Bhagalpur Youth Suicide: मां ने पैसे देने से किया इनकार तो उजड़ गई हंसती-खेलती दुनिया, भारी पड़ गई इकलौते बेटे की खौफनाक जिद
Bhagalpur Youth Suicide: बिहार के भागलपुर जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने मां-बेटे के पवित्र रिश्ते और वर्तमान पीढ़ी की मानसिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बबरगंज थाना क्षेत्र के वारसलीगंज में एक 19 वर्षीय युवक ने महज इसलिए अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली क्योंकि उसकी मां ने उसे पैसे देने से मना कर दिया था। इस (Emotional Distress) वाली घटना ने पूरे मोहल्ले को सन्न कर दिया है। किसी ने सोचा भी नहीं था कि मामूली सी डांट एक हंसते-खेलते घर के इकलौते चिराग को बुझा देगी।

मफलर का फंदा और इकलौते वारिस की विदाई
सोमवार की शाम वारसलीगंज इलाके के एक घर में चीख-पुकार मच गई जब 19 साल के आदित्य का शव पंखे से लटका मिला। आदित्य ने आत्मघाती कदम उठाते हुए अपने ही मफलर को मौत का फंदा बनाया और (Youth Mental Health) की अनदेखी करते हुए दुनिया को अलविदा कह दिया। जब उसे फंदे से उतारकर आनन-फानन में सदर अस्पताल ले जाया गया, तो वहां मौजूद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान था, जिसकी मौत ने मां की गोद सूनी और पिता का कंधा कमजोर कर दिया है।
नशे की लत और गलत संगति ने बिगाड़ा खेल
आदित्य की मां ने रोते हुए बताया कि उनका बेटा पिछले कुछ समय से गलत दोस्तों की सोहबत में पड़ गया था। उसे नशे की लत लग चुकी थी, जिसकी वजह से वह घर में अक्सर (Substance Abuse Impact) के कारण चिड़चिड़ा रहता था और आए दिन पैसों की मांग करता था। सोमवार को भी उसने अपनी मां से पैसों की फरमाइश की थी, लेकिन बेटे के भविष्य की चिंता करते हुए मां ने उसे पैसे देने से इनकार कर दिया और थोड़ी सख्ती से डांट लगा दी।
कमरे की कुंडी और खौफनाक सन्नाटा
मां की डांट से नाराज होकर आदित्य पैर पटकता हुआ अपने कमरे में चला गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। मां को लगा कि शायद वह (Adolescent Behavior) के तहत नाराजगी जाहिर कर रहा है और थोड़ी देर में शांत होकर बाहर आ जाएगा। उन्होंने सोचा कि वह कमरे में सो रहा होगा, इसलिए उन्होंने उसे डिस्टर्ब नहीं किया। लेकिन जब कई घंटों तक कमरे के अंदर से कोई हलचल नहीं हुई, तो मां का कलेजा किसी अनहोनी की आशंका से कांप उठा।
दरवाजा टूटा और सामने था रूह कंपा देने वाला मंजर
काफी देर तक दरवाजा खटखटाने और आवाजें देने के बाद भी जब आदित्य ने कोई जवाब नहीं दिया, तो मां ने शोर मचाकर पड़ोसियों को इकट्ठा किया। स्थानीय लोगों की मदद से जब कमरे का दरवाजा तोड़ा गया, तो अंदर का दृश्य देख सबकी (Traumatic Experience) की सीमा पार हो गई। आदित्य पंखे के सहारे मफलर के फंदे से झूल रहा था। अफरा-तफरी में उसे नीचे उतारा गया और अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और आदित्य की सांसें थम चुकी थीं।
काम पर थे पिता और घर में पसरा मातम
जिस वक्त यह पूरी वारदात हुई, आदित्य के पिता रॉबिन राजवंशी अपने काम पर गए हुए थे। वह बरारी क्षेत्र में अपनी बाइक सर्विसिंग की दुकान चलाते हैं और परिवार के (Financial Stability) के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। बेटे की मौत की खबर जब उन तक पहुंची, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। मैट्रिक के बाद पढ़ाई छोड़ चुके आदित्य से उन्हें काफी उम्मीदें थीं, लेकिन नशे और आवेश ने एक पल में सब कुछ खाक कर दिया।
पुलिसिया कार्रवाई और परिजनों के बयान का इंतजार
बबरगंज थाने की पुलिस को इस मामले की प्रारंभिक सूचना अस्पताल के जरिए मिली। थानेदार ने मीडिया को बताया कि अभी तक परिजनों की ओर से कोई आधिकारिक लिखित शिकायत या (Police Complaint Procedure) को अंजाम नहीं दिया गया है। पुलिस का कहना है कि वे परिजनों के बयान का इंतजार कर रहे हैं, जिसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या आदित्य किसी मानसिक तनाव में था या केवल नशे की तलब ने उसे इस अंजाम तक पहुंचाया।
युवाओं में बढ़ता आक्रोश और अभिभावकों की चिंता
यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि कैसे संवाद की कमी और नशे की गिरफ्त युवाओं को मौत के करीब ले जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि (Parenting Challenges) के इस दौर में बच्चों के व्यवहार पर बारीक नजर रखना बहुत जरूरी है। भागलपुर की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि क्षणिक आवेश में लिया गया फैसला न केवल एक जीवन को समाप्त करता है, बल्कि पीछे रह गए परिवार को कभी न भरने वाले जख्म दे जाता है।



