SugarMarket – ब्राजील की अधिक आपूर्ति से वैश्विक कीमतों में गिरावट, भारत स्थिर
SugarMarket – वैश्विक बाजार में चीनी की कीमतों में हाल के महीनों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। इसकी मुख्य वजह ब्राजील से बढ़ी आपूर्ति को माना जा रहा है, जिसने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव बना दिया है। हालांकि भारत के चीनी उद्योग की स्थिति फिलहाल संतुलित और स्थिर बनी हुई है। रेटिंग एजेंसी आईसीआरए लिमिटेड की ताजा रिपोर्ट में यह आकलन सामने आया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में आई गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार शुगर सीजन 2026 में वैश्विक बाजार में चीनी की कीमतें उत्पादन लागत और भारत के घरेलू स्तर पर प्रचलित कीमतों से नीचे बनी हुई हैं। इसका प्रमुख कारण ब्राजील से बड़े पैमाने पर हो रही आपूर्ति है, जिसने वैश्विक बाजार में अधिशेष की स्थिति पैदा कर दी है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक फरवरी 2026 में कच्ची चीनी की कीमत घटकर लगभग 313 डॉलर प्रति मीट्रिक टन रह गई, जबकि फरवरी 2025 में यह करीब 445 डॉलर प्रति मीट्रिक टन थी। इसी तरह सफेद चीनी की कीमत भी पिछले वर्ष के 532 डॉलर प्रति मीट्रिक टन से घटकर फरवरी 2026 में करीब 408 डॉलर प्रति मीट्रिक टन दर्ज की गई।
कच्ची और सफेद चीनी के बीच प्रीमियम भी बढ़ा है। फरवरी 2026 में यह लगभग 95 डॉलर प्रति मीट्रिक टन रहा, जबकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह करीब 87 डॉलर प्रति मीट्रिक टन था।
उत्पादन और खपत के बीच बढ़ा अंतर
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वैश्विक स्तर पर चीनी उत्पादन में वृद्धि होने की संभावना है। अनुमान के अनुसार शुगर सीजन 2025-2026 में विश्व स्तर पर उत्पादन लगभग 189.3 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच सकता है। यह पिछले वर्ष की तुलना में करीब पांच प्रतिशत अधिक होगा।
इसके मुकाबले वैश्विक खपत लगभग 178.1 मिलियन मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल की तुलना में करीब एक प्रतिशत अधिक है। उत्पादन और खपत के बीच यह अंतर बढ़ने से बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति की स्थिति बनी हुई है, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
भारत में मांग और आपूर्ति की स्थिति संतुलित
अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में चीनी बाजार फिलहाल अपेक्षाकृत स्थिर माना जा रहा है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार शुगर सीजन 2026 में देश का कुल उत्पादन लगभग 32.41 मिलियन मीट्रिक टन रहने का अनुमान है।
यह आंकड़ा पिछले वर्ष के लगभग 29.6 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन से करीब 9.4 प्रतिशत अधिक है। हालांकि इसमें से लगभग 3.1 मिलियन मीट्रिक टन चीनी एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल किए जाने का अनुमान है।
इस तरह देश में शुद्ध चीनी उत्पादन करीब 29.3 मिलियन मीट्रिक टन रहने की संभावना जताई गई है। यदि घरेलू खपत करीब 28.3 मिलियन मीट्रिक टन और निर्यात लगभग 0.7 मिलियन मीट्रिक टन रहता है, तो सीजन के अंत में करीब 5.6 मिलियन मीट्रिक टन का स्टॉक बच सकता है। यह मात्रा देश की लगभग दो महीने की खपत के बराबर होगी।
चीनी मिलों की आय और मुनाफे का अनुमान
आईसीआरए की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में एकीकृत चीनी मिलों के परिचालन मार्जिन लगभग 10 से 10.5 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान है। पिछले वर्ष यह लगभग 9.6 प्रतिशत था।
बेहतर गन्ना उपलब्धता, घरेलू बाजार में अपेक्षाकृत मजबूत कीमतें और डिस्टिलरी कारोबार का प्रदर्शन इस क्षेत्र की आय को सहारा दे रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 में चीनी मिलों की आय में लगभग 5 से 8 प्रतिशत तक की मध्यम वृद्धि हो सकती है।
हालांकि मार्जिन में बहुत अधिक वृद्धि की संभावना सीमित बताई गई है, क्योंकि गन्ने की लागत बढ़ी है जबकि एथेनॉल की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं।
एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम में बढ़त
भारत में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम भी लगातार आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2026 के पहले तीन महीनों में एथेनॉल मिश्रण अनुपात लगभग 19.98 प्रतिशत तक पहुंच गया। इस अवधि में करीब 239 करोड़ लीटर एथेनॉल का उपयोग ईंधन मिश्रण के रूप में किया गया।
केवल जनवरी 2026 में ही लगभग 59.2 करोड़ लीटर एथेनॉल ब्लेंड किया गया, जो इस कार्यक्रम की तेजी को दर्शाता है।
गन्ने के दाम में भी बढ़ोतरी
केंद्र सरकार ने शुगर सीजन 2026 के लिए गन्ने का फेयर एंड रेम्यूनरेटिव प्राइस 15 रुपये बढ़ाकर 355 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। यह मूल्य 10.25 प्रतिशत बेसिक रिकवरी रेट के आधार पर निर्धारित किया गया है।
उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार ने स्टेट एडवाइज्ड प्राइस में भी वृद्धि की है। यहां शुरुआती पकने वाली गन्ने की किस्मों के लिए कीमत 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्मों के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है।



