बिहार

BuddhistConference – बोधगया में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, दलाई लामा के संदेश पर जोर

BuddhistConference – एक तरफ दुनिया के कई हिस्सों में तनाव और टकराव की स्थिति बनी हुई है, वहीं बिहार के बोधगया से शांति और सह-अस्तित्व का संदेश देने की पहल की गई। 14वें दलाई लामा के 90वें जन्मदिवस के अवसर पर यहां एक अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस आयोजन का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर शांति, करुणा और आपसी समझ को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम के दौरान बौद्ध विचारधारा की प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा हुई।

सम्मेलन का उद्घाटन और मुख्य संदेश

इस कार्यक्रम का उद्घाटन लद्दाख के राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब विश्व कई प्रकार के संघर्षों से जूझ रहा है, तब भगवान बुद्ध की शिक्षाएं और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंसा और टकराव से किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलता, बल्कि संवाद और सहिष्णुता ही आगे का रास्ता दिखाते हैं। सम्मेलन का मुख्य विषय ‘बोधिसत्व ज्ञान और करुणा’ रखा गया था, जो मानवता के मूल्यों को मजबूत करने पर केंद्रित रहा।

विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत सहित कुल नौ देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें मंगोलिया, रूस, लाओस और वियतनाम जैसे देश शामिल रहे। सभी वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आज का समय वैश्विक अस्थिरता का दौर है, जहां शांति की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। ऐसे में बुद्ध के सिद्धांत मानव समाज को संतुलन और दिशा प्रदान कर सकते हैं। अलग-अलग सत्रों में शांति, नैतिकता, सह-अस्तित्व और करुणा जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई।

दलाई लामा के जीवन और विचारों को किया गया याद

सम्मेलन के दौरान 14वें दलाई लामा का 90वां जन्मदिवस भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। वक्ताओं ने उनके जीवन और शिक्षाओं को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा अहिंसा, प्रेम और करुणा का मार्ग दिखाया है। उनके विचार न केवल बौद्ध अनुयायियों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए मार्गदर्शक हैं। इस अवसर पर यह भी रेखांकित किया गया कि दलाई लामा का संदेश आज के समय में और अधिक प्रासंगिक हो गया है।

बुद्ध के विचारों की वैश्विक प्रासंगिकता

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश किसी सीमित दायरे तक बंधा हुआ नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए है। उन्होंने कहा कि अगर विश्व के देश इन मूल्यों को अपनाएं, तो कई मौजूदा संघर्षों को कम किया जा सकता है। बोधगया, जो भगवान बुद्ध की ज्ञान प्राप्ति की भूमि है, एक बार फिर से शांति और संवाद का केंद्र बनकर सामने आया है।

सम्मेलन से मिला सकारात्मक संदेश

इस आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भी शांति और करुणा की जरूरत कम नहीं हुई है। बल्कि, आज के दौर में इन मूल्यों की अहमियत और बढ़ गई है। विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों ने यह संदेश दिया कि आपसी समझ, सहयोग और नैतिक मूल्यों के आधार पर ही एक बेहतर और शांतिपूर्ण विश्व का निर्माण संभव है।

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