बिहार

SawanFestival – सावन की पहली सोमवारी और नाग पंचमी के संयोग पर बिहार में उमड़ी श्रद्धा

SawanFestival – सावन मास की पहली सोमवारी और नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग इस बार बिहार में गहरी आस्था और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। सोमवार तड़के से ही राज्य के प्रमुख शिवालयों, नाग देवता मंदिरों और विषहरी माता के पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, मंत्रोच्चार और भजन-कीर्तन के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के साथ नाग देवता की भी विधि-विधान से पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा की कामना की।’

दुर्लभ संयोग ने बढ़ाई श्रद्धालुओं की संख्या

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पहली सोमवारी और नाग पंचमी का एक ही दिन पड़ना विशेष शुभ माना जाता है। यही वजह रही कि इस बार सामान्य वर्षों की तुलना में मंदिरों में अधिक भीड़ उमड़ी। सुबह से ही श्रद्धालु गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री लेकर शिवालयों में पहुंचे। गांवों और शहरों दोनों जगहों पर शिवभक्ति का उत्साह स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जबकि नाग देवता के पूजन के लिए भी विशेष धार्मिक आयोजन किए गए।

लोक परंपरा और प्रकृति से जुड़ा है पर्व

बिहार में नाग पंचमी केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं मानी जाती, बल्कि इसे लोकजीवन, कृषि संस्कृति और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक भी माना जाता है। ग्रामीण इलाकों में आज भी खेतों की मेड़, पीपल और बरगद जैसे पुराने वृक्षों के समीप बने नाग देवता और विषहरी माता के स्थलों पर पूजा-अर्चना की परंपरा निभाई जाती है। किसान अच्छी बारिश, भरपूर फसल और परिवार की खुशहाली की कामना करते हुए दूध, लावा, दूर्वा और पुष्प अर्पित करते हैं।

प्रमुख मंदिरों में दिनभर रही चहल-पहल

राज्य के कई प्रसिद्ध शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दर्ज की गई। समस्तीपुर के थानेश्वर स्थान, विद्यापतिधाम स्थित उगना महादेव मंदिर, खुदनेश्वर धाम, मुजफ्फरपुर के गरीबनाथ धाम, दरभंगा के कुशेश्वरनाथ मंदिर और भागलपुर के अजगैविनाथ धाम में सुबह से विशेष पूजा-अर्चना का क्रम जारी रहा। इसी तरह लखीसराय के बभनगावां नाग मंदिर, बेगूसराय के बाजोपुर विषहरी मंदिर, पटना जिले के मसौढ़ी स्थित नागस्थान और मधुबनी के राजनगर नाग मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे।

पारंपरिक विधि से हुई पूजा-अर्चना

धर्माचार्यों के अनुसार श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया और भगवान शिव का जल, गंगाजल तथा पंचामृत से अभिषेक किया। इसके बाद बेलपत्र, चंदन, धतूरा, आक के फूल और फल अर्पित किए गए। नाग देवता और विषहरी माता के प्रतीक स्वरूप स्थापित प्रतिमाओं या पूजन स्थलों पर हल्दी, अक्षत, दूर्वा, लावा और प्रसाद चढ़ाया गया। कई मंदिरों में रुद्रपाठ, महामृत्युंजय मंत्र और शिव पुराण का पाठ भी कराया गया।

प्रकृति संरक्षण का भी दिया गया संदेश

धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ इस पर्व के दौरान पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी प्रमुखता से सामने आया। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि जीवित सांपों को पकड़ने या उन्हें दूध पिलाने जैसी परंपराओं से बचें और केवल प्रतीकात्मक रूप से पूजा करें। उनका कहना है कि सांप पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनका संरक्षण प्रकृति के संतुलन के लिए आवश्यक है।

प्रशासन ने किए विशेष इंतजाम

श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए प्रमुख मंदिरों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई। सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग, सीसीटीवी निगरानी, चिकित्सा सहायता और यातायात प्रबंधन की व्यवस्था की गई। कई स्थानों पर स्वयंसेवी संगठनों ने पेयजल, प्राथमिक उपचार और श्रद्धालुओं की सहायता के लिए सेवा शिविर भी लगाए। पूरे दिन धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए और श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं अनुशासन के साथ पूजा-अर्चना में भाग लिया।

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.