EVGrowth – इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार ने बदला बाजार
EVGrowth – भारत का ऑटोमोबाइल बाजार इस समय बदलाव के अहम दौर से गुजर रहा है। उद्योग से जुड़े ताजा आंकड़े बताते हैं कि चालू वित्त वर्ष में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग ने पारंपरिक आंतरिक दहन इंजन वाले वाहनों को पीछे छोड़ दिया है। अब तक 2.17 मिलियन से अधिक पंजीकरण दर्ज किए जा चुके हैं, जो बीते वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाते हैं। यह संकेत है कि उपभोक्ताओं का रुझान धीरे-धीरे स्वच्छ और वैकल्पिक ईंधन की ओर बढ़ रहा है।

वित्त वर्ष 26 के ताजा आंकड़े
वित्त वर्ष समाप्त होने में अभी समय बाकी है, फिर भी इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण 2.17 मिलियन के पार पहुंच चुके हैं। पिछले वित्त वर्ष में यह संख्या करीब 1.97 मिलियन थी। यानी सालाना आधार पर लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञ इसे नीतिगत समर्थन, बढ़ते चार्जिंग नेटवर्क और नई तकनीक के प्रति बढ़ते भरोसे का परिणाम मानते हैं।
फरवरी के बिक्री संकेत
फरवरी 2026 में कुल 1,93,829 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हुई। यह आंकड़ा जनवरी की तुलना में थोड़ा कम रहा, लेकिन फरवरी 2025 के मुकाबले 38 प्रतिशत अधिक है। जानकारों का कहना है कि मासिक उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, जबकि सालाना वृद्धि बाजार की वास्तविक दिशा दिखाती है।
सेगमेंट के अनुसार प्रदर्शन
फरवरी में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री 1,11,680 यूनिट रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 45 प्रतिशत अधिक है। इलेक्ट्रिक तीनपहिया वाहनों की बिक्री 66,398 यूनिट तक पहुंची और इसमें 25 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि देखी गई। वहीं इलेक्ट्रिक यात्री कारों की 13,659 यूनिट्स बिकीं, जो सालाना आधार पर लगभग 45 प्रतिशत की बढ़त दर्शाती हैं।
दोपहिया बाजार की मजबूत पकड़
विशेषज्ञ मानते हैं कि इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों ने बाजार को गति दी है। किफायती कीमत, कम रखरखाव खर्च और शहरी उपयोग के अनुकूल डिजाइन ने मध्यम वर्ग को आकर्षित किया है। बढ़ते चार्जिंग विकल्पों ने भी उपभोक्ताओं की झिझक कम की है। यही वजह है कि इस सेगमेंट में लगातार मजबूत वृद्धि देखी जा रही है।
यात्री कारों में मिश्रित संकेत
इलेक्ट्रिक यात्री कारों की बिक्री सालाना आधार पर मजबूत रही है, लेकिन जनवरी की तुलना में इसमें गिरावट दर्ज की गई। उद्योग विशेषज्ञ इसे मांग में अस्थायी संतुलन का परिणाम मानते हैं। हालांकि नई मॉडलों की लॉन्चिंग और बेहतर बैटरी रेंज जैसे कारकों से इस सेगमेंट में दीर्घकालिक संभावनाएं बनी हुई हैं। प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां इस दिशा में निवेश बढ़ा रही हैं।
पारंपरिक वाहनों की तुलना
जहां इलेक्ट्रिक वाहनों की वृद्धि दर दोहरे अंक में है, वहीं पारंपरिक वाहनों की वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही है। इससे स्पष्ट होता है कि बाजार धीरे-धीरे ऊर्जा संक्रमण की ओर बढ़ रहा है। सरकार की नीतियां, ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव और पर्यावरणीय जागरूकता भी इस बदलाव को प्रभावित कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती स्वीकार्यता भारतीय ऑटो उद्योग के लिए नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देती है। आने वाले महीनों में यह रुझान और स्पष्ट हो सकता है।



