बिज़नेस

ConsumerRights – डार्क पैटर्न पर सरकार की बड़ी कार्रवाई, सात कंपनियों पर लगा जुर्माना

ConsumerRights – ऑनलाइन खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाली डिजिटल गतिविधियों पर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने डार्क पैटर्न का इस्तेमाल करने के आरोप में जेप्टो, फिजिक्स वाला सहित सात डिजिटल और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कुल 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। सरकार का कहना है कि ग्राहकों की जानकारी या सहमति के बिना अतिरिक्त शुल्क जोड़ना, सदस्यता स्वतः सक्रिय करना या खरीदारी के लिए मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है और ऐसी गतिविधियों पर आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

डार्क पैटर्न पर क्यों हुई कार्रवाई?

सरकार ने नवंबर 2023 में डार्क पैटर्न रोकने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे। डार्क पैटर्न ऐसे डिजिटल तरीके होते हैं, जिनका उद्देश्य उपभोक्ता को भ्रमित करके किसी सेवा, सदस्यता या अतिरिक्त भुगतान के लिए प्रेरित करना होता है। जांच के दौरान सीसीपीए ने पाया कि कुछ कंपनियां ग्राहकों के निर्णय को प्रभावित करने वाले ऐसे इंटरफेस और प्रक्रियाओं का इस्तेमाल कर रही थीं। इसी आधार पर संबंधित कंपनियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई।

किन मामलों में मिली अनियमितताएं?

जांच में सामने आया कि फिजिक्स वाला के प्लेटफॉर्म पर भुगतान के समय 10 रुपये का दान पहले से चयनित रहता था। कुछ मुफ्त कोर्स देखने के लिए भी उपयोगकर्ताओं से पहले व्यक्तिगत जानकारी मांगी जाती थी। वहीं, फर्स्टक्राई पर टैक्स सहित कीमत दिखाने के बावजूद अंतिम भुगतान के समय अतिरिक्त जीएसटी जोड़े जाने का मामला सामने आया। फार्मईजी के प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों की शॉपिंग कार्ट में सदस्यता स्वतः शामिल किए जाने की भी शिकायत मिली, जिसे नियमों के विपरीत माना गया।

नोटिस के बाद कंपनियों ने किए बदलाव

सीसीपीए ने इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) और बुकमायशो को भी नोटिस जारी किया था। प्राधिकरण के हस्तक्षेप के बाद दोनों कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म में आवश्यक बदलाव किए। इंडिगो ने सीट चयन और कन्फर्म शेमिंग से जुड़ी शिकायतों का समाधान किया, जबकि बुकमायशो ने टिकट बुकिंग के दौरान बिना अनुमति जोड़े जाने वाले अतिरिक्त शुल्क को हटाने की जानकारी दी।

सरकार की निगरानी में हैं 13 तरह के डार्क पैटर्न

सरकार ने ई-कॉमर्स और डिजिटल सेवाओं में 13 प्रकार के डार्क पैटर्न की पहचान की है। इनमें False Urgency, Basket Sneaking, Confirm Shaming, Forced Action, Subscription Trap, Interface Interference, Bait and Switch, Drip Pricing, Disguised Advertisement, Nagging, Trick Question, SaaS Billing और Rogue Malware जैसी गतिविधियां शामिल हैं। इन तरीकों के जरिए उपभोक्ताओं को अनजाने में अतिरिक्त भुगतान या अवांछित सेवाओं की ओर धकेला जा सकता है।

ऑनलाइन ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?

सरकार का स्पष्ट कहना है कि किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म को उपभोक्ता की स्पष्ट सहमति के बिना अतिरिक्त शुल्क, सदस्यता या अन्य भुगतान नहीं जोड़ने दिए जाएंगे। सभी ऑनलाइन कंपनियों को मूल्य, शुल्क और सेवाओं से जुड़ी जानकारी पारदर्शी तरीके से प्रस्तुत करनी होगी। यदि कोई प्लेटफॉर्म डार्क पैटर्न अपनाता पाया गया तो उसके खिलाफ जुर्माने के साथ अन्य नियामकीय कार्रवाई भी की जा सकती है। इस कदम से ऑनलाइन खरीदारी करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद डिजिटल अनुभव मिलने की उम्मीद है।

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