NipahVirus – पश्चिम बंगाल में संक्रमित नर्स की इलाज के बाद मौत
NipahVirus – पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से जुड़े मामले के बीच एक संक्रमित नर्स की मौत की खबर सामने आई है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, गुरुवार को एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान नर्स ने अंतिम सांस ली। वह पहले निपाह संक्रमण से उबर चुकी थी, लेकिन लंबे समय तक कोमा में रहने और बाद में फेफड़ों में संक्रमण विकसित होने के कारण उसकी स्थिति गंभीर बनी रही। अंततः कार्डियक अरेस्ट के चलते उसकी मृत्यु हो गई।

पहले संक्रमण की पुष्टि, फिर जटिलताएं बढ़ीं
जनवरी के मध्य में दो स्वास्थ्य कर्मियों—एक महिला और एक पुरुष—में निपाह संक्रमण की पुष्टि हुई थी। दोनों को तत्काल गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती कराया गया था। महिला नर्स की हालत अधिक नाजुक होने के कारण उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि संक्रमण से वह धीरे-धीरे उबर गई थी और जनवरी के अंतिम सप्ताह में उसे वेंटिलेटर से हटा भी लिया गया था।
हालांकि संक्रमण के दौरान उत्पन्न जटिलताओं का असर उसके शरीर पर बना रहा। लंबे समय तक अचेत अवस्था में रहने और फेफड़ों में संक्रमण होने से उसकी सेहत फिर बिगड़ गई। चिकित्सकों ने हरसंभव प्रयास किए, लेकिन स्थिति नियंत्रण में नहीं आ सकी।
दूसरे संक्रमित स्वास्थ्यकर्मी को मिली छुट्टी
दूसरे संक्रमित स्वास्थ्य कर्मी को समय पर उपचार मिलने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। अधिकारियों ने बताया कि उसकी तबीयत अब स्थिर है और वह संक्रमण से पूरी तरह उबर चुका है। संक्रमण की पुष्टि के बाद संपर्क में आए करीब 120 लोगों की पहचान कर निगरानी की गई थी। फिलहाल राज्य में कोई नया मामला सामने नहीं आया है।
संक्रमण की गंभीरता पर विशेषज्ञों की चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, निपाह वायरस संक्रमण दर और मृत्यु दर दोनों के लिहाज से गंभीर माना जाता है। विभिन्न अध्ययनों में बताया गया है कि इससे संक्रमित 40 से 70 प्रतिशत मरीजों की जान जाने का खतरा रहता है। यह वायरस शरीर में तेजी से फैल सकता है और फेफड़ों तथा मस्तिष्क को प्रभावित करता है। कुछ मामलों में एन्सेफलाइटिस यानी मस्तिष्क में सूजन भी देखी गई है।
डब्ल्यूएचओ की स्थिति रिपोर्ट
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, निपाह एक जूनोटिक बीमारी है, जो मुख्य रूप से जानवरों से इंसानों में फैलती है। यह वायरस अक्सर चमगादड़ों में पाया जाता है और उनके द्वारा दूषित फल या खाद्य पदार्थ के सेवन से संक्रमण का जोखिम बढ़ता है।
हालिया आकलन में भारत और बांग्लादेश में सीमित मामलों की पुष्टि हुई थी, लेकिन वर्तमान में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। डब्ल्यूएचओ ने यह भी स्पष्ट किया है कि निपाह के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इसलिए सतर्कता और शुरुआती पहचान ही बचाव का प्रमुख तरीका है।
लक्षण और बचाव की आवश्यकता
निपाह से संक्रमित व्यक्ति को तेज बुखार, सिरदर्द, सांस लेने में कठिनाई और मानसिक भ्रम जैसे लक्षण हो सकते हैं। गंभीर मामलों में निमोनिया जैसी स्थिति बन सकती है और ऑक्सीजन स्तर गिर सकता है। समय पर उपचार और निगरानी से जोखिम को कम किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध लक्षण की स्थिति में तुरंत चिकित्सा सलाह लें। फिलहाल राज्य में संक्रमण का कोई नया मामला सामने नहीं आया है, लेकिन सतर्कता बरतना जरूरी बताया गया है।



