LandAcquisition – मुआवजा भुगतान में देरी पर समाहरणालय कुर्की का आदेश
LandAcquisition – बिहार के औरंगाबाद जिले में भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक पुराने मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। व्यवहार न्यायालय के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) प्रथम डॉ. दीवान फहद की अदालत ने जिला समाहरणालय की कुर्की का आदेश जारी किया है। यह आदेश मुआवजा राशि के भुगतान में लंबे समय से हो रही देरी और न्यायालय के पूर्व निर्देशों की अनदेखी के बाद दिया गया। अदालत के फैसले के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

15 दिनों में कार्रवाई का निर्देश
अदालत ने स्पष्ट किया कि पहले पारित डिक्री का अनुपालन अब तक नहीं हुआ, जबकि संबंधित विभाग को पर्याप्त अवसर दिया गया था। न्यायालय ने मामले को गंभीर मानते हुए कोर्ट के नाजिर को निर्देश दिया है कि 15 दिनों के भीतर कुर्की की प्रक्रिया पूरी कर इसकी रिपोर्ट पेश की जाए।
इस आदेश ने प्रशासन को तय समयसीमा के भीतर कदम उठाने के लिए बाध्य कर दिया है।
नहर निर्माण से जुड़ा है मामला
जानकारी के अनुसार, यह प्रकरण नहर निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि से संबंधित है। डिक्रीधारी हरे कृष्ण प्रसाद को अदालत के आदेश के बावजूद मुआवजा राशि नहीं दी गई। इस संबंध में जिला विधि शाखा को कई बार समय दिया गया, लेकिन भुगतान की स्पष्ट तिथि नहीं बताई गई।
सरकारी अधिवक्ता बृजा प्रसाद सिंह ने बताया कि अदालत द्वारा शो-कॉज नोटिस जारी किए जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसी के बाद न्यायालय ने कठोर कदम उठाते हुए कुर्की का आदेश पारित किया।
9 मार्च की अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च को तय की गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन निर्धारित अवधि में भुगतान कर अदालत के निर्देशों का पालन करता है या फिर आगे की कानूनी प्रक्रिया तेज होती है।
यदि आदेश का पालन नहीं होता है, तो कुर्की की कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
औरंगाबाद की जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने बताया कि अदालत के आदेश की प्रति मंगाई गई है। विधि शाखा से परामर्श लेने के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि प्रशासन कानूनी दायरे में रहकर आवश्यक कदम उठाएगा।
जवाबदेही का सवाल
यह मामला न्यायिक आदेशों के अनुपालन और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा है। अदालत ने अपने निर्देशों की अनदेखी को गंभीरता से लेते हुए सख्त कदम उठाया है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि निर्धारित समय में मुआवजा अदा नहीं किया गया, तो समाहरणालय की कुर्की एक असाधारण प्रशासनिक घटना साबित हो सकती है। फिलहाल सबकी नजरें 15 दिन की समयसीमा और 9 मार्च की सुनवाई पर टिकी हैं।



