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FuelCrisis – ऊर्जा संकट के बीच बांग्लादेश में हुई ईंधन की कमी, भारत से होगी डीजल आपूर्ति

FuelCrisis – वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधाओं का असर अब दक्षिण एशिया के देशों पर भी दिखाई देने लगा है। बांग्लादेश इस समय ईंधन की कमी से जूझ रहा है, जहां पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को लेकर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल आपूर्ति प्रभावित होने और मध्य पूर्व में बढ़े तनाव के कारण देश में ईंधन की कमी गहराती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि कई स्थानों पर पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। बढ़ती मांग और आशंकाओं के चलते लोगों द्वारा जरूरत से ज्यादा ईंधन खरीदने की प्रवृत्ति भी सामने आई है।

भारत से डीजल आपूर्ति की पहल

इस बीच भारत ने बांग्लादेश की मदद के लिए ऊर्जा सहयोग के तहत डीजल भेजना शुरू किया है। दोनों देशों के बीच हुए समझौते के अनुसार पाइपलाइन के माध्यम से आज लगभग 5000 टन डीजल बांग्लादेश भेजा जा रहा है। यह खेप पारबतीपुर सीमा मार्ग से देश में प्रवेश करेगी और इसे तत्काल आपूर्ति व्यवस्था को स्थिर करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष मुहम्मद रेजानुर रहमान ने इस आपूर्ति की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि भारत और बांग्लादेश के बीच ऊर्जा सहयोग समझौते के तहत हर वर्ष पाइपलाइन के जरिए लगभग 1 लाख 80 हजार टन डीजल की आपूर्ति की योजना है। मौजूदा खेप इसी व्यवस्था के तहत भेजी जा रही है।

समझौते के तहत नियमित आयात

ऊर्जा सहयोग समझौते के मुताबिक हर छह महीने में कम से कम 90 हजार टन डीजल का आयात किया जाना तय किया गया है। बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन को उम्मीद है कि आने वाले दो महीनों में इस छह महीने के कोटे को पूरा कर लिया जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि पाइपलाइन के माध्यम से होने वाली आपूर्ति अपेक्षाकृत तेज और स्थिर होती है, जिससे आपूर्ति शृंखला को बनाए रखने में मदद मिलती है। मौजूदा संकट के समय यह व्यवस्था बांग्लादेश के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

देश में ईंधन जमाखोरी को लेकर चिंता

जहां एक ओर आयात की प्रक्रिया जारी है, वहीं देश के अंदर ईंधन की जमाखोरी और कालाबाजारी को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं। ऊर्जा मंत्रालय ने हाल ही में देशभर में ईंधन भंडार की स्थिति का आकलन करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।

मंत्रालय के अनुसार कुछ व्यापारी मौजूदा संकट का लाभ उठाकर ईंधन को अवैध रूप से जमा कर रहे हैं, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी की स्थिति बन रही है। सरकार का कहना है कि ऐसे मामलों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

ईंधन बिक्री पर तय की गई सीमा

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने वाहनों के प्रकार के आधार पर ईंधन भराने की सीमा निर्धारित की है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपलब्ध ईंधन का वितरण संतुलित तरीके से हो सके और किसी एक व्यक्ति या समूह द्वारा अत्यधिक खरीदारी न की जा सके।

सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार मोटरसाइकिल के लिए लगभग दो लीटर, कारों के लिए करीब दस लीटर और बड़े वाहनों के लिए इससे अधिक लेकिन सीमित मात्रा तय की गई है। हालांकि अधिकारियों को यह भी शिकायत मिली है कि कुछ पेट्रोल पंप निर्धारित सीमा से अधिक ईंधन बेच रहे हैं।

मोबाइल कोर्ट अभियान से निगरानी

जमाखोरी और नियमों के उल्लंघन पर नियंत्रण के लिए प्रशासन ने मोबाइल कोर्ट अभियान शुरू किया है। कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अगुवाई में टीमों द्वारा पेट्रोल पंपों और ईंधन भंडारण स्थलों पर निरीक्षण किया जा रहा है।

ढाका में हाल ही में किए गए निरीक्षण के दौरान कुछ फिलिंग स्टेशनों की स्थिति का आकलन किया गया। एक पेट्रोल पंप में ईंधन पूरी तरह समाप्त पाया गया, जबकि अन्य कुछ स्टेशनों पर नियमों के अनुसार संचालन जारी पाया गया।

बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के अनुसार फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल का भंडार लगभग दो सप्ताह के लिए ही बचा है। सामान्य परिस्थितियों में रोजाना करीब 12 हजार टन डीजल की मांग होती है, जबकि वर्तमान में लगभग 9 हजार टन प्रतिदिन ही आपूर्ति हो पा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पैनिक खरीदारी जारी रहती है तो उपलब्ध भंडार पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

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