Gold Silver Price Records 2026: संभाल लीजिए तिजोरी की चाबी! सोने-चांदी की कीमतों ने तोड़े इतिहास के सारे रिकॉर्ड
Gold Silver Price Records 2026: घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोमवार का दिन कीमती धातुओं के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और अमेरिकी केंद्रीय बैंक के इर्द-गिर्द घूमती अनिश्चितता ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर भागने पर मजबूर कर दिया। इसके परिणामस्वरूप, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर फरवरी डिलीवरी वाले सोने ने (Bullion Market Rally) का ऐसा दौर देखा कि कीमतें 1,41,250 रुपये प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर जा पहुंचीं। पिछले महज एक हफ्ते के भीतर पीली धातु में 3,000 रुपये से ज्यादा की भारी बढ़त दर्ज की गई है।

चांदी की कीमतों में आया सुनामी जैसा उछाल
सोने के साथ-साथ चांदी ने भी अपनी चमक से बाजार को चौंका दिया है। मार्च डिलीवरी वाले चांदी वायदा में 11,271 रुपये की जबरदस्त तेजी देखी गई, जिसके बाद इसकी कीमत 2,63,996 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि (Silver Price Analysis) यह दर्शाता है कि बीते एक सप्ताह में इसमें लगभग 7 फीसदी का उछाल आया है। औद्योगिक मांग और सुरक्षित निवेश के रूप में चांदी की बढ़ती लोकप्रियता ने इसे छोटे और बड़े दोनों तरह के निवेशकों की पहली पसंद बना दिया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स पर मची हलचल
भारतीय बाजारों के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी कीमती धातुओं के दाम रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रहे हैं। कॉमेक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 2.5 फीसदी की छलांग लगाकर 4,612.7 डॉलर प्रति औंस के नए शिखर पर पहुंच गया। वहीं, चांदी के मार्च कॉन्ट्रैक्ट ने भी 5.8 फीसदी की ऐतिहासिक तेजी दिखाते हुए 83.90 डॉलर प्रति औंस का स्तर छू लिया। (Global Commodity Trade) में इस भारी उछाल के पीछे डॉलर की कमजोरी और वैश्विक शेयर बाजारों में छाई अनिश्चितता को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।
फेडरल रिजर्व के चेयरमैन और न्याय विभाग के बीच छिड़ी जंग
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल के एक हालिया बयान ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय जगत में भूचाल ला दिया है। पॉवेल ने खुलासा किया कि न्याय विभाग ने फेड को समन भेजा है और उनके जून के बयानों को लेकर आपराधिक जांच की धमकी दी है। यह पूरा विवाद (Federal Reserve Autonomy) और बैंक के भवनों के 2.5 अरब डॉलर के नवीनीकरण से जुड़ा है, जिसकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही कड़ी आलोचना कर चुके हैं। इस आंतरिक टकराव ने डॉलर पर निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया है।
वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिमों ने बढ़ाई बाजार की धड़कनें
सोने-चांदी की कीमतों में इस आग के पीछे सिर्फ आर्थिक कारण नहीं, बल्कि दुनिया भर में व्याप्त तनाव भी है। ईरान में जारी आंतरिक कलह और यूक्रेन संघर्ष को लेकर संयुक्त राष्ट्र की आपातकालीन बैठक जैसी घटनाओं ने (Geopolitical Risk Factors) को चरम पर पहुंचा दिया है। जब-जब दुनिया में युद्ध या राजनीतिक अस्थिरता का खतरा बढ़ता है, तब-तब निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने में निवेश करते हैं, क्योंकि इसे संकट के समय का सबसे भरोसेमंद साथी माना जाता है।
कमजोर होता डॉलर और गिरता हुआ डॉलर इंडेक्स
कीमती धातुओं को मजबूती देने में डॉलर इंडेक्स की गिरावट ने भी ईंधन का काम किया है। डॉलर इंडेक्स फिसलकर 99.03 के स्तर पर आ गया है, जिससे अन्य मुद्राओं के मुकाबले सोना खरीदना सस्ता हो जाता है और इसकी मांग बढ़ जाती है। (US Dollar Index Movement) के कारण निवेशकों ने डॉलर से दूरी बनाना शुरू कर दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि जब तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व और प्रशासन के बीच यह खींचतान खत्म नहीं होती, तब तक डॉलर पर दबाव बना रहेगा और कीमती धातुएं नई ऊंचाइयों को छूती रहेंगी।
भविष्य की राह: क्या अभी और बढ़ेंगे दाम
बाजार के जानकारों का मानना है कि सोने और चांदी में अभी तेजी का दौर थमने वाला नहीं है। शादी-ब्याह के सीजन की मांग और वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए (Future Gold Forecast) यह संकेत दे रहा है कि कीमतें और भी ऊपर जा सकती हैं। हालांकि, आम ग्राहकों के लिए यह खबर चिंताजनक है क्योंकि जेवर बनवाना अब पहले से कहीं अधिक महंगा हो गया है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की हर छोटी-बड़ी खबर पर नजर रखें, क्योंकि मौजूदा समय में सोने की चमक वैश्विक राजनीति की चाल से तय हो रही है।



