KidneyHealth – किडनी रोग का बड़ा कारण बन रहे हैं बढ़ता ब्लड प्रेशर और शुगर
KidneyHealth – मानव शरीर में किडनी का आकार भले ही छोटा होता है, लेकिन इसके कार्य बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यह अंग शरीर के अंदर एक प्राकृतिक फिल्टर की तरह काम करता है और हर दिन बड़ी मात्रा में खून को साफ करता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार किडनी रोजाना लगभग 130 से 140 लीटर रक्त को छानकर उसमें मौजूद यूरिया, क्रिएटिनिन और अन्य विषैले अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालती है। इसके साथ ही अतिरिक्त पानी को भी संतुलित तरीके से बाहर निकालने में मदद करती है। किडनी शरीर के कई जरूरी कार्यों में योगदान देती है, जिनमें रक्तचाप को नियंत्रित करना, इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखना और रक्त के pH स्तर को स्थिर रखना शामिल है। हालांकि बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के कारण दुनिया भर में किडनी से जुड़ी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ते देखे जा रहे हैं।

विश्व किडनी दिवस पर बढ़ती बीमारी को लेकर चेतावनी
हर वर्ष मार्च महीने के दूसरे गुरुवार को विश्व किडनी दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष यह दिवस 12 मार्च को मनाया गया। इसका उद्देश्य लोगों को किडनी की बीमारियों के प्रति जागरूक करना और शुरुआती लक्षणों को पहचानने के लिए प्रेरित करना है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में किडनी से जुड़ी समस्याएं केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई हैं। युवा वर्ग में भी इसके मामलों में वृद्धि देखी जा रही है।
डॉक्टरों के अनुसार यदि किडनी से संबंधित समस्याओं को शुरुआती चरण में ही पहचान लिया जाए तो गंभीर स्थितियों से बचा जा सकता है। लेकिन अक्सर लोग तब तक लक्षणों पर ध्यान नहीं देते जब तक स्थिति काफी बिगड़ नहीं जाती। यही कारण है कि कई मामलों में बीमारी धीरे-धीरे बढ़ते हुए किडनी फेलियर जैसी गंभीर अवस्था तक पहुंच जाती है, जिसे जीवन के लिए खतरनाक माना जाता है।
जीवनशैली और आदतें भी बन रही हैं प्रमुख कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि किडनी रोग के पीछे कई जीवनशैली संबंधी कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। असंतुलित भोजन, अधिक नमक का सेवन, तंबाकू और शराब की आदत, मोटापा और बिना चिकित्सकीय सलाह के दर्द निवारक दवाओं का बार-बार उपयोग किडनी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
इन कारणों के अलावा डॉक्टर एक और महत्वपूर्ण जोखिम कारक की ओर ध्यान दिलाते हैं। जिन लोगों का ब्लड शुगर या ब्लड प्रेशर लंबे समय तक नियंत्रित नहीं रहता, उनमें किडनी की बीमारी होने का खतरा अधिक होता है। चिकित्सा आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर में क्रॉनिक किडनी डिजीज के सबसे बड़े कारणों में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर प्रमुख हैं।
डायबिटीज से किडनी को कैसे होता है नुकसान
डॉक्टर बताते हैं कि लंबे समय तक रक्त में ग्लूकोज का स्तर अधिक रहने से किडनी की छोटी-छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। ये सूक्ष्म रक्त वाहिकाएं ही किडनी के फिल्टरिंग सिस्टम का मुख्य हिस्सा होती हैं। जब इनमें क्षति होती है तो किडनी की सफाई करने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है।
इस स्थिति को चिकित्सा भाषा में डायबिटिक नेफ्रोपैथी कहा जाता है। शुरुआत में इसके लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं होते, लेकिन समय के साथ पेशाब में प्रोटीन की मात्रा बढ़ने लगती है। यह संकेत देता है कि किडनी का फिल्टरिंग तंत्र प्रभावित हो रहा है। यदि शुगर लंबे समय तक नियंत्रण में न रहे तो यह स्थिति आगे चलकर क्रॉनिक किडनी डिजीज का रूप ले सकती है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को नियमित रूप से किडनी की जांच कराने की सलाह दी जाती है।
हाई ब्लड प्रेशर भी बढ़ाता है किडनी रोग का खतरा
उच्च रक्तचाप को भी किडनी के लिए एक बड़ा खतरा माना जाता है। जब ब्लड प्रेशर लंबे समय तक अधिक रहता है, तो यह रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डालता है। किडनी के भीतर मौजूद नाजुक रक्त वाहिकाएं इस दबाव से धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं।
जब किडनी ठीक तरीके से काम नहीं कर पाती, तो शरीर में नमक और पानी का संतुलन बिगड़ जाता है। इससे शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगते हैं और रक्तचाप और अधिक बढ़ सकता है। इस तरह यह एक चक्र बन जाता है जिसमें किडनी की कार्यक्षमता और ब्लड प्रेशर दोनों एक-दूसरे को प्रभावित करते रहते हैं। डॉक्टरों के अनुसार जिन लोगों को एक साथ हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की समस्या होती है, उनमें किडनी की बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
किडनी को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी सावधानियां
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ साधारण जीवनशैली बदलावों के जरिए किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि करने से वजन नियंत्रित रहता है और ब्लड प्रेशर तथा ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद मिलती है।
डॉक्टर नमक का सेवन सीमित रखने की भी सलाह देते हैं, क्योंकि अधिक सोडियम शरीर में रक्तचाप बढ़ा सकता है। रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करने से शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है। भोजन में ताजे फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करना भी लाभकारी माना जाता है।
इसके अलावा प्रोसेस्ड और अधिक नमक या चीनी वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना बेहतर होता है। धूम्रपान से किडनी तक पहुंचने वाले रक्त प्रवाह पर असर पड़ सकता है, इसलिए इससे बचना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराते रहना और ब्लड प्रेशर तथा शुगर को नियंत्रित रखना किडनी की सेहत के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है।



