RJD Internal Conflict Bihar: छिड़ा घमासान! भाई वीरेंद्र ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर उठाए सवाल
RJD Internal Conflict Bihar: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राष्ट्रीय जनता दल के भीतर असंतोष के स्वर तेज होने लगे हैं। पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। परिवार में भाई-बहन की बयानबाजी के बाद अब पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक भाई वीरेंद्र ने टिकट बंटवारे को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर कुछ ऐसे लोग सक्रिय हैं जो (Political Leadership Challenges) को बढ़ा रहे हैं और स्थानीय मजबूत नेताओं की अनदेखी कर बाहरी लोगों को तरजीह दे रहे हैं। भाई वीरेंद्र का यह बयान सीधे तौर पर पार्टी की चयन प्रक्रिया और रणनीतिक फैसलों पर एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है।

स्थानीय नेताओं की अनदेखी और बाहरी प्रत्याशियों का बोलबाला
भाई वीरेंद्र ने आरोप लगाया कि राजद के शीर्ष नेतृत्व ने जमीन से जुड़े उन कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया जो वर्षों से पार्टी को सींच रहे थे। उन्होंने कहा कि दल में कुछ ऐसे नामचीन समाजवादी बैठे हैं जो एक साथ कई जिलों की राजनीति को नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं। जब तक ऐसे (Political Party Ticket Strategy) को प्रभावित करने वाले लोग संगठन में रहेंगे, तब तक पार्टी की स्थिति में सुधार होना नामुमकिन है। विधायक ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि अगर यही ढर्रा जारी रहा, तो भविष्य के चुनावों में विधानसभा के भीतर पार्टी अपना अपेक्षित प्रभाव कभी नहीं छोड़ पाएगी।
दिनारा सीट पर विजय मंडल का टिकट काटने से नाराजगी
टिकट वितरण की विसंगतियों को उजागर करते हुए भाई वीरेंद्र ने दिनारा विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण दिया। उन्होंने सवाल किया कि जब वहां से यादव उम्मीदवार को ही चुनाव लड़ाना था, तो तत्कालीन विधायक विजय मंडल का पत्ता क्यों साफ किया गया? वीरेंद्र के अनुसार, (Candidate Selection Criteria) में पारदर्शिता की कमी थी और विजय मंडल जैसे अनुभवी नेता को मौका न देना एक बड़ी गलती साबित हुई। उल्लेखनीय है कि राजद ने विजय मंडल की जगह शशि शंकर कुमार को मैदान में उतारा था, लेकिन वहां से उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के आलोक कुमार सिंह ने बाजी मार ली, जिससे भाई वीरेंद्र के आरोपों को और बल मिल गया है।
भाजपा का तेजस्वी यादव पर तंज और आंतरिक कलह का दावा
राजद के भीतर मचे इस घमासान पर भारतीय जनता पार्टी ने भी चुटकी लेने में देर नहीं की। भाजपा प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि भाई वीरेंद्र का बयान यह साबित करता है कि राजद में सब कुछ ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव अपनी हार का ठीकरा कभी ईवीएम पर तो कभी चुनाव आयोग पर फोड़ते हैं, जबकि उनके अपने ही विधायक (Internal Party Grievances) को सार्वजनिक कर रहे हैं। भाजपा का मानना है कि तेजस्वी को अब बाहरी संस्थानों पर आरोप लगाने के बजाय अपनी पार्टी के भीतर पनप रहे विद्रोह और टिकट वितरण प्रणाली में हुई धांधली का जवाब जनता और अपने कार्यकर्ताओं को देना चाहिए।
कार्यकर्ताओं का टूटता हौसला और भविष्य की चिंता
भाई वीरेंद्र ने अपनी बातचीत में यह भी संकेत दिया कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं का मनोबल अब टूट रहा है। जब बाहरी जिलों से आए नेताओं को अचानक टिकट थमा दिया जाता है, तो वर्षों से मेहनत कर रहे स्थानीय नेताओं में हीन भावना घर कर लेती है। (Grassroots Political Activism) के बिना कोई भी दल लंबी रेस का घोड़ा नहीं बन सकता। राजद विधायक का मानना है कि अगर पार्टी को दोबारा सत्ता के शिखर तक पहुँचाना है, तो चाटुकारिता और पैरवी संस्कृति को खत्म कर योग्यता और वफादारी को ही टिकट का मुख्य आधार बनाना होगा, अन्यथा पार्टी केवल कुछ जिलों तक ही सिमट कर रह जाएगी।
राजद के लिए एकजुटता बनाए रखने की बड़ी चुनौती
वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए तेजस्वी यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी को एकजुट रखने की है। एक तरफ जहां एनडीए गठबंधन अपनी जीत का जश्न मना रहा है, वहीं राजद के भीतर की यह दरार विरोधियों को हमला करने का नया मौका दे रही है। यदि (Strategic Political Realignment) पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में कई और विधायक अपनी आवाज बुलंद कर सकते हैं। लालू प्रसाद यादव की अनुपस्थिति में तेजस्वी को अब न केवल विपक्षी दलों से लड़ना है, बल्कि अपनी पार्टी के भीतर असंतुष्ट वरिष्ठ नेताओं को भी विश्वास में लेना होगा ताकि संगठन को बिखरने से बचाया जा सके।



