मनोरंजन

JanaNayakan – सेंसर सर्टिफिकेट विवाद पर पवन कल्याण ने दी प्रतिक्रिया

JanaNayakan – थलापति विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ इन दिनों अपने सेंसर सर्टिफिकेट को लेकर चर्चा में बनी हुई है। फिल्म की रिलीज में देरी के बीच अभिनेता और आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सर्टिफिकेट मिलने में हुई देरी को सीधे सरकार से जोड़ना उचित नहीं है। उनके अनुसार, यह मुद्दा सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया से जुड़ा है और इसे राजनीतिक रंग देना सही नहीं माना जाना चाहिए।

सेंसर प्रक्रिया को लेकर पवन कल्याण का पक्ष

एक इंटरव्यू के दौरान पवन कल्याण ने कहा कि ‘जन नायकन’ से जुड़ा विवाद मुख्य रूप से सेंसर बोर्ड के स्तर पर सही तरीके से नहीं संभाला गया। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस स्थिति के लिए एनडीए सरकार को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि फिल्म प्रमाणन की प्रक्रिया एक तय व्यवस्था के तहत चलती है और उसमें कई चरण होते हैं। कभी-कभी तकनीकी या प्रक्रियात्मक कारणों से देरी हो सकती है, लेकिन उसे सीधे राजनीतिक मुद्दा बना देना स्थिति को और जटिल कर देता है।

पवन कल्याण के मुताबिक, फिल्म उद्योग और सरकार के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उनका मानना है कि ऐसे मामलों में तथ्यों को समझे बिना आरोप लगाना सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सेंसर बोर्ड एक स्वतंत्र संस्था की तरह काम करता है और उसके निर्णय कई पहलुओं को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।

सेंसर बोर्ड के नियमों का दिया उदाहरण

पवन कल्याण ने अपनी आने वाली फिल्म ‘ओजी’ का उदाहरण देते हुए समझाया कि सेंसर बोर्ड अपने निर्धारित नियमों के आधार पर फैसला करता है। उन्होंने बताया कि उनकी फिल्म में हिंसा के कई दृश्य होने के कारण बोर्ड ने उसे ‘A’ सर्टिफिकेट दिया।

उनके अनुसार, फिल्म के निर्माताओं को उम्मीद थी कि इसे U/A सर्टिफिकेट मिल सकता है, लेकिन बोर्ड ने अपने दिशानिर्देशों के अनुसार अलग फैसला लिया। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रमाणन प्रक्रिया में सभी फिल्मों के लिए एक ही तरह के नियम लागू होते हैं।

उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों के लिए अलग नियम नहीं बनाए जा सकते। फिल्म का मूल्यांकन उसी मानक के आधार पर किया जाता है जो बाकी फिल्मों के लिए लागू होते हैं। इसी वजह से कई बार फिल्म निर्माताओं की अपेक्षाओं और बोर्ड के निर्णय में अंतर दिखाई देता है।

अदालत जाने के फैसले पर भी जताई राय

पवन कल्याण ने ‘जन नायकन’ के निर्माताओं द्वारा अदालत का दरवाजा खटखटाने के फैसले पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अगर मामला अदालत तक नहीं पहुंचता, तो संभव है कि इसे अलग तरीके से सुलझाया जा सकता था।

उनके मुताबिक, जब कोई विवाद न्यायालय में चला जाता है, तब उसकी प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी ढांचे के भीतर चलती है। ऐसे में फैसले में समय लगना स्वाभाविक होता है क्योंकि अदालत सभी पहलुओं की समीक्षा करती है।

उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म उद्योग में कई बार ऐसे विवाद सामने आते हैं, लेकिन संवाद और प्रक्रिया के जरिए उन्हें हल किया जा सकता है। उनका मानना है कि फिल्म निर्माताओं और संस्थाओं के बीच संतुलित बातचीत कई मामलों में समाधान का रास्ता निकाल सकती है।

फिल्म की रिलीज में हुई देरी

फिल्म ‘जन नायकन’ को पहले 9 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना थी। हालांकि सेंसर सर्टिफिकेट से जुड़ी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण इसकी रिलीज को फिलहाल टालना पड़ा है।

इस फिल्म का निर्देशन एच विनोद ने किया है और इसमें थलापति विजय मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। उनके साथ फिल्म में ममिता बैजू, पूजा हेगड़े और बॉबी देओल भी अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच पहले से ही काफी उत्सुकता बनी हुई है।

अब फिल्म की नई रिलीज तारीख को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। सेंसर प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसकी रिलीज को लेकर अगला फैसला लिया जाएगा।

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.