Vaishali Sarita Murder Case : दरोगा की स्कॉर्पियो से शव फेंकने वाले भैसूर समेत तीन गिरफ्तार
Vaishali Sarita Murder Case : बिहार के वैशाली जिले से सामने आए चर्चित सरिता प्रकाश हत्याकांड में पुलिस को एक महत्वपूर्ण कामयाबी मिली है। नवविवाहिता की हत्या कर उसके शव को दरोगा की स्कॉर्पियो गाड़ी से फेंकने के मामले में पुलिस ने जाल बिछाकर भैसूर सहित तीन मुख्य आरोपियों को दबोच लिया है। यह घटनाक्रम (High Profile Criminal Investigation) का हिस्सा है, जिसकी निगरानी खुद जिले के आला अधिकारी कर रहे हैं। 17 जनवरी की आधी रात को सोनपुर के हरिहरनाथ थाना क्षेत्र में जिस तरह से अमानवीय ढंग से शव को सड़क किनारे फेंका गया था, उसने पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

आरोपियों की गिरफ्तारी और पुलिस का बड़ा खुलासा
सोनपुर के अपर पुलिस अधीक्षक प्रीतीश कुमार ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस ने विशेष छापेमारी अभियान के तहत करताहा बुजुर्ग निवासी जीतन सिंह, उसके बेटे प्रिंस कुमार और राकेश कुमार को गिरफ्तार किया है। इन तीनों से हुई (Interrogation of Accused Persons) के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, जघन्य हत्याकांड को अंजाम देने के बाद इन आरोपियों ने सबूत मिटाने की नियत से शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई थी। गिरफ्तार आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे इस पूरी साजिश में शामिल थे और घटना के समय स्कॉर्पियो में ही मौजूद थे।
सीसीटीवी फुटेज और स्कॉर्पियो में सवार लोगों की भूमिका
इस मामले की गुत्थी सुलझाने में इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ वह वीडियो सबसे अहम साबित हुआ, जिसमें सफेद रंग की स्कॉर्पियो से शव को उतारकर फेंकते हुए देखा गया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, (Evidence Collection Process) में यह बात स्पष्ट हुई है कि आरोपी प्रिंस कुमार ने ही गाड़ी से शव को उतारकर दरवाजे पर फेंका था, जबकि राकेश कुमार पिछली सीट पर बैठकर निगरानी कर रहा था। इस क्रूरता के पीछे पारिवारिक विवाद और दहेज की मांग को मुख्य कारण माना जा रहा है, जिसकी पुष्टि के लिए पुलिस मृतका के अन्य रिश्तेदारों से भी संपर्क साध रही है।
दरोगा की स्कॉर्पियो और एफएसएल टीम की जांच
जांच के दौरान सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब सदर एसडीपीओ टू गोपाल मंडल के नेतृत्व में पुलिस ने जलालपुर गांव से वह स्कॉर्पियो बरामद की, जिसका इस्तेमाल शव फेंकने में किया गया था। यह वाहन दरोगा संतोष रजक का बताया जा रहा है, जो वर्तमान में पानापुर कांटी थाना में तैनात हैं। फॉरेंसिक टीम ने (Forensic Science Lab Report) की तैयारी के लिए गाड़ी से खून के धब्बे और बालों के नमूने एकत्र किए हैं। दरोगा के ससुर के घर से गाड़ी का मिलना इस मामले में पुलिस प्रशासन की भूमिका को भी संदिग्ध बना रहा है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच जारी है।
एसआईटी का गठन और फरार आरोपियों की तलाश
घटना की गंभीरता और डीआईजी नीलेश कुमार के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है। मृतका के पिता जयप्रकाश महतो ने पति सत्येंद्र कुमार और भैसूर जीतन सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ (Legal Action and FIR) दर्ज कराई थी। पुलिस अब मुजफ्फरपुर और वैशाली के संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है ताकि फरार चल रहे अन्य आरोपियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जा सके। मृतका के परिजनों ने न्याय की गुहार लगाते हुए दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की है।
समाज में बढ़ती घरेलू हिंसा और न्याय की उम्मीद
सरिता प्रकाश की मौत ने एक बार फिर नवविवाहिताओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। 28 वर्षीय सरिता के साथ हुई इस दरिंदगी ने स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। पुलिस प्रशासन का दावा है कि (Judicial System Procedures) के तहत ठोस साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं ताकि कोर्ट में मामला कमजोर न पड़े। पुलिस दरोगा संतोष रजक की संलिप्तता की भी बारीकी से जांच कर रही है कि क्या उनकी जानकारी में इस सरकारी पावर वाले वाहन का इस्तेमाल अपराध को छिपाने के लिए किया गया था।



