बिहार

MuzaffarpurScam – नगर निगम में आउटसोर्सिंग एजेंसी पर वसूली के आरोप

MuzaffarpurScam – बिहार के मुजफ्फरपुर नगर निगम में मानव बल आपूर्ति से जुड़े एक मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि आउटसोर्सिंग एजेंसी ने कर्मचारियों को नौकरी दिलाने के नाम पर अवैध वसूली की और नियमों की अनदेखी करते हुए कई अनियमितताएं कीं। इस पूरे प्रकरण में नगर निगम के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

नौकरी के नाम पर अवैध वसूली का आरोप

जानकारी के अनुसार, मेसर्स गोस्वामी सिक्यूरिटी सर्विसेज नाम की एजेंसी पर आरोप है कि उसने गार्ड और सफाईकर्मी की नियुक्ति के लिए इच्छुक लोगों से मोटी रकम वसूली। यह भी सामने आया है कि एजेंसी ने नियमों को नजरअंदाज करते हुए एक दिव्यांग व्यक्ति को गार्ड के रूप में नियुक्त कर दिया, जबकि उसकी शारीरिक स्थिति इस जिम्मेदारी के अनुरूप नहीं मानी जाती। बताया जा रहा है कि इस नियुक्ति के लिए उससे करीब 65 हजार रुपये लिए गए।

नियमों के खिलाफ काम और कर्मचारियों पर दबाव

एग्रीमेंट के अनुसार, एजेंसी को किसी भी कर्मचारी से नियुक्ति के बदले पैसे लेने की अनुमति नहीं थी। इसके बावजूद कथित तौर पर कर्मचारियों से जबरन वसूली की गई। इतना ही नहीं, शिकायत करने पर उन्हें डराने-धमकाने के आरोप भी सामने आए हैं। कर्मचारियों को वेतन, ईपीएफ और अन्य लाभों की स्पष्ट जानकारी भी नहीं दी गई, जिससे उनकी स्थिति और कमजोर हो गई।

वर्दी के नाम पर भी वसूली का मामला

मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है, जिसमें कर्मचारियों से वर्दी के नाम पर भी अधिक रकम ली गई। जहां एक सामान्य वर्दी की कीमत दो से ढाई हजार रुपये के बीच होती है, वहीं कर्मचारियों से इसके लिए करीब 5600 रुपये तक वसूले गए। इससे एजेंसी की कार्यप्रणाली पर और सवाल उठने लगे हैं।

पुराने मामलों से भी जुड़ रहा है एजेंसी का नाम

यह पहला मामला नहीं है जब इस एजेंसी का नाम विवादों में आया हो। करीब नौ साल पहले भी इसी एजेंसी पर ईपीएफ और ईएसआईसी से जुड़े घोटाले के आरोप लगे थे। उस समय भी कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ी रकम जमा नहीं कराने का मामला सामने आया था। इसके अलावा, वर्षों पहले सारण जिले में भी एजेंसी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिसकी जानकारी छिपाने के आरोप में उसका लाइसेंस रद्द किया जा चुका है।

दो एजेंसियों पर कार्रवाई की संभावना

नगर निगम में चल रही जांच के दौरान वित्तीय गड़बड़ी और अन्य अनियमितताओं के आधार पर दो आउटसोर्सिंग एजेंसियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। वेतन भुगतान में देरी और अन्य शिकायतों को लेकर संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगा गया है। अधिकारियों का कहना है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।

यूनियन और प्रशासन की प्रतिक्रिया

कर्मचारी संगठनों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए आरोप लगाया है कि एजेंसियां कर्मचारियों का शोषण कर रही हैं और उन्हें आवाज उठाने से रोका जा रहा है। नगर आयुक्त ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं और संबंधित एजेंसियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। प्रशासन का कहना है कि दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

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