Patna NEET Student Case: पटना नीट छात्रा मौत मामले में FSL रिपोर्ट ने खोली दरिंदगी की पोल, दो थानाध्यक्ष निलंबित
Patna NEET Student Case: बिहार की राजधानी पटना में जहानाबाद की नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में अब एक बड़ा मोड़ सामने आया है। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की सीलबंद रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। लापरवाही बरतने के आरोप में पत्रकारनगर थानाध्यक्ष रोशनी कुमारी और कदमकुआं थानाध्यक्ष हेमंत झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। एफएसएल की बायोलॉजिकल टीम ने छात्रा के कपड़ों और हॉस्टल से लिए गए नमूनों की गहन जांच के बाद (Forensic Evidence Analysis) की रिपोर्ट एसआईटी को सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार, इस रिपोर्ट में छात्रा के साथ हुई दरिंदगी की पुष्टि होने की बात कही जा रही है, जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया है।

एफएसएल रिपोर्ट में बर्बरता के संकेत और पुलिस की कार्रवाई
सीआईडी की एफएसएल टीम पिछले एक सप्ताह से लैब में सैंपल्स की जांच कर रही थी। शुक्रवार शाम जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद शनिवार को रिपोर्ट एसआईटी को सौंपी गई। हालांकि एसआईटी ने अभी आधिकारिक तौर पर (Biological Evidence Verification) के परिणामों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन रिपोर्ट के आधार पर पुलिस अधिकारियों पर की गई कार्रवाई बहुत कुछ बयां कर रही है। छात्रा के साथ जिस तरह की क्रूरता की बातें सामने आ रही हैं, उसने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दो अधिकारियों पर गाज गिरने के बावजूद मुख्य आरोपी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
घटनाक्रम: 6 जनवरी से मौत तक का दर्दनाक सफर
इस पूरे मामले की शुरुआत 6 जनवरी को हुई थी जब छात्रा अपने हॉस्टल में बेहोशी की हालत में मिली थी। उसे तुरंत पास के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर अगले ही दिन उसे दूसरे बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया गया। 8 जनवरी को छात्रा (Medical Coma Condition) में चली गई, जहां उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। 10 जनवरी को उसे वेंटिलेटर पर रखा गया और अंततः 11 जनवरी को कंकड़बाग के एक निजी अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया। इस सिलसिलेवार घटनाक्रम ने अस्पताल और हॉस्टल प्रशासन की भूमिका को भी संदेह के घेरे में ला दिया है।
जनाक्रोश और एसआईटी का गठन
छात्रा की मौत के बाद 12 जनवरी को पटना के कारगिल चौक पर भारी विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया। डीजीपी के निर्देश पर 13 जनवरी को इस मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए (Special Investigation Team) का गठन किया गया। एसआईटी ने सबसे पहले पीएमसीएच की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की समीक्षा की और फिर उसे विस्तृत विश्लेषण के लिए पटना एम्स भेजा। स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने शुरुआती दिनों में मामले को दबाने की कोशिश की थी, यही कारण है कि अब जवाबदेही तय करते हुए थानाध्यक्षों को सस्पेंड किया गया है।
मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी अब भी बड़ी चुनौती
भले ही विभाग ने अपने अधिकारियों पर कार्रवाई कर दी हो, लेकिन मृतका के परिवार का सवाल अब भी वही है कि असली गुनहगार कब पकड़ा जाएगा? छात्रा के प्राइवेट पार्ट पर जख्म के निशान और (Post-Mortem Examination Findings) ने इस मामले को हत्या और बलात्कार की दिशा में मोड़ दिया है। पुलिस की कई टीमें छापेमारी कर रही हैं, लेकिन मुख्य आरोपी का सुराग न मिलना पुलिस की विफलता माना जा रहा है। एसआईटी अब एफएसएल रिपोर्ट के आधार पर नए सिरे से संदिग्धों से पूछताछ करने की तैयारी में है।
न्याय की मांग और भविष्य की कार्रवाई
पटना की सड़कों पर अब भी छात्रा के लिए न्याय की मांग गूँज रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्रों का कहना है कि सिर्फ निलंबन काफी नहीं है, बल्कि (Criminal Prosecution Process) को तेज कर दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। एसआईटी प्रमुख ने आश्वासन दिया है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर बहुत जल्द मुख्य आरोपी सलाखों के पीछे होगा। फिलहाल, पूरा बिहार इस रिपोर्ट के आधिकारिक सार्वजनिक होने और पुलिस के अगले बड़े कदम का इंतजार कर रहा है।



