बिहार

Bihar Highway E-Rickshaw Ban: अब हाईवे पर नहीं दौड़ेंगे ई-रिक्शा, बिहार सरकार के इस कड़े फैसले से मचेगा हड़कंप

Bihar Highway E-Rickshaw Ban: बिहार की सड़कों पर अब एक बड़ा बदलाव दिखने वाला है क्योंकि सरकार ने नेशनल और स्टेट हाईवे पर ई-रिक्शा के पहियों को रोकने का फैसला कर लिया है। परिवहन विभाग का मानना है कि सड़कों पर बढ़ती दुर्घटनाओं को रोकने के लिए यह (road safety measures) अपनाना बेहद जरूरी हो गया था। इस फैसले के बाद से ही राज्य के परिवहन गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोग इस बदलाव के नफा-नुकसान का आकलन करने में जुट गए हैं।

Bihar Highway E-Rickshaw Ban
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दस हजार किलोमीटर के दायरे में अब ई-रिक्शा पर पूर्ण पाबंदी

सरकार का यह आदेश कोई छोटा-मोटा बदलाव नहीं है बल्कि यह राज्य की लगभग 10,000 किलोमीटर लंबी सड़कों को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाला है। इसमें 6,389 किमी लंबे नेशनल हाईवे और 3,617 किमी के स्टेट हाईवे शामिल हैं जहां अब (traffic regulations) के तहत ई-रिक्शा का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। पटना के व्यस्ततम इलाकों जैसे न्यू बाइपास और पटना-गया रोड पर भी अब इन वाहनों की मौजूदगी नहीं दिखेगी।

परिवहन मंत्री ने बताया आखिर क्यों लिया गया यह सख्त कदम

परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने स्पष्ट किया है कि हाईवे मुख्य रूप से तेज गति वाले वाहनों के सुचारू संचालन के लिए बनाए जाते हैं। ई-रिक्शा की धीमी गति और कमजोर ब्रेकिंग सिस्टम अक्सर (high-speed traffic) के प्रवाह में बाधा डालते हैं जिससे पीछे से आने वाले वाहनों के टकराने का खतरा बना रहता है। सुरक्षा के लिहाज से यह कदम उठाना अनिवार्य था ताकि निर्दोष लोगों की जान को जोखिम में पड़ने से बचाया जा सके।

जुगाड़ गाड़ियों के खिलाफ भी सरकार ने कस दिया है शिकंजा

केवल ई-रिक्शा ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की लाइफलाइन माने जाने वाले जुगाड़ वाहनों पर भी अब पूरी तरह से ताला लगने वाला है। मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन कर बनाई गई ये (unregistered vehicles) बिना किसी बीमा या फिटनेस सर्टिफिकेट के सड़कों पर दौड़ रही थीं। सरकार ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा मानकों के साथ किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे वाहनों को तुरंत सड़क से हटाया जाएगा।

चालकों की रोजी-रोटी और रोजगार पर मंडराने लगा है खतरा

सरकार के इस फैसले का दूसरा पहलू काफी दर्दनाक है क्योंकि इससे राज्य के लगभग 3 लाख ई-रिक्शा चालकों का भविष्य अधर में लटक गया है। ड्राइवर एसोसिएशन का तर्क है कि इस फैसले से हजारों परिवारों की (livelihood impact) पर बुरा असर पड़ेगा। अकेले पटना में ही हजारों चालक इन्हीं रूटों के सहारे अपने घर का चूल्हा जलाते हैं और उनके पास अब आय का कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।

आम जनता की जेब पर पड़ेगा अब भारी किराए का बोझ

ई-रिक्शा न केवल पर्यावरण के अनुकूल थे बल्कि आम यात्रियों के लिए सबसे सस्ता साधन भी माने जाते थे। अब जब ये हाईवे से हट जाएंगे तो पटना जंक्शन या बस स्टैंड जाने वाले लोगों को (public transportation cost) में भारी बढ़ोतरी का सामना करना पड़ेगा। ऑटो रिक्शा का अधिक किराया चुकाना अब आम आदमी की मजबूरी बन जाएगा जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों के बजट पर सीधा असर पड़ने वाला है।

कानून तोड़ने वालों के लिए तैयार है भारी जुर्माने का प्लान

सरकार ने केवल आदेश जारी नहीं किया है बल्कि इसके सख्त क्रियान्वयन के लिए पुलिस प्रशासन को भी अलर्ट कर दिया है। हाईवे पर सघन जांच अभियान चलाने की योजना है जिसमें नियमों की (law enforcement) को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि कोई चालक प्रतिबंध के बावजूद हाईवे पर वाहन चलाता पाया गया तो उसका वाहन जब्त करने के साथ-साथ उस पर मोटा जुर्माना भी लगाया जाएगा।

विरोध की सुगबुगाहट और आगे की राह पर बड़ा सवाल

इस फैसले के खिलाफ ई-रिक्शा चालकों के एक वर्ग में भारी नाराजगी देखी जा रही है और वे सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। एसोसिएशन का कहना है कि सरकार को (alternative route planning) पर विचार करना चाहिए था ताकि ड्राइवरों का रोजगार भी बचा रहता और सुरक्षा भी बनी रहती। अब देखना यह होगा कि सरकार अपने फैसले पर अडिग रहती है या चालकों की मांगों पर विचार करती है।

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