BiharIftarTime – जानिए आज किन शहरों में कब होगा रोजा इफ्तार…
BiharIftarTime – रमजान का पाक महीना जारी है और रोजेदार पूरे समर्पण के साथ इबादत में जुटे हैं। इस साल रमजान की शुरुआत 19 फरवरी से हुई थी। मौलानाओं के मुताबिक शुरुआती रोजा करीब 13 घंटे 34 मिनट का रहा। मौसम में हल्की ठंडक रहने से लोगों को रोजा रखने में अपेक्षाकृत सहूलियत मिली। जैसे-जैसे महीने का आखिरी दौर नजदीक आएगा, रोजे की अवधि में भी थोड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

बताया जा रहा है कि इस बार सबसे छोटा रोजा करीब 12 घंटे 46 मिनट का होगा। 29वें रोजे के दिन सहरी का समय सुबह 5:02 बजे और इफ्तार शाम 6:31 बजे निर्धारित है। गौरतलब है कि वर्ष 2016 में रोजे की अवधि 15 घंटे 45 मिनट तक पहुंच गई थी, जो हाल के वर्षों में सबसे लंबी मानी जाती है।
रमजान का आध्यात्मिक महत्व
माह-ए-रमजान को सब्र, रहमत और बरकत का महीना कहा जाता है। मान्यता है कि इस दौरान की गई इबादत का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। रोजा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि आत्मसंयम और आत्ममंथन का अभ्यास भी है।
सूर्यास्त के समय जब रोजेदार अपना उपवास खोलते हैं, तो उसे इफ्तार कहा जाता है। यह केवल भोजन करने का समय नहीं, बल्कि दुआ और शुक्र अदा करने का भी खास पल होता है।
पटना और आसपास के जिलों में इफ्तार समय
राजधानी पटना में सुन्नी समुदाय के लिए आज इफ्तार का समय शाम 5:53 बजे है, जबकि शिया समुदाय के लिए यह 6:03 बजे निर्धारित है।
मुजफ्फरपुर में सुन्नी रोजेदार 5:54 बजे और शिया समुदाय 6:04 बजे इफ्तार करेंगे। भागलपुर में सुन्नी के लिए 5:46 बजे और शिया के लिए 5:59 बजे का समय तय है। गया में इफ्तार 5:56 बजे होगा।
अन्य प्रमुख जिलों का समय
आरा में रोजा 5:54 बजे खोला जाएगा। बेगूसराय में 5:48 बजे, जहानाबाद में 5:51 बजे और औरंगाबाद में 5:55 बजे इफ्तार का समय है। वैशाली जिले में यह 5:44 बजे, जबकि बक्सर में 5:57 बजे निर्धारित है।
सासाराम में 5:55 बजे और सीवान में 5:57 बजे रोजा खोला जाएगा। गोपालगंज में 5:59 बजे तथा मोतिहारी में 5:51 बजे इफ्तार का समय है।
उत्तर बिहार के जिलों की जानकारी
पश्चिम चंपारण में सुन्नी समुदाय के लिए 5:53 बजे और शिया समुदाय के लिए 6:04 बजे इफ्तार होगा। बिहारशरीफ में 5:56 बजे, समस्तीपुर में 5:53 बजे समय तय है। दरभंगा में सुन्नी के लिए 5:59 बजे और शिया के लिए 5:49 बजे इफ्तार होगा। मधुबनी में रोजेदार 5:59 बजे रोजा खोलेंगे।
रोजेदारों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय मस्जिद या विश्वसनीय कैलेंडर से समय की पुष्टि कर लें, क्योंकि सूर्यास्त का समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।
रमजान का यह पवित्र महीना आपसी भाईचारे और संयम का संदेश देता है। प्रशासन और समुदाय के स्तर पर भी शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की जा रही है।



