उत्तराखण्ड

Ganga Museum – देवपुरा चौक पर बनेगा भव्य गंगा संग्रहालय

Ganga Museum – हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को जल्द ही गंगा के पावन घाटों के साथ-साथ मां गंगा की पौराणिक गाथाओं को भी करीब से जानने का अवसर मिलेगा। नगर निगम की पहल पर देवपुरा चौक स्थित भूमि पर गंगा संग्रहालय के निर्माण को शासन से हरी झंडी मिल गई है। यह परियोजना लंबे समय से चर्चा में थी और अब इसे मूर्त रूप देने की तैयारी शुरू हो गई है।

कुंभ से पहले पूरा करने का लक्ष्य

करीब दस करोड़ रुपये से अधिक की लागत से प्रस्तावित इस संग्रहालय को आगामी कुंभ मेले से पहले तैयार करने की योजना बनाई गई है। मेयर किरण जैसल के प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद धनराशि भी जारी कर दी गई है। परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी पेयजल निगम को सौंपी गई है, ताकि तय समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा हो सके।

चार मंजिला भवन में विकसित होगा संग्रहालय

नगर निगम की भूमि पर बनने वाले इस भवन के भूतल पर पार्किंग की व्यवस्था होगी, जिससे शहर में यातायात व्यवस्था को भी राहत मिलेगी। इसके ऊपर तीन मंजिलों में गंगा संग्रहालय विकसित किया जाएगा। यहां आने वाले आगंतुकों को हरिद्वार के धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पक्षों को व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा।

पौराणिक कथाओं का सजीव प्रस्तुतीकरण

संग्रहालय में गंगा अवतरण की कथा से लेकर भगीरथ की तपस्या, कुंभ मंथन, दक्ष प्रजापति यज्ञ प्रसंग और देवी सती की कथा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से दर्शाया जाएगा। भगवान शिव की लीलाओं और पांडवों से जुड़ी कथाओं को भी विशेष स्थान दिया जाएगा। इसके अलावा सप्त सरोवर, ब्रह्मकुंड और अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों का महत्व भी प्रदर्शित किया जाएगा।

चंडी देवी, मनसा देवी, मायादेवी, शीतला माता और सुरेश्वरी देवी जैसे प्रमुख मंदिरों का ऐतिहासिक व धार्मिक विवरण भी संग्रहालय में शामिल रहेगा। कांवड़ यात्रा की परंपरा और हर की पैड़ी के महत्व को भी विस्तार से समझाया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ सके।

नगर निगम की भूमि का सुनियोजित उपयोग

देवपुरा चौक स्थित जिस भूमि पर यह निर्माण प्रस्तावित है, वह लंबे समय से खाली पड़ी थी। नगर निगम का मानना है कि इस बहुमूल्य जमीन का उपयोग जनहित में होना चाहिए। पहले इस क्षेत्र पर अतिक्रमण की आशंका जताई जाती रही है, लेकिन अब यहां पार्किंग और संग्रहालय बनने से भूमि का स्थायी और उपयोगी विकास सुनिश्चित होगा।

2010 में अधूरा रह गया था प्रस्ताव

गौरतलब है कि वर्ष 2010 के महाकुंभ के दौरान भी गंगा संग्रहालय की योजना बनी थी। उस समय स्थान भी चिन्हित किया गया था, लेकिन विभिन्न कारणों से परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब दोबारा इसे प्राथमिकता में रखते हुए अमल में लाया जा रहा है।

पर्यटन और सांस्कृतिक जागरूकता को मिलेगा बढ़ावा

हरिद्वार चार धाम यात्रा का प्रवेश द्वार माना जाता है और यहां देश-विदेश से लाखों लोग पहुंचते हैं। संग्रहालय बनने से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि श्रद्धालु गंगा के आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व को व्यवस्थित रूप से समझ सकेंगे।

मेयर किरण जैसल का कहना है कि यह परियोजना शहर के लिए महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, आज की युवा पीढ़ी अपने प्राचीन इतिहास और परंपराओं को जानने में रुचि रखती है। संग्रहालय इसी उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है, ताकि मां गंगा की महिमा और उससे जुड़ी कथाओं को एक ही स्थान पर समग्र रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

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