बिहार

ForestAct – दरभंगा में बीडीओ पर पेड़ कटाई का आरोप

ForestAct – दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड में तैनात प्रखंड विकास पदाधिकारी चंद्रमोहन पासवान पर सरकारी परिसर में लगे पेड़ों की कटाई को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि ब्लॉक कार्यालय परिसर से पुराने और मूल्यवान पेड़ों को हटाकर उनकी लकड़ी का निजी उपयोग किया गया। यह मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। शिकायत के आधार पर वन विभाग ने जांच शुरू कर दी है।

शिकायत में क्या कहा गया है

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता इकबाल अंसारी ने जिला अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि प्रखंड परिसर में 50 वर्ष से अधिक पुराने कई पेड़ बिना विधिक प्रक्रिया के काट दिए गए। उनका दावा है कि इन पेड़ों की लकड़ी से निजी उपयोग के लिए फर्नीचर तैयार कराया गया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, कुल 14 से 15 पेड़ों की कटाई की गई और इस संबंध में कोई औपचारिक अनुमति या कागजी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले से जुड़े कुछ साक्ष्य प्रशासन को सौंपे गए हैं।

कानूनी पहलू पर उठे सवाल

सरकारी परिसर में लगे पेड़ों की कटाई भारतीय वन अधिनियम, 1927 और वन संरक्षण अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत नियंत्रित होती है। यदि बिना अनुमति पेड़ काटे गए हों, तो यह दंडनीय माना जाता है।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच की जाएगी और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया गया तो नियमानुसार कार्रवाई होगी।

वन विभाग की प्रतिक्रिया

मिथिला वन प्रमंडल के वन प्रमंडल अधिकारी भास्कर चंद्र भारती ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद जांच के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल तथ्यों की पुष्टि होना बाकी है और जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

बीडीओ ने आरोपों को किया खारिज

प्रखंड विकास पदाधिकारी चंद्रमोहन पासवान ने लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि संबंधित पेड़ आंधी-तूफान के दौरान गिर गया था और परिसर में अव्यवस्था की स्थिति बन गई थी। सुरक्षा कारणों से उसे हटवाया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी प्रकार की निजी उपयोग की बात गलत है और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ही कार्रवाई की गई थी।

स्थानीय स्तर पर बढ़ी चर्चा

मामले के सार्वजनिक होने के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज है। सरकारी संपत्ति और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर स्थानीय लोग जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

अब सभी की नजर वन विभाग की जांच रिपोर्ट पर है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि पेड़ों की कटाई नियमों के अनुरूप थी या नहीं। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।

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