Nitish Kumar Kalyan Bigha Visit 2026: यादों की गलियों में भावुक हुए नीतीश कुमार, बिहार की खुशहाली का लिया संकल्प
Nitish Kumar Kalyan Bigha Visit 2026: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए साल 2026 के पहले दिन की सुबह बेहद भावनात्मक रही, जब वे अपनी माता स्वर्गीया परमेश्वरी देवी की पुण्यतिथि के अवसर पर अपने पैतृक गांव कल्याण बिगहा पहुंचे। मुख्यमंत्री का अपनी जड़ों से यह लगाव (Ancestral Village) के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा को दर्शाता है। सड़क मार्ग से गांव पहुँचते ही उन्होंने सबसे पहले स्थानीय देवी मंदिर में मत्था टेका और प्रदेश की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की। यह दौरा न केवल एक राजनीतिक हस्ती का अपने घर वापसी का क्षण था, बल्कि एक पुत्र का अपनी माता के प्रति सम्मान प्रकट करने का भी जरिया बना।

स्मृति वाटिका में दी अपनों को श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री ने गांव में स्थित कविराज राम लखन सिंह वाटिका का रुख किया, जो उनके परिवार की यादों को संजोए हुए है। वहां उन्होंने अपनी माता परमेश्वरी देवी, पिता और अपनी धर्मपत्नी की आदमकद प्रतिमाओं पर (Floral Tribute) अर्पित कर उन्हें नमन किया। प्रतिमाओं के सामने खड़े मुख्यमंत्री के चेहरे पर अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान और यादों की झलक साफ देखी जा सकती थी। इस मौके पर उनके साथ मंत्रिमंडल के सहयोगी और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे, जिन्होंने बारी-बारी से पुष्प अर्पित कर दिवंगत आत्माओं को याद किया।
नए साल के संकल्पों के साथ बिहार की नई यात्रा
श्रद्धांजलि अर्पित करने के पश्चात मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह और प्रदेशवासियों को नव वर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास जताया कि (New Year Resolve) के साथ बिहार विकास की एक नई और तेज यात्रा पर निकलने के लिए तैयार है। नीतीश कुमार ने कहा कि आगामी वर्ष में सरकार जन-कल्याण के नए संकल्पों को जमीन पर उतारेगी और बिहार को प्रगति के पथ पर अग्रणी बनाएगी। उन्होंने प्रदेश की जनता से भी इस गौरवशाली विकास यात्रा में सहयात्री बनने का आह्वान किया ताकि सामूहिक प्रयास से राज्य की सूरत बदली जा सके।
फरियादियों की उमड़ी भीड़ और जनता का दर्द
मुख्यमंत्री के आगमन की खबर मिलते ही दूर-दराज से आए फरियादी अपनी समस्याओं की पोटली लेकर कल्याण बिगहा पहुँच गए थे। जैसे ही नीतीश कुमार वाटिका से बाहर निकले, (Public Grievances) को लेकर आए लोगों ने उन्हें घेरने की कोशिश की। हालांकि, शुरुआत में सुरक्षा कारणों से वे आगे बढ़ गए, लेकिन बाद में उन्होंने जनता की पुकार को अनसुना नहीं किया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि जनता के आवेदनों पर केवल कागजी कार्रवाई न हो, बल्कि उनकी समस्याओं का धरातल पर समाधान सुनिश्चित किया जाए।
पुराने आवेदनों पर कार्रवाई न होने से नाराजगी
वाटिका के बाहर मौजूद कुछ फरियादियों में इस बात को लेकर काफी असंतोष दिखा कि उनके आवेदनों पर पिछले दो सालों से कोई ठोस पहल नहीं हुई है। एक पीड़ित ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि (Administrative Response) की सुस्ती के कारण वे बार-बार आवेदन देने के बावजूद थक चुके हैं। इस नाराजगी को भांपते हुए मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद उच्चाधिकारियों को तत्काल उन लंबित मामलों की समीक्षा करने को कहा जो वर्षों से दफ्तरों की धूल फांक रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता की सेवा में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सुरक्षा के कड़े पहरे में रहा कल्याण बिगहा
मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए पूरे गांव और खासकर स्मृति वाटिका के आसपास (Security Protocol) को काफी सख्त रखा गया था। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी और बैरिकेडिंग के जरिए भीड़ को नियंत्रित करने के इंतजाम किए गए थे। सुरक्षा घेरा इतना मजबूत था कि केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही मुख्य परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा और प्रोटोकॉल के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए भारी मशक्कत की, ताकि मुख्यमंत्री का कार्यक्रम निर्बाध रूप से संपन्न हो सके।
होर्डिंग्स और बैनरों से सजा पैतृक गांव
मुख्यमंत्री के स्वागत में केवल सुरक्षा बल ही नहीं, बल्कि गांव के लोगों का उत्साह भी देखते ही बनता था। कल्याण बिगहा और आसपास के क्षेत्रों में बड़े-बड़े (Publicity Banners) और होर्डिंग्स लगाए गए थे, जिनमें मुख्यमंत्री का स्वागत और नव वर्ष की बधाई दी गई थी। करीब 45 मिनट तक गांव में रुकने के दौरान नीतीश कुमार ने अपनों के बीच समय बिताया और स्थानीय स्तर पर चल रही विकास योजनाओं की भी संक्षिप्त जानकारी ली। इसके पश्चात वे काफिले के साथ वापस पटना की ओर रवाना हो गए।
सत्ता और संगठन के दिग्गजों की मौजूदगी
इस भावुक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ मंत्री श्रवण कुमार, सांसद कौशलेंद्र कुमार और क्षेत्र के विधायक सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इन नेताओं ने भी (Memorial Service) में हिस्सा लिया और मुख्यमंत्री के माता-पिता की स्मृतियों को नमन किया। इस यात्रा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि राजनीतिक व्यस्तताओं के बावजूद नीतीश कुमार अपने परिवार और अपनी मिट्टी के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। उनके जाने के बाद भी गांव में विकास की चर्चाएं और उनके द्वारा दिए गए निर्देशों पर अधिकारियों की हलचल काफी देर तक बनी रही।



