Nitish Kumar Political Resilience: विरोधियों ने फैलाया सीएम के रिटायरमेंट का शोर, नीतीश कुमार ने यात्रा निकाल कर दिया करारा जवाब
Nitish Kumar Political Resilience: बिहार की राजनीति में पिछले कुछ सालों से एक ही चर्चा सबसे ज्यादा गर्म रही है कि क्या नीतीश कुमार अब थक चुके हैं? साल 2025 के चुनाव के दौरान विपक्ष ने (Political Propaganda Strategies) का सहारा लेते हुए तीन मुख्य बातें प्रचारित की थीं—पहला कि भाजपा उन्हें सीएम चेहरा नहीं बनाएगी, दूसरा कि जीत के बाद भी उन्हें कुर्सी नहीं मिलेगी, और तीसरा कि उनकी खराब सेहत उन्हें सत्ता से दूर कर देगी। लेकिन जब ये सारे दावे खोखले साबित हुए, तो अब 2026 की नई मियाद के साथ उनके ‘रिटायरमेंट’ की खबरें उड़ाई जा रही हैं। हालांकि, नीतीश कुमार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे अपनी शर्तों पर राजनीति करना बखूबी जानते हैं।

उम्र और बीमारी के सवालों पर एक्शन से जवाब
विपक्ष अक्सर तंज कसता है कि करीब 74 साल के नीतीश कुमार (Nitish Kumar Political Resilience) अब बूढ़े और बीमार हो गए हैं। पिछले दो-तीन सालों में उनकी सेहत को लेकर कई बार सुर्खियां बनीं और (Public Perception of Aging Leaders) को प्रभावित करने की कोशिश की गई। लेकिन नीतीश कुमार ने इन सवालों का जवाब कभी बयानों से नहीं, बल्कि अपने काम की रफ्तार से दिया है। वे लगातार सक्रिय हैं और उनकी कार्यशैली यह दर्शाती है कि उम्र उनके लिए महज एक संख्या है। वे रोज नई योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं और प्रशासन पर उनकी पकड़ पहले की तरह ही मजबूत बनी हुई है।
चुनाव में जब हेलीकॉप्टर छोड़ सड़क पर उतरे नीतीश
बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान जब विपक्षी दल चुनाव आयोग से उलझने में व्यस्त थे, तब नीतीश कुमार बिना अपना ध्यान भटकाए सीधे जनता के बीच जा रहे थे। जब (Election Campaign Mobilization) का दौर आया और बड़े-बड़े नेता खराब मौसम का बहाना बनाकर वर्चुअल रैलियां कर रहे थे, तब नीतीश कुमार ने हेलीकॉप्टर का मोह छोड़कर सड़क मार्ग से सभाएं कीं। उन्होंने न केवल रैलियां कीं, बल्कि जमीन पर जाकर फीडबैक लिया और उसी आधार पर कैबिनेट में बड़े फैसले भी लिए, जिसने अंततः उन्हें 202 सीटों की ऐतिहासिक जीत दिलाई।
प्रचंड बहुमत के बाद भी आराम से कोसों दूर
243 में से 202 सीटें जीतकर 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अक्सर नेता विजय उत्सव मनाते हैं या आराम करते हैं। खासकर तब, जब प्रतिद्वंद्वी तेजस्वी यादव (Post Election Political Scenario) के बीच अपनी पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद विदेश दौरे पर निकल गए हों। लेकिन नीतीश कुमार इस कड़ाके की ठंड में भी सप्ताह में तीन-चार दिन निरीक्षण के लिए निकल रहे हैं। वे राजगीर पुलिस अकादमी से लेकर पटना की गलियों तक हर जगह खुद मौजूद रहकर यह संदेश दे रहे हैं कि उनके शब्दकोश में ‘विश्राम’ नाम का कोई शब्द नहीं है।
मौसम की चेतावनी और ‘समृद्धि यात्रा’ का आगाज
बिहार में इन दिनों शीतलहर का प्रकोप है और मौसम विभाग ने बारिश के साथ-साथ कनकनी की चेतावनी जारी की है। प्रशासन बुजुर्गों को घरों में रहने की सलाह दे रहा है, लेकिन नीतीश कुमार अपनी (Samridhi Yatra Schedule 2026) का एलान कर चुके हैं। 16 जनवरी से वे नेपाल सीमा के पास पश्चिम चंपारण से अपनी यात्रा शुरू करेंगे। इस यात्रा के दौरान वे कड़ाके की ठंड की परवाह किए बिना पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, गोपालगंज, सीवान और सारण जैसे जिलों का दौरा करेंगे, जो उनके अदम्य साहस को दर्शाता है।
सात निश्चय योजना की समीक्षा और जन-संवाद
नीतीश कुमार की इस नई यात्रा का मुख्य उद्देश्य पिछले साल शुरू की गई ‘प्रगति यात्रा’ की योजनाओं और उनके ड्रीम प्रोजेक्ट ‘सात निश्चय’ की जमीनी हकीकत परखना है। वे (Government Scheme Monitoring System) को मजबूत करने के लिए खुद फाइलों के बजाय धरातल पर जाकर काम देखना पसंद करते हैं। इस यात्रा के दौरान वे कई नई योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे। साथ ही, वे जनता के साथ सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं को सुनेंगे, जो उनकी राजनीति का हमेशा से एक मजबूत स्तंभ रहा है।
मीडिया से दूरी और ‘म्यूट’ वीडियो का रहस्य
नीतीश कुमार और मीडिया के बीच का रिश्ता हमेशा से चर्चा का विषय रहा है। वे 2023 के बाद से मीडिया के सामने बहुत कम आते हैं और अक्सर उनके (Official Communication Strategies) के तहत जारी होने वाले वीडियो की आवाज बंद रखी जाती है। जानकारों का कहना है कि यह उनकी सोची-समझी रणनीति है ताकि विवादों से बचा जा सके और केवल काम पर फोकस रहे। हालांकि मीडियाकर्मियों को उन तक पहुंचने में मुश्किल होती है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि जनता उनकी इस ‘मौन कार्यशैली’ को पसंद करती है क्योंकि वे एक्शन में नजर आते हैं।
इतिहास गवाह है: ठंड हमेशा नीतीश की साथी रही
यह पहली बार नहीं है जब नीतीश कुमार ने कड़ाके की सर्दी में यात्रा शुरू की है। अगर हम उनके (Historical Political Marathons in Bihar) पर नजर डालें, तो उन्होंने 2024 में प्रगति यात्रा 23 दिसंबर को, और 2023 में समाधान यात्रा 4 जनवरी को शुरू की थी। इससे पहले भी 2017, 2019 और 2021 की यात्राएं दिसंबर और जनवरी के भीषण महीनों में ही हुई थीं। यह उनकी कार्यक्षमता का प्रमाण है कि जब पूरा राज्य ठंड से सिहर रहा होता है, तब बिहार का मुख्यमंत्री सड़कों पर उतरकर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहा होता है।
विपक्ष के युवा नेताओं को ‘सियासी मात’
चाणक्य इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिकल राइट्स एंड रिसर्च का मानना है कि नीतीश कुमार आज भी विपक्ष के कई युवा नेताओं की तुलना में ज्यादा सक्रिय और ऊर्जावान हैं। (Leadership Endurance in Indian Politics) का यह बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे एक अनुभवी नेता अपनी उम्र और सेहत की अफवाहों को दरकिनार कर लगातार जीत दर्ज कर रहा है। उनकी सक्रियता ने न केवल विरोधियों के मुंह बंद कर दिए हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि बिहार की सत्ता का केंद्र फिलहाल वही बने रहेंगे।



