग है। घरेलू बिक्री में आई इस तेज रिकवरी ने कंपनियों के गोदामों को खाली कर दिया और शोरूम्स पर रौनक लौटा दी।

Indian Two Wheeler Sales Report 2025
Indian Two Wheeler Sales Report 2025

हीरो मोटोकॉर्प का बाजार में एकतरफा दबदबा

दुनिया की सबसे बड़ी दोपहिया निर्माता कंपनी हीरो मोटोकॉर्प ने दिसंबर में अपने प्रदर्शन से प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया। कंपनी ने घरेलू बाजार में (Two Wheeler Dispatch Growth) सालाना आधार पर 43 प्रतिशत की शानदार बढ़त हासिल करते हुए 4,19,243 यूनिट्स की बिक्री की है। यदि कुल डिस्पैच की बात करें तो यह आंकड़ा 4,56,479 यूनिट्स तक जा पहुंचा है, जो बाजार विशेषज्ञों के अनुमान से कहीं अधिक है। हीरो की इस सफलता के पीछे उसके मजबूत डीलर नेटवर्क और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती मांग को मुख्य कारण माना जा रहा है।

स्कूटर और मोटरसाइकिल सेगमेंट में शानदार संतुलन

हीरो के पोर्टफोलियो पर नजर डालें तो मोटरसाइकिलों का वर्चस्व हमेशा की तरह कायम रहा, लेकिन इस बार स्कूटर सेगमेंट ने भी सबको हैरान किया। नए मॉडलों की (Scooter Segment Expansion) लॉन्चिंग और पिछले साल के कम बेस के कारण स्कूटरों की बिक्री में दोगुने से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है। अक्टूबर से दिसंबर की तिमाही कंपनी के लिए मील का पत्थर साबित हुई, जिसमें कुल 17 लाख यूनिट्स का डिस्पैच किया गया। यह उछाल दर्शाता है कि अब उपभोक्ता केवल माइलेज ही नहीं बल्कि स्टाइल और आधुनिक फीचर्स को भी तवज्जो दे रहे हैं।

टीवीएस मोटर का इलेक्ट्रिक और ग्लोबल धमाका

टीवीएस मोटर कंपनी ने दिसंबर 2025 में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों ही मोर्चों पर अपना परचम लहराया है। कंपनी की घरेलू दोपहिया बिक्री (Domestic Sales Surge) में 54 प्रतिशत का भारी उछाल देखा गया, जो कुल 3,30,362 यूनिट्स रही। टीवीएस ने न केवल पेट्रोल वाहनों बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में भी 77 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर भविष्य की राह आसान कर ली है। कंपनी के लिए तीसरी तिमाही अब तक की सबसे सफल तिमाही साबित हुई है, जिससे निवेशकों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।

बजाज ऑटो को मिला निर्यात का तगड़ा सहारा

जहाँ अन्य कंपनियां घरेलू बाजार में जूझ रही थीं, वहीं बजाज ऑटो ने अपनी अंतरराष्ट्रीय पकड़ का भरपूर फायदा उठाया। कंपनी की घरेलू बिक्री (Export Performance India) में भले ही 4 प्रतिशत की मामूली बढ़त रही हो, लेकिन निर्यात में 25 प्रतिशत की तेज छलांग ने घाटे की भरपाई कर दी। बजाज ने दिसंबर में कुल 3,69,809 यूनिट्स का डिस्पैच किया। कंपनी की रणनीति साफ है कि भारतीय बाजार के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी अपनी पल्सर और डोमिनार जैसी सीरीज का दबदबा बनाए रखना है।

विदेशी बाजारों में भारतीय ब्रांड्स की बढ़ती साख

निर्यात के मोर्चों पर भारतीय कंपनियों ने अपनी धाक जमानी शुरू कर दी है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है। हीरो मोटोकॉर्प का (Global Market Reach) निर्यात 21 प्रतिशत बढ़कर 37,236 यूनिट्स रहा, जबकि टीवीएस ने 40 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1,46,022 यूनिट्स विदेश भेजीं। भारतीय दोपहिया वाहनों की मजबूती और किफायती रखरखाव के कारण लैटिन अमेरिका और अफ्रीका जैसे देशों में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे भारत एक वैश्विक ऑटो हब के रूप में उभर रहा है।

रॉयल एनफील्ड और कमर्शियल वाहनों का संतुलित तालमेल

प्रीमियम सेगमेंट में रॉयल एनफील्ड ने अपनी बादशाहत बरकरार रखते हुए संतुलित वृद्धि दर्ज की है। वहीं बजाज के कमर्शियल व्हीकल (Commercial Vehicle Sales) सेगमेंट ने भी दिसंबर में मजबूत प्रदर्शन कर कंपनी की कुल आय में बड़ा योगदान दिया। अप्रैल से दिसंबर की नौ महीने की अवधि में बजाज की कुल बिक्री 6 प्रतिशत बढ़ी है। हालांकि घरेलू दोपहिया सेगमेंट में हल्की सुस्ती जरूर दिखी, लेकिन भारी वाहनों और थ्री-व्हीलर्स ने कंपनी के ग्राफ को नीचे नहीं गिरने दिया।

भविष्य की राह और इलेक्ट्रिक क्रांति का प्रभाव

2025 का समापन ऑटो जगत के लिए नई उम्मीदें लेकर आया है, खासकर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में। जिस तरह से ईवी की (Electric Mobility Shift) बिक्री में 77 प्रतिशत तक का उछाल आया है, उससे साफ है कि 2026 में मुकाबला और भी दिलचस्प होने वाला है। कंपनियां अब अपने बुनियादी ढांचे और चार्जिंग स्टेशनों पर निवेश बढ़ा रही हैं। कुल मिलाकर दिसंबर के ये आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि भारतीय ऑटो सेक्टर अब एक ऐसी परिपक्वता की ओर बढ़ रहा है जहाँ वह वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है

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