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FacebookProgram – क्रिएटर्स के लिए नया फास्ट ट्रैक प्रोग्राम, कमाई का मौका

FacebookProgram – सोशल मीडिया क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा के बीच मेटा ने फेसबुक पर कंटेंट क्रिएटर्स को आकर्षित करने के लिए एक नई पहल शुरू की है। 18 मार्च को पेश किया गया क्रिएटर्स फास्ट ट्रैक प्रोग्राम उन यूजर्स के लिए तैयार किया गया है जो फेसबुक पर अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहते हैं। कंपनी का उद्देश्य ऐसे क्रिएटर्स को प्लेटफॉर्म से जोड़ना है, जो पहले से अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं लेकिन फेसबुक पर उनकी पकड़ कमजोर है या वे नए हैं।

तेजी से ग्रोथ देने का दावा

इस प्रोग्राम के तहत फेसबुक क्रिएटर्स को तेजी से आगे बढ़ने का अवसर देने की बात कर रहा है। खासतौर पर रील्स कंटेंट को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे वीडियो ज्यादा लोगों तक पहुंच सके। एल्गोरिद्म के जरिए कंटेंट की रीच बढ़ाने की कोशिश की जाएगी, जिससे नए क्रिएटर्स को कम समय में बेहतर पहचान मिल सके। इससे फॉलोअर्स की संख्या के साथ-साथ दर्शकों की भागीदारी में भी इजाफा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

फिक्स्ड इनकम का मॉडल

इस पहल की एक अहम विशेषता शुरुआती स्तर पर निश्चित आय का प्रावधान है। फेसबुक ने इसे इस तरह डिजाइन किया है कि क्रिएटर्स को उनके अन्य प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद फॉलोअर्स के आधार पर भुगतान मिल सके। यदि किसी क्रिएटर के इंस्टाग्राम या यूट्यूब पर एक लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं, तो उन्हें हर महीने लगभग एक हजार डॉलर तक की राशि दी जा सकती है। वहीं, बड़े क्रिएटर्स के लिए यह राशि तीन हजार डॉलर प्रति माह तक पहुंच सकती है। यह भुगतान तीन महीने तक सुनिश्चित किया जाएगा, बशर्ते क्रिएटर नियमित रूप से कंटेंट पोस्ट करते रहें।

रील्स कंटेंट पर विशेष जोर

कंपनी ने यह भी बताया है कि हाल के समय में रील्स के जरिए क्रिएटर्स को बड़ी मात्रा में आय हुई है। 2025 में फेसबुक ने कुल मिलाकर करीब 3 बिलियन डॉलर क्रिएटर्स में वितरित किए, जिसमें से 60 प्रतिशत हिस्सा केवल रील्स से आया। इसी वजह से नए प्रोग्राम में रील्स को प्राथमिकता दी गई है, ताकि क्रिएटर्स को अधिकतम फायदा मिल सके और उनका कंटेंट व्यापक दर्शकों तक पहुंचे।

कमाई समझने के लिए नए टूल्स

क्रिएटर्स की सुविधा के लिए फेसबुक ने अपने डैशबोर्ड में कुछ नए फीचर्स जोड़े हैं। इन फीचर्स के जरिए यह समझना आसान होगा कि किस कंटेंट से कितनी कमाई हुई। इसमें क्वालिफाइड व्यूज, अर्निंग रेट और नॉन-क्वालिफाइड व्यूज जैसी श्रेणियां शामिल हैं। इससे क्रिएटर्स यह जान सकेंगे कि कौन-सा कंटेंट बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और किन कारणों से कुछ व्यूज से आय नहीं हो पाई।

लंबी अवधि में कमाई के अवसर

यह प्रोग्राम केवल शुरुआती तीन महीनों तक सीमित नहीं है। इसमें शामिल होने वाले क्रिएटर्स को आगे भी फेसबुक के मॉनेटाइजेशन टूल्स का उपयोग करने का मौका मिलेगा। प्रोग्राम खत्म होने के बाद भी वे इन-स्ट्रीम विज्ञापनों और अन्य सुविधाओं के जरिए आय जारी रख सकते हैं। इस तरह फेसबुक लंबे समय तक क्रिएटर्स को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़े रखने की योजना पर काम कर रहा है।

कैसे करें आवेदन

फिलहाल यह सुविधा केवल आमंत्रण के आधार पर उपलब्ध है, लेकिन इच्छुक क्रिएटर्स अपनी रुचि दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए उन्हें फेसबुक ऐप के प्रोफेशनल डैशबोर्ड में जाकर मॉनेटाइजेशन सेक्शन में उपलब्ध फॉर्म भरना होगा। इसके बाद कंपनी की टीम प्रोफाइल की समीक्षा करेगी और चयन होने पर प्रोग्राम में शामिल होने का अवसर दिया जाएगा।

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