Electric Quadricycle PLI Standards: अब फुस्स इलेक्ट्रिक गाड़ियां नहीं चलेंगी, नए नियमों ने उड़ा दी कंपनियों की नींद
Electric Quadricycle PLI Standards: केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दुनिया में पारदर्शिता और मजबूती लाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में सरकार ने 25,938 करोड़ रुपये की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव योजना के तहत नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस (Automotive PLI Scheme) का मुख्य उद्देश्य केवल गाड़ियों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उनकी कार्यक्षमता और गुणवत्ता को विश्व स्तर पर ले जाना है। भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी की गई अधिसूचना के बाद अब कंपनियों को प्रोत्साहन राशि पाने के लिए सरकार द्वारा तय किए गए बेहद कठिन रास्तों से गुजरना होगा।

टेस्टिंग के कड़े मानकों से होगा गाड़ियों का फैसला
नए नियमों के लागू होने के बाद अब सड़कों पर उतरने से पहले इलेक्ट्रिक क्वाड्रिसाइकिल को अपनी योग्यता साबित करनी होगी। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि (Electric Vehicle Range Requirements) के तहत अब हर वाहन को सिंगल चार्ज पर कम से कम 80 किलोमीटर की दूरी तय करनी ही होगी। यह मानक यह सुनिश्चित करने के लिए तय किया गया है कि छोटे चार-पहिया वाहन केवल कागजों पर नहीं, बल्कि वास्तविक सड़कों पर भी भरोसेमंद साबित हों। इन मानकों की कड़ाई से जांच करने की जिम्मेदारी सरकार ने देश की अग्रणी एजेंसियों को सौंपी है।
ऊर्जा की बचत और बेहतरीन परफॉर्मेंस की शर्त
रेंज के साथ-साथ अब गाड़ियों की भूख यानी बिजली की खपत पर भी लगाम लगाई गई है। सरकार ने आदेश दिया है कि प्रति 100 किलोमीटर चलने के लिए वाहन की ऊर्जा खपत 12 kWh से कम होनी चाहिए। जब कोई कंपनी (Energy Efficiency Standards) का पालन पूरी ईमानदारी से करेगी, तभी उसे सरकारी खजाने से सब्सिडी या इंसेंटिव मिल पाएगा। इस कदम से न केवल ग्राहकों को कम बिजली में ज्यादा सफर मिलेगा, बल्कि भारत की सड़कों पर चल रहे वाहन दुनिया के सबसे कुशल वाहनों में गिने जाएंगे।
क्वालिटी के मामले में कोई समझौता नहीं होगा
एक्सपर्ट्स का मानना है कि पिछले कुछ सालों में बाजार में घटिया क्वालिटी के इलेक्ट्रिक वाहनों की बाढ़ आ गई थी, जिससे ग्राहकों का भरोसा डगमगाया है। टेरी (TERI) के जानकारों के अनुसार, अब (Electric Vehicle Battery Testing) और सुरक्षा के मानकों को प्राथमिकता देने से बाजार में केवल वही खिलाड़ी टिक पाएंगे जो तकनीक पर निवेश करेंगे। यह सख्त रुख इसलिए भी जरूरी है क्योंकि भारत अपनी छवि एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में बना रहा है, जहां सुरक्षा और गुणवत्ता सर्वोपरि है।
विदेशी बाजारों में भारतीय गाड़ियों का बढ़ेगा डंका
क्वाड्रिसाइकिल सेगमेंट भारत के लिए निर्यात के लिहाज से सोने की खान साबित हो सकता है। आंकड़ों की मानें तो भारत में बनने वाली लगभग 98 प्रतिशत क्वाड्रिसाइकिल विदेशों में बेची जाती हैं। अब (Global Export Standards) के अनुरूप उत्पादन होने से भारतीय कंपनियों को अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशियाई देशों में अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिलेगी। जब घरेलू स्तर पर टेस्टिंग इतनी कड़ी होगी, तो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय उत्पादों को आसानी से स्वीकार किया जाएगा, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में भी बढ़ोतरी होगी।
बाजार में सीएनजी का दबदबा और इलेक्ट्रिक की चुनौती
वर्तमान में क्वाड्रिसाइकिल बाजार की स्थिति काफी दिलचस्प है, क्योंकि पिछले दो वर्षों में इस सेगमेंट में इलेक्ट्रिक की बिक्री लगभग शून्य रही है। सड़कों पर अभी भी सीएनजी वाहनों का राज है और (Market Competition Analysis) बताता है कि बजाज ऑटो जैसी बड़ी कंपनियां अब इस धारणा को बदलने की तैयारी में हैं। पुणे स्थित बजाज ऑटो अपने लोकप्रिय मॉडल ‘क्यूट’ के इलेक्ट्रिक अवतार पर भारी निवेश कर रही है, जो आने वाले समय में बाजार की तस्वीर को पूरी तरह बदल सकता है।
मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की धमक
सरकार की एक और सबसे बड़ी शर्त यह है कि प्रोत्साहन पाने के लिए गाड़ियों में कम से कम 50 प्रतिशत कल-पुर्जे भारतीय होने चाहिए। इस (Localized Manufacturing Incentives) के माध्यम से सरकार देश के छोटे और मध्यम उद्योगों को मजबूत करना चाहती है। पीएम ई-ड्राइव योजना के साथ इन नियमों का जुड़ाव यह दर्शाता है कि अब भारत आयात पर निर्भर रहने के बजाय खुद के कंपोनेंट्स और इकोसिस्टम विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
सुरक्षित और टिकाऊ परिवहन का नया सवेरा
अंततः, ये नए नियम भारत को एक स्वच्छ और हरित भविष्य की ओर ले जाने का संकल्प हैं। केवल सब्सिडी बांटने के बजाय (Sustainable Urban Mobility) पर ध्यान देने से ग्राहकों को लंबे समय तक चलने वाले वाहन मिलेंगे। भविष्य में क्वाड्रिसाइकिल केवल माल ढोने या यात्रियों के लिए एक छोटा विकल्प नहीं रहेगी, बल्कि यह भारतीय प्रिसिजन इंजीनियरिंग की सफलता की कहानी कहेगी। सरकार का यह विजन भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।



