बिहार

Rohtas Ropeway Investigation: मौत का झूला बनते-बनते बचा रोहतास रोपवे, अब इंजीनियरों पर गिरेगी गाज

Rohtas Ropeway Investigation: बिहार के रोहतास जिले में हाल ही में हुए रोपवे हादसे ने शासन और प्रशासन के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। मंगलवार को बिहार के पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए घोषणा की कि जांच रिपोर्ट में संवेदक और विभाग के इंजीनियरों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। इस (Government Accountability) को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का मन बना लिया है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे तकनीकी खामियां और भ्रष्टाचार मिलकर मासूम जिंदगियों को खतरे में डाल सकते हैं।

Rohtas Ropeway Investigation
Rohtas Ropeway Investigation

नवनिर्मित रोपवे का धराशायी होना और टला एक बड़ा हादसा

बीते शुक्रवार को जब रोहतास में इस रोपवे का परीक्षण (Rohtas Ropeway Investigation) किया जा रहा था, तभी अचानक यह नवनिर्मित ढांचा ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। गनीमत यह रही कि उस समय कोई आम नागरिक इसमें सवार नहीं था, जिससे एक (Major Accident Prevention) संभव हो पाया। यह रोपवे रोहतास प्रखंड को ऐतिहासिक रोहतासगढ़ किला और पवित्र रोहितेश्वर धाम से जोड़ने के लिए बनाया गया था। परीक्षण के दौरान रोपवे के ध्वस्त होने से न केवल सरकारी संपत्ति का नुकसान हुआ, बल्कि सुरक्षा मानकों पर भी सवाल खड़े हो गए।


जांच समिति की रिपोर्ट और इंजीनियरों के निलंबन का आदेश

हादसे की गंभीरता को देखते हुए बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया गया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि प्रोजेक्ट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर ने (Professional Misconduct) के तहत काम किया और गुणवत्ता की अनदेखी की। मंत्री दिलीप जायसवाल ने स्पष्ट आदेश दिया है कि इन दोनों इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए ताकि सिस्टम में एक कड़ा संदेश जाए।


निर्माण कंपनी होगी ब्लैकलिस्ट और रुकेगा भुगतान

सरकार ने न केवल अधिकारियों पर बल्कि उस निजी कंपनी पर भी हंटर चलाया है जिसने इस रोपवे का निर्माण किया था। कोलकाता की ‘रोपवे एंड रिसोर्स प्राइवेट लिमिटेड’ को इस 12.65 करोड़ के प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी दी गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर (Construction Company Blacklisting) की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मंत्री ने कहा कि ऐसी कंपनियों के लिए बिहार में कोई जगह नहीं है जो घटिया सामग्री का उपयोग कर लोगों की जान जोखिम में डालती हैं।


परीक्षण के दौरान मची चीख-पुकार और टावर का क्षतिग्रस्त होना

हादसे के वक्त जब लोड टेस्टिंग चल रही थी, तभी रोपवे से जुड़ी चार ट्रॉलियां अनियंत्रित होकर गिर गईं। इस दौरान रोपवे का एक मुख्य टावर भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। मौके पर मौजूद (Safety Awareness) दिखाते हुए श्रमिकों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई। अधिकारियों ने बताया कि यदि यह हादसा जनता के लिए रोपवे खुलने के बाद होता, तो परिणाम अत्यंत भयावह हो सकते थे। वर्तमान में पूरा ढांचा असुरक्षित घोषित कर दिया गया है।


तार फंसने की तकनीकी वजह और गुणवत्ता पर उठे सवाल

बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के वरिष्ठ अभियंता खुर्शीद करीम के अनुसार, लोड बढ़ाने के दौरान एक तार फंस गया था, जिससे पूरा सिस्टम चरमरा गया। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तार फंसने से इतना बड़ा ढांचा नहीं गिरना चाहिए, यह (Structural Integrity) में बड़ी कमी का संकेत है। अब विभाग इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रहा है कि क्या निर्माण में इस्तेमाल किया गया लोहा और केबल निर्धारित मानकों के अनुरूप थे या नहीं।


जब तक सुरक्षा की गारंटी नहीं तब तक आम जनता के लिए नो एंट्री

हादसे के बाद विभाग ने कड़ा फैसला लिया है कि जब तक तकनीकी अधिकारी और सुरक्षा विशेषज्ञ रोपवे की मजबूती से शत-प्रतिशत संतुष्ट नहीं हो जाते, तब तक इसे आम जनता के लिए नहीं खोला जाएगा। पर्यटन की दृष्टि से (Public Safety Standard) का पालन करना अत्यंत अनिवार्य है, खासकर तब जब यह पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों को जोड़ता हो। रोहतासगढ़ किले की यात्रा करने वाले पर्यटकों को अभी इस सुविधा के लिए और इंतजार करना होगा।


पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिशों को लगा गहरा धक्का

रोहतासगढ़ किला और रोहितेश्वर धाम को रोपवे से जोड़ना बिहार सरकार का एक महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट था ताकि राज्य में धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन को बढ़ाया जा सके। लेकिन (Project Management Failures) के कारण इस योजना को बड़ा झटका लगा है। 12 करोड़ से अधिक की लागत वाला यह प्रोजेक्ट अब विवादों और जांच के घेरे में है। स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर काफी आक्रोश है, क्योंकि वे लंबे समय से इस रोपवे के शुरू होने का इंतजार कर रहे थे।


भविष्य की रणनीति और भ्रष्टाचार मुक्त बिहार का संकल्प

पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल ने दोहराया कि बिहार में विकास कार्यों में किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों पर होने वाली यह कार्रवाई अन्य (Engineering Projects Oversight) के लिए एक नजीर साबित होगी। सरकार अब राज्य के अन्य निर्माणाधीन पुलों और रोपवे की भी नए सिरे से ऑडिट कराने पर विचार कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी किसी दुर्घटना की पुनरावृत्ति न हो और सरकारी धन का सदुपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

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