उत्तर प्रदेश

UPPolitics – योगी मंत्रिमंडल विस्तार फिलहाल टला, चुनावी नतीजों के बाद फैसला संभव

UPPolitics – उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से चर्चा में रहा योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल का संभावित विस्तार फिलहाल आगे के लिए टलता हुआ दिखाई दे रहा है। सियासी हलकों में उम्मीद जताई जा रही थी कि होली के आसपास नई टीम में कुछ चेहरों को जगह मिल सकती है, लेकिन ताजा संकेत बताते हैं कि फिलहाल ऐसा होने की संभावना कम है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की प्राथमिकताओं में बदलाव के कारण यह प्रक्रिया अब कुछ समय के लिए रुक गई है, जिससे मंत्री बनने की उम्मीद लगाए बैठे कई विधायकों का इंतजार और लंबा हो गया है।

राष्ट्रीय चुनावी व्यस्तता का असर

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, इस समय पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में व्यस्त है। पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में चुनावी मुकाबले के चलते पूरी रणनीतिक ऊर्जा इन राज्यों पर केंद्रित है। इन चुनावों को लेकर संगठन स्तर पर लगातार बैठकों और चुनावी तैयारियों का दौर जारी है। ऐसे में उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार जैसे फैसले पर तत्काल ध्यान देना नेतृत्व के लिए व्यावहारिक नहीं माना जा रहा।

इसके अलावा बिहार में नई सरकार के गठन और मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही राजनीतिक गतिविधियों ने भी दिल्ली की राजनीति को काफी व्यस्त रखा है। माना जा रहा है कि इन महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच किसी बड़े प्रशासनिक बदलाव का निर्णय फिलहाल टाल दिया गया है।

दो महीने तक और बढ़ सकता है इंतजार

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंत्रिमंडल विस्तार अब संभवतः मई 2026 के आसपास ही हो सकता है। उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, इसलिए पार्टी इस बार भी हर कदम बेहद सोच-समझकर उठाना चाहती है। केंद्रीय नेतृत्व और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दोनों ही इस बात पर विशेष ध्यान दे रहे हैं कि मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले नए चेहरों से संगठनात्मक और सामाजिक संतुलन बेहतर तरीके से साधा जा सके।

पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि विस्तार के समय क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और विभिन्न सामाजिक वर्गों के समीकरणों को ध्यान में रखा जाएगा। यही कारण है कि नेतृत्व किसी जल्दबाजी के बजाय पूरी तैयारी के साथ निर्णय लेना चाहता है।

पिछली रणनीति का दोहराव संभव

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा पहले भी इसी तरह की रणनीति अपनाती रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भी अंतिम चरण में मंत्रिमंडल विस्तार किया गया था। उस समय सितंबर 2021 में नए मंत्रियों को शामिल कर सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को संतुलित करने की कोशिश की गई थी। माना जा रहा है कि आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए इस बार भी लगभग वैसी ही रणनीति अपनाई जा सकती है।

यदि ऐसा होता है तो मंत्रिमंडल विस्तार चुनाव से कुछ महीने पहले किया जा सकता है, ताकि नए मंत्रियों को अपने-अपने क्षेत्रों में राजनीतिक प्रभाव मजबूत करने का समय मिल सके।

मौजूदा मंत्रिमंडल और खाली पदों की स्थिति

योगी आदित्यनाथ सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत 25 मार्च 2022 को हुई थी। उस समय कुल 53 मंत्रियों के साथ सरकार का गठन किया गया था। बाद में कुछ राजनीतिक बदलाव भी हुए हैं। कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद अब केंद्र सरकार में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि राज्य मंत्री अनूप प्रधान वाल्मीकि सांसद बन चुके हैं।

संवैधानिक नियमों के अनुसार उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के आधार पर अधिकतम 60 मंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। मौजूदा स्थिति में करीब नौ से दस पद अभी भी खाली माने जा रहे हैं।

विभागों में फेरबदल की भी संभावना

मंत्रिमंडल विस्तार के साथ केवल नए चेहरों को शामिल करने की ही बात नहीं हो रही, बल्कि कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में बदलाव की संभावना भी जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फेरबदल प्रशासनिक कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने और आगामी चुनावों की रणनीति को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा सकता है।

फिलहाल मंत्री बनने की उम्मीद लगाए बैठे कई विधायक पार्टी नेतृत्व के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। अब उनकी नजरें आने वाले महीनों में होने वाले चुनावी नतीजों और उसके बाद होने वाले राजनीतिक फैसलों पर टिकी हुई हैं।

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