AutoIndustry – पांच वर्षों में एक लाख करोड़ निवेश की तैयारी
AutoIndustry – भारत का ऑटोमोबाइल क्षेत्र एक नए विस्तार चरण में प्रवेश कर चुका है। देश की प्रमुख कार निर्माता कंपनियां अगले पांच से छह वर्षों में करीब एक लाख करोड़ रुपये निवेश करने की योजना पर काम कर रही हैं। उद्योग जगत का मानना है कि कर ढांचे में स्थिरता, खासकर जीएसटी दरों को लेकर स्पष्टता, कंपनियों को लंबी अवधि की रणनीति बनाने का भरोसा दे रही है। मांग के रुझान अपेक्षाकृत मजबूत हैं और घरेलू बाजार के साथ निर्यात संभावनाएं भी कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

उत्पादन क्षमता में संभावित बड़ी बढ़ोतरी
वर्तमान में भारत की कुल पैसेंजर व्हीकल उत्पादन क्षमता लगभग 55 लाख यूनिट प्रतिवर्ष है। प्रस्तावित निवेश के बाद इसे बढ़ाकर करीब 90 लाख यूनिट सालाना तक ले जाने की तैयारी है। यानी लगभग 35 लाख अतिरिक्त वाहनों का उत्पादन संभव होगा, जो मौजूदा क्षमता से करीब 65 प्रतिशत अधिक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ मांग के मौजूदा उछाल का परिणाम नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक बदलाव का संकेत है। कंपनियां भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई फैक्ट्रियां, आधुनिक तकनीक और उन्नत मॉडल लाइनअप पर निवेश कर रही हैं।
मारुति सुजुकी की आक्रामक योजना
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी इंडिया इस विस्तार अभियान में अग्रणी भूमिका निभा रही है। कंपनी वित्त वर्ष 2027 से 2030 के बीच करीब 15 लाख यूनिट सालाना अतिरिक्त उत्पादन क्षमता जोड़ने की योजना बना रही है। यह उसकी मौजूदा 26 लाख यूनिट क्षमता की तुलना में बड़ा इजाफा है।
गुजरात के गांधीनगर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड प्लांट इस योजना का प्रमुख हिस्सा है, जिसकी वार्षिक क्षमता 10 लाख यूनिट होगी। इस परियोजना पर लगभग 35,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। कंपनी का लक्ष्य घरेलू मांग के साथ निर्यात बाजार में भी अपनी स्थिति मजबूत करना है।
टोयोटा किर्लोस्कर की दोहरी रणनीति
बेंगलुरु स्थित टोयोटा किर्लोस्कर मोटर भी उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। कंपनी अपनी क्षमता को दोगुना कर 10 लाख यूनिट सालाना तक पहुंचाना चाहती है।
कर्नाटक के बिदाड़ी प्लांट में 1 लाख यूनिट की वृद्धि और महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में नए संयंत्र की स्थापना इसकी रणनीति का हिस्सा है। नया प्लांट मुख्य रूप से निर्यात को ध्यान में रखकर विकसित किया जाएगा। फॉर्च्यूनर और इनोवा जैसे मॉडलों की लंबी प्रतीक्षा सूची भी उत्पादन बढ़ाने की जरूरत को दर्शाती है।
महिंद्रा एंड महिंद्रा का बड़ा विस्तार
एसयूवी सेगमेंट में मजबूत उपस्थिति रखने वाली महिंद्रा एंड महिंद्रा ने भी व्यापक विस्तार की घोषणा की है। कंपनी नागपुर में 5 लाख यूनिट और चाकन में 2.4 लाख यूनिट की अतिरिक्त क्षमता जोड़ रही है।
वित्त वर्ष 2026 के अंत तक कंपनी की कुल क्षमता 7.74 लाख यूनिट तक पहुंचने की संभावना है, जबकि 2029-30 तक इसे 15 लाख यूनिट सालाना से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है। आने वाले वर्षों में नई कॉम्पैक्ट एसयूवी श्रृंखला इस बढ़ोतरी का मुख्य आधार बनेगी।
टाटा मोटर्स की संतुलित बढ़त
टाटा मोटर्स अपेक्षाकृत संतुलित रणनीति अपना रही है। कंपनी तमिलनाडु में 9,000 करोड़ रुपये के निवेश से नया संयंत्र स्थापित कर रही है, जिसकी क्षमता 2.5 लाख यूनिट प्रतिवर्ष होगी।
मौजूदा संयंत्रों की क्षमता भी बढ़ाकर करीब 10 लाख यूनिट तक ले जाने की योजना है। अतिरिक्त उत्पादन का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहन और नई पीढ़ी की एसयूवी के लिए किया जाएगा।
एमजी मोटर का इलेक्ट्रिक फोकस
जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया भी करीब 4,000 करोड़ रुपये निवेश कर अपनी उत्पादन क्षमता लगभग तीन गुना बढ़ाकर 3 लाख यूनिट सालाना करने की तैयारी में है। कंपनी प्लग-इन हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों के नए मॉडल पेश करने पर जोर दे रही है।
क्या यह स्थायी बदलाव का संकेत है
विश्लेषकों का कहना है कि यह निवेश चक्र केवल अस्थायी मांग का परिणाम नहीं है। स्थिर कर व्यवस्था, बढ़ती उपभोक्ता मांग और निर्यात संभावनाओं ने भारत को वैश्विक ऑटो निर्माण केंद्र के रूप में उभरने का अवसर दिया है।
यदि योजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो आने वाले दशक में देश की पैसेंजर व्हीकल उत्पादन क्षमता 90 लाख यूनिट सालाना तक पहुंच सकती है। इसे हाल के वर्षों का सबसे बड़ा औद्योगिक विस्तार माना जा रहा है।



