बिहार

Navratri – दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में उमड़ी भक्तों की भीड़

Navratri – चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन शुक्रवार को मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा-अर्चना पूरे श्रद्धाभाव के साथ की गई। सुबह होते ही मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें लग गईं और वातावरण भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। इस दिन मां के तपस्विनी रूप की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है, जो साधना, संयम और आस्था का प्रतीक है।

मां ब्रह्मचारिणी के स्वरूप का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी तप और त्याग की प्रतीक मानी जाती हैं। ‘ब्रह्म’ का अर्थ तपस्या और ‘चारिणी’ का अर्थ उसका आचरण करने वाली होता है। यह स्वरूप साधकों को धैर्य, आत्मसंयम और कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य पर टिके रहने का संदेश देता है। मान्यता है कि मां की सच्चे मन से पूजा करने पर भक्तों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।

मंदिरों में सुबह से उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसिद्ध राजराजेश्वरी देवी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। भक्त माता के दर्शन के लिए कतारों में खड़े रहे और ‘जय माता दी’ के जयघोष से पूरा परिसर गूंजता रहा। कई श्रद्धालु दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हुए नजर आए, वहीं कुछ लोग परिवार के साथ विशेष पूजा-अर्चना में शामिल हुए।

पूजा-पाठ और अनुष्ठानों का आयोजन

नवरात्रि के इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा, हवन और अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। भक्त स्नान-ध्यान के बाद मां को पुष्प, फल और प्रसाद अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। कई लोग व्रत रखकर दिनभर मां की आराधना में लीन रहते हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, इस दिन की गई पूजा से साधक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

कठोर तपस्या की कथा से जुड़ा है स्वरूप

मंदिर के प्रधान पुजारी आचार्य धर्मेंद्र तिवारी ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उन्होंने वर्षों तक फल और शाकाहार पर जीवन बिताया और अंत में निर्जल व्रत रखकर घोर साधना की। इसी कठोर तप के कारण उन्हें ‘ब्रह्मचारिणी’ नाम प्राप्त हुआ।

भक्ति और आस्था का वातावरण

नवरात्रि के इस पर्व पर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। मंदिरों में भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों के चलते आध्यात्मिक माहौल बना हुआ है। भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मां से प्रार्थना कर रहे हैं और पूरे विश्वास के साथ पूजा में जुटे हैं।

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