Cold Wave and Fog Alert Bihar: बिहार में प्रकृति का कहर! 27 साल का रिकॉर्ड टूटा, हाड़ कंपाने वाली ठंड ने बढ़ाई मुश्किलें
Cold Wave and Fog Alert Bihar: बिहार के लोग इस समय प्रकृति के प्रचंड रूप का सामना कर रहे हैं, जहां बर्फीली पछुआ हवाओं ने जनजीवन की रफ्तार थाम दी है। समस्तीपुर जिले में ठंड ने पिछले (Historical Temperature) के 27 साल पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया है। जिले का न्यूनतम तापमान गिरकर 3.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से करीब 6 डिग्री कम है। समस्तीपुर के साथ-साथ पूरा प्रदेश भीषण शीतलहर की चपेट में है, जिससे लोगों का घरों से निकलना दूभर हो गया है।

कोहरे का ‘ब्लैकआउट’ और विजिबिलिटी का संकट
राजधानी पटना समेत बिहार के 10 प्रमुख जिलों में घने कोहरे ने यातायात व्यवस्था को ठप कर दिया है। जहानाबाद, बेगूसराय और भागलपुर जैसे इलाकों में विजिबिलिटी (Low Visibility) घटकर 10 मीटर से भी कम रह गई है। इस घने कोहरे के कारण सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आ रहे हैं और रेल व हवाई सेवाओं पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। प्रशासन ने लोगों को बेहद सावधानी से वाहन चलाने की सलाह दी है।
मौसम विभाग का ऑरेंज अलर्ट और सावधानियां
मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के सभी 38 जिलों में कोहरा और ‘कोल्ड-डे’ को लेकर (Orange Alert) जारी किया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 5 जनवरी तक ठंड से कोई बड़ी राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। तापमान में और भी 2 से 3 डिग्री की गिरावट दर्ज की जा सकती है। शीतलहर की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने और गर्म कपड़ों का समुचित उपयोग करने के निर्देश दिए हैं।
शीतलहर के साये में जनवरी का पूर्वानुमान
मौसम विभाग द्वारा जारी पूरे जनवरी माह के पूर्वानुमान के अनुसार, पश्चिमी चंपारण, गया, औरंगाबाद और नवादा जैसे जिलों में (Weather Patterns) अत्यंत कठोर रहने वाले हैं। इन इलाकों में लगातार शीतलहर की स्थिति बनी रहेगी। हालांकि कुछ जिलों में अधिकतम तापमान सामान्य से थोड़ा अधिक रह सकता है, लेकिन न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे रात और सुबह की ठंड और अधिक जानलेवा हो सकती है।
आपदा प्रबंधन और रैनबसों की स्थिति
बढ़ती ठंड को देखते हुए राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन विभाग को सक्रिय कर दिया है। शहर के प्रमुख चौराहों पर (Public Welfare) के लिए अलाव की व्यवस्था की जा रही है और रैनबसों में क्षमता बढ़ाई गई है। प्रशासन का प्रयास है कि कोई भी बेसहारा इस कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे न सोए। पछुआ हवाओं की गति अगर ऐसी ही बनी रही, तो आने वाले दिन बिहार के लिए और भी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।



