JudiciaryUpdate – पटना हाईकोर्ट में नौ नए जजों की सिफारिश
JudiciaryUpdate – पटना हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कमी को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच अब स्थिति में सुधार की उम्मीद जगी है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गुरुवार को हुई बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद पटना हाईकोर्ट के लिए नौ अधिवक्ताओं के नामों पर अपनी सहमति दे दी है। इन नामों को अब औपचारिक प्रक्रिया के तहत केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। यदि किसी स्तर पर आपत्ति या विवाद नहीं हुआ तो जल्द ही नियुक्ति की अधिसूचना जारी की जा सकती है।

कॉलेजियम की बैठक में बनी सहमति
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक में पटना हाईकोर्ट में रिक्त पदों और बढ़ते लंबित मामलों पर विस्तार से विचार किया गया। बताया जा रहा है कि नामों पर अंतिम मुहर लगाने से पहले उम्मीदवारों के अनुभव, वरिष्ठता और न्यायिक कार्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का मूल्यांकन किया गया। कॉलेजियम द्वारा की गई यह सिफारिश न्यायिक व्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब इन प्रस्तावों को विधि एवं न्याय मंत्रालय के पास भेजा जाएगा, जहां से राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नियुक्ति की अधिसूचना जारी होगी।
किन अधिवक्ताओं के नाम शामिल
जिन नौ अधिवक्ताओं के नामों की सिफारिश की गई है, उनमें मो. नदीम सेराज, रंजन कुमार झा, कुमार मनीष, संजीव कुमार, गिरिजेश कुमार, आलोक कुमार, राज कुमार, राणा विक्रम सिंह और विकास कुमार शामिल हैं। ये सभी विधि क्षेत्र में लंबे अनुभव के लिए जाने जाते हैं और विभिन्न मामलों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। माना जा रहा है कि इनकी नियुक्ति से न केवल न्यायिक कार्यवाही में तेजी आएगी बल्कि अदालत में लंबित मामलों के निपटारे में भी मदद मिलेगी।
वर्तमान स्थिति और रिक्त पदों की चुनौती
पटना हाईकोर्ट में स्वीकृत न्यायाधीशों की कुल संख्या 53 है, जबकि फिलहाल केवल 38 न्यायाधीश कार्यरत हैं। यह अंतर अदालत के कामकाज पर सीधा प्रभाव डालता है। आने वाले महीनों में मुख्य न्यायाधीश एस.के. साहू समेत तीन न्यायाधीशों के सेवानिवृत्त होने की संभावना है। ऐसे में कार्यरत जजों की संख्या घटकर 35 रह सकती है। इस स्थिति में नई नियुक्तियां अत्यंत आवश्यक मानी जा रही हैं, ताकि न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो और मामलों के निपटारे की रफ्तार बनी रहे।
नियुक्ति की आगे की प्रक्रिया
कॉलेजियम की सिफारिश के बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजे जाते हैं। विधि मंत्रालय आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद फाइल राष्ट्रपति के पास अग्रेषित करता है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही नियुक्ति की अधिसूचना जारी होती है और संबंधित अधिवक्ता शपथ लेकर न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालते हैं। यह पूरी प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के तहत संचालित होती है और इसमें विभिन्न स्तरों पर जांच और समीक्षा शामिल रहती है।
अन्य उच्च न्यायालयों में भी हुई पहल
हाल के दिनों में कॉलेजियम ने अन्य उच्च न्यायालयों में भी नियुक्तियों को लेकर कदम उठाए हैं। केरल उच्च न्यायालय में सात अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। यह निर्णय भी मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया था। न्यायपालिका में रिक्तियों को भरने की यह प्रक्रिया देशभर में लंबित मामलों को कम करने और न्याय प्रणाली को सुदृढ़ करने के प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही है।
पटना हाईकोर्ट में प्रस्तावित नियुक्तियां न्यायिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम साबित हो सकती हैं। यदि केंद्र सरकार से शीघ्र मंजूरी मिलती है तो आने वाले समय में अदालत के कामकाज में सुधार और मामलों के तेजी से निपटारे की उम्मीद की जा सकती है।



