Jannah Theme License is not validated, Go to the theme options page to validate the license, You need a single license for each domain name.
स्वास्थ्य

GISTCancer – पाचन तंत्र में छिपा दुर्लभ लेकिन गंभीर कैंसर खतरा

GISTCancer – कैंसर को लंबे समय तक उम्रदराज लोगों की बीमारी माना जाता रहा, लेकिन बदलती जीवनशैली और पर्यावरणीय परिस्थितियों ने इस धारणा को काफी हद तक बदल दिया है। आज यह बीमारी किसी एक आयु वर्ग तक सीमित नहीं रही। बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों तक, हर वर्ग में इसके मामले सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत में हर वर्ष हजारों बच्चे भी कैंसर की चपेट में आ रहे हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और समय पर जांच ही इससे बचाव की सबसे बड़ी कुंजी है।

दुर्लभ कैंसर पर कम चर्चा, जोखिम उतना ही गंभीर

अक्सर फेफड़ों, स्तन या गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की चर्चा ज्यादा होती है, लेकिन कुछ ऐसे भी कैंसर हैं जिन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर, जिसे संक्षेप में GIST कहा जाता है, ऐसा ही एक दुर्लभ कैंसर है। यह पाचन तंत्र में विकसित होने वाला ट्यूमर है और आमतौर पर पेट या छोटी आंत में पाया जाता है। हालांकि, कुछ मामलों में यह भोजन नली, बड़ी आंत या मलाशय में भी बन सकता है।

चूंकि इसके मामले अपेक्षाकृत कम होते हैं, इसलिए आम लोगों में इसके बारे में जागरूकता भी सीमित है। लेकिन चिकित्सकों का कहना है कि दुर्लभ होने का अर्थ यह नहीं कि इसे नजरअंदाज किया जाए।

कैसे विकसित होता है यह ट्यूमर

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर को सॉफ्ट टिशू सारकोमा की श्रेणी में रखा जाता है। यह पाचन तंत्र की दीवारों में मौजूद विशेष कोशिकाओं से उत्पन्न होता है। कई बार ये ट्यूमर बहुत छोटे होते हैं, यहां तक कि एक इंच से भी कम आकार के। ऐसे मामलों में मरीज को लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते।

कुछ ट्यूमर धीरे-धीरे बढ़ते हैं, जबकि कुछ तेजी से फैल सकते हैं। इसलिए इनके व्यवहार का अनुमान केवल आकार से नहीं लगाया जा सकता।

शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि GIST के मामले में हर बार लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। कई बार किसी अन्य बीमारी की जांच या सर्जरी के दौरान इसका पता चलता है। फिर भी कुछ संकेत ऐसे हैं जिन पर सतर्क रहना जरूरी है।

लगातार पेट दर्द बने रहना, शौच के दौरान खून आना, बिना वजह वजन कम होना, बार-बार कब्ज की शिकायत, थकान महसूस होना या भूख कम लगना जैसे लक्षण चेतावनी हो सकते हैं। कुछ मरीजों में उल्टी के साथ खून आने की शिकायत भी देखी गई है।

ये लक्षण सामान्य पाचन समस्याओं जैसे लग सकते हैं, लेकिन अगर ये लंबे समय तक बने रहें तो चिकित्सकीय जांच करवाना जरूरी हो जाता है।

आनुवंशिक बदलाव प्रमुख कारण

चिकित्सीय शोध के अनुसार GIST के अधिकतर मामलों में जेनेटिक म्यूटेशन प्रमुख भूमिका निभाता है। खासतौर पर KIT या PDGFRA जीन में बदलाव के कारण कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। यह परिवर्तन आमतौर पर जन्मजात नहीं होता, बल्कि जीवन के दौरान विकसित होता है।

इसी कारण इसे अधिकांश मामलों में वंशानुगत कैंसर नहीं माना जाता। हालांकि, कुछ दुर्लभ जेनेटिक सिंड्रोम जैसे न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप-1 से ग्रसित लोगों में इसका खतरा अधिक पाया गया है।

किन लोगों में ज्यादा जोखिम

विशेषज्ञों का कहना है कि 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में इसका खतरा अपेक्षाकृत ज्यादा देखा गया है। पुरुष और महिलाएं दोनों ही समान रूप से प्रभावित हो सकते हैं। जिन लोगों को पहले किसी प्रकार का ट्यूमर रहा हो या जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो, उनमें भी जोखिम बढ़ सकता है।

समय पर पहचान ही बचाव का रास्ता

हालांकि GIST दुर्लभ है, लेकिन समय पर पहचान होने पर इसका इलाज संभव है। आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों में सर्जरी और लक्षित दवाओं का उपयोग किया जाता है, जिससे मरीजों की जीवन गुणवत्ता बेहतर की जा सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पाचन तंत्र से जुड़ी लगातार समस्याओं को हल्के में न लें। नियमित स्वास्थ्य जांच और जागरूकता ही गंभीर बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.