CorruptionCase – बिहार में अधिकारी पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज
CorruptionCase – बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी अभियान के बीच एक बार फिर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। विशेष निगरानी इकाई ने शिवहर में तैनात उप विकास आयुक्त और मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी बृजेश कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। इस कदम के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है।

करोड़ों की संपत्ति जुटाने का आरोप
निगरानी विभाग के अनुसार, बृजेश कुमार पर अपने सरकारी कार्यकाल के दौरान ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। दर्ज प्राथमिकी में बताया गया है कि उन्होंने करीब 1 करोड़ 84 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति इकट्ठा की, जिसका स्पष्ट स्रोत सामने नहीं आया है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की संबंधित धाराओं के तहत की गई है।
सुबह से कई ठिकानों पर छापेमारी
सूत्रों के मुताबिक, निगरानी टीम ने कार्रवाई की शुरुआत सुबह ही कर दी थी। पटना स्थित विशेष न्यायालय से मिले सर्च वारंट के आधार पर एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी की जा रही है। यह कार्रवाई बेतिया, सीतामढ़ी और शिवहर में सरकारी कार्यालयों और आवासीय परिसरों में जारी है। शिवहर स्थित आवास के अलावा समाहरणालय स्थित कार्यालय में भी जांच की जा रही है।
दस्तावेज और निवेश से जुड़े प्रमाण जुटाए गए
छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और निवेश से संबंधित कागजात अपने कब्जे में लिए हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन दस्तावेजों से मामले में और भी अहम जानकारी सामने आ सकती है। टीम इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि संपत्ति किन माध्यमों से और किन-किन नामों पर अर्जित की गई।
जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्ती
निगरानी विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यदि आरोप साबित होते हैं, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
प्रशासनिक व्यवस्था में संदेश
इस कार्रवाई को प्रशासनिक तंत्र के लिए एक स्पष्ट संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर ढील नहीं दी जाएगी। सरकार की प्राथमिकता पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, जिसके तहत ऐसे मामलों में त्वरित और ठोस कार्रवाई की जा रही है।



