AssemblyDebate – बजट सत्र में आरोप-प्रत्यारोप से गरमाई बिहार विधानसभा
AssemblyDebate – बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को सदन में तीखी बहस देखने को मिली। राष्ट्रीय जनता दल के विधायक गौतम कृष्ण ने कटौती प्रस्ताव का समर्थन करते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। चर्चा के दौरान उन्होंने अपने पूर्व प्रशासनिक कार्यकाल का उल्लेख करते हुए ग्रामीण विकास विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। उनके बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिससे सदन का माहौल कुछ देर के लिए गर्म हो गया।

पूर्व पदस्थापन का जिक्र कर उठाए सवाल
गौतम कृष्ण ने कहा कि वे करीब 14 महीने तक प्रखंड विकास पदाधिकारी के रूप में कार्यरत रहे। इस दौरान उन पर लगाए गए आरोपों को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई। उनका कहना था कि बिना उनकी बात सुने विभागीय कार्रवाई कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग में निर्णय लेने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और कई मामलों में अधिकारियों को अनावश्यक दबाव झेलना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि अपने इस्तीफे में उन्होंने इन परिस्थितियों का उल्लेख किया था।
ग्रामीण योजनाओं पर अनियमितता का आरोप
विधायक ने मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े किए। उनका आरोप था कि योजनाओं के तहत आवंटित राशि का सही उपयोग नहीं हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई जगहों पर लाभार्थियों तक पूरी राशि नहीं पहुंच पाती। हालांकि, उन्होंने किसी विशिष्ट मामले का उल्लेख नहीं किया। उनका कहना था कि सरकार को इन योजनाओं की जमीनी हकीकत की स्वतंत्र जांच करानी चाहिए ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
सत्ता पक्ष का पलटवार
गौतम कृष्ण के बयान पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजी जाती है। उन्होंने कहा कि पूर्व की तुलना में अब वित्तीय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हुई है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधायक राजू तिवारी ने भी विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बीते वर्षों में शासन व्यवस्था में सुधार हुआ है और योजनाओं के क्रियान्वयन में तकनीकी निगरानी बढ़ाई गई है।
भाजपा विधायक की प्रतिक्रिया
भाजपा विधायक विजय खेमका ने कहा कि राज्य में विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि गौतम कृष्ण की नियुक्ति प्रखंड विकास पदाधिकारी के रूप में एनडीए शासनकाल में ही हुई थी। उनके अनुसार, वर्तमान सरकार कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विपक्ष पर पुराने आरोप दोहराने का आरोप लगाया और कहा कि अब शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है।
सदन में बहस जारी
बहस के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे। विपक्ष ने जहां योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन पर सवाल उठाए, वहीं सत्ता पक्ष ने उपलब्धियों और सुधारों का हवाला दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने सदस्यों से मर्यादा में रहकर चर्चा करने की अपील की।
बजट सत्र के इस चरण में हुई यह बहस आने वाले दिनों में भी राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनी रह सकती है। फिलहाल, सरकार और विपक्ष दोनों अपने-अपने दावों पर कायम हैं और सदन की कार्यवाही निर्धारित एजेंडा के अनुसार आगे बढ़ रही है।



