Tridus Remedies Syrup Ban: हाजीपुर की सिरप कंपनी में मिला जानलेवा जहर, फैक्टरी छोड़ भागे मालिक
Tridus Remedies Syrup Ban: बिहार के वैशाली जिले से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जहाँ बच्चों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ का मामला उजागर हुआ है। हाजीपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित ट्रिडस रेमेडीज नामक कंपनी द्वारा बनाए गए कफ सिरप में (Toxic Ethylene Glycol) की मौजूदगी पाई गई है। यह वही घातक रसायन है जिसने पूर्व में भी कई मासूमों की जान ली है, और अब इसी जहरीले तत्व के मिलने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।

कंपनी के गेट पर लटका मिला रहस्यमयी ताला
तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में दवा पर प्रतिबंध लगने के बाद हाजीपुर स्थित इस फैक्टरी के मालिक और कर्मचारी रफूचक्कर हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई दिनों से कंपनी के (Pharmaceutical Unit Lockdown) की स्थिति बनी हुई है और मुख्य द्वार पर ताला लटका है। कार्रवाई के डर से कंपनी प्रबंधन ने काम रोक दिया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दाल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी दाल ही काली है।
ड्रग इंस्पेक्टर की जांच रिपोर्ट ने खोली पोल
दरअसल, केंद्रीय ड्रग इंस्पेक्टर ने अक्टूबर महीने में इस कंपनी के कफ सिरप के नमूने जांच के लिए भेजे थे, जिनकी रिपोर्ट हाल ही में सार्वजनिक हुई है। जांच में पता चला है कि अल्मोंट-किड नामक सिरप (Drug Quality Testing Failure) का शिकार हुआ है और इसमें मानकों से कहीं अधिक जहरीले रसायनों का मिश्रण किया गया था। इस रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय औषधि नियंत्रक ने तुरंत प्रभाव से दवा की बिक्री और वितरण पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
एलर्जी की दवा के नाम पर परोसा जा रहा था जहर
यह सिरप विशेष रूप से छोटे बच्चों को एलर्जी, छींक, खुजली और आंखों से पानी आने जैसी समस्याओं में राहत देने के लिए डॉक्टर द्वारा लिखा जाता था। लेकिन (Cough Syrup Health Risks) को नजरअंदाज करते हुए कंपनी ने इसमें एथिलीन ग्लाइकोल मिला दिया, जो बच्चों के लिवर और किडनी को पूरी तरह फेल करने की क्षमता रखता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस रसायन का मामूली अंश भी बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
बैच नंबर एएल-24002 में मिला खतरनाक मिलावट
जांच अधिकारियों ने ट्रिडस रेमेडीज द्वारा निर्मित एक विशेष बैच एएल-24002 पर अपनी नजरें टेढ़ी कर दी हैं, जिसमें सबसे ज्यादा खामियां मिली हैं। परीक्षण के दौरान दवा के इस लॉट में (Harmful Chemical Content) की मात्रा 1.4876 प्रतिशत पाई गई, जो निर्धारित मानकों से कई गुना अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में एथिलीन ग्लाइकोल का होना निर्माण प्रक्रिया में भारी लापरवाही या जानबूझकर की गई मिलावट की ओर इशारा करता है।
बिहार के किशनगंज तक पहुंची थी मौत की सप्लाई
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस जहरीले कफ सिरप की खेप बिहार के किशनगंज जिले में भी सप्लाई की गई थी। हालांकि राहत की बात यह है कि (Medicine Supply Chain Tracking) के दौरान पता चला कि वहां बहुत कम मात्रा में स्टॉक भेजा गया था। फिर भी, खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पूरे राज्य में अलर्ट जारी कर दिया है और संबंधित बैच की सभी दवाओं को बाजार से तुरंत वापस मंगाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
मध्य प्रदेश की उस भयावह घटना की यादें हुईं ताजा
हाजीपुर की इस घटना ने एक बार फिर उन जख्मों को हरा कर दिया है, जब मध्य प्रदेश में मिलावटी सिरप पीने से कई बच्चों ने दम तोड़ दिया था। उस वक्त भी (Contaminated Medicine Scandal) का मुख्य कारण एथिलीन ग्लाइकोल ही था। बार-बार इस तरह की घटनाओं का सामने आना दवा कंपनियों की नैतिकता और ड्रग कंट्रोलर विभाग की निगरानी प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है कि आखिर ऐसे जहर को बाजार में पहुंचने कैसे दिया जाता है।
केंद्रीय औषधि विभाग का कड़ा एक्शन और निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय औषधि नियंत्रण विभाग ने देशभर के सभी राज्यों को इस विशेष सिरप के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। ड्रग्स कंट्रोलर ने (Drug Distribution Ban) को सख्ती से लागू करने को कहा है ताकि किसी भी अस्पताल या मेडिकल स्टोर पर यह दवा उपलब्ध न रहे। फिलहाल विभाग उन सभी कड़ियों को जोड़ रहा है जहाँ-जहाँ इस कंपनी के उत्पाद भेजे गए थे।
गिरफ्तारी की तलवार और प्रशासनिक कार्रवाई
हाजीपुर औद्योगिक थाना क्षेत्र की पुलिस और ड्रग विभाग की टीमें अब कंपनी के मालिकों की तलाश में छापेमारी कर रही हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि (Pharmaceutical Regulatory Action) के तहत कंपनी का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है और दोषियों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज होगा। फरार प्रबंधकों की तलाश के लिए पुलिस ने जाल बिछा दिया है ताकि इस आपराधिक लापरवाही की सजा उन्हें मिल सके।
सुरक्षित बचपन के लिए कड़े कानूनों की दरकार
इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि मुनाफे के लालच में दवा कंपनियां मासूम जिंदगियों को दांव पर लगाने से पीछे नहीं हटतीं। ऐसे में (Drug Safety Laws in India) को और अधिक सख्त बनाने की जरूरत है ताकि भविष्य में कोई भी कंपनी बच्चों की दवा में जहर मिलाने की हिम्मत न कर सके। जनता में भी अब इस ब्रांड को लेकर भारी आक्रोश है और लोग कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं।



