अंतर्राष्ट्रीय

IranNuclearTalks – ओमान में अमेरिका-ईरान वार्ता के बाद बढ़ी कूटनीतिक हलचल

IranNuclearTalks – अमेरिका और ईरान के बीच ओमान में परमाणु समझौते को लेकर हुई पहले दौर की बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। हालांकि, दोनों पक्षों ने बातचीत के माहौल को सकारात्मक बताया है और आने वाले दिनों में एक और दौर की बैठक पर सहमति जताई है। यह वार्ता ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है और ओमान लगातार मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

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पहले दौर की वार्ता बिना नतीजे समाप्त

ओमान में हुई इस शुरुआती बैठक से किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं हुई, लेकिन इसे पूरी तरह विफल भी नहीं माना जा रहा। दोनों देशों की ओर से जारी संकेतों के अनुसार, बातचीत का रास्ता खुला रखा गया है। राजनयिक सूत्रों का कहना है कि इस चरण में पक्षों ने एक-दूसरे के रुख को समझने पर ज्यादा जोर दिया, बजाय किसी तत्काल सहमति तक पहुंचने के।

ओमान की मध्यस्थ भूमिका फिर चर्चा में

ईरान और अमेरिका के बीच सीधे संवाद के अभाव में ओमान लंबे समय से एक भरोसेमंद मध्यस्थ के रूप में सामने आया है। मस्कट में हुई बैठक इसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है। ओमान की कोशिश है कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच बढ़ते अविश्वास को बातचीत के जरिए कम किया जाए और क्षेत्र में किसी बड़े टकराव से बचा जा सके।

अली लारीजानी के दौरे पर टिकी निगाहें

इसी बीच ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव और संसद के पूर्व अध्यक्ष अली लारीजानी ओमान की राजधानी मस्कट पहुंच रहे हैं। उनके इस दौरे को बेहद अहम माना जा रहा है। लारीजानी ओमान के विदेश मंत्री बदर अल-बुसैदी और सुल्तान हैथम बिन तारिक से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में परमाणु मुद्दे के साथ-साथ क्षेत्रीय हालात और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा होने की संभावना है।

वार्ता के संदेश को लेकर सस्पेंस

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने लारीजानी की इस यात्रा को महत्वपूर्ण बताया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वे ओमान के लिए कोई खास संदेश लेकर जा रहे हैं या नहीं। विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा आगामी परमाणु वार्ता की दिशा तय करने में भूमिका निभा सकता है, खासकर तब जब दोनों पक्ष अगले दौर की तैयारी कर रहे हैं।

अमेरिका-ईरान तनाव बना हुआ है

हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के रिश्तों में नरमी के बजाय तल्खी ज्यादा दिखी है। पिछले सप्ताह ओमान में बातचीत के बावजूद दोनों देशों के बीच अविश्वास खत्म होता नजर नहीं आया। तेहरान में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ संकेत दिए कि उनका देश यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार से पीछे हटने के मूड में नहीं है।

यूरेनियम संवर्धन पर अडिग ईरान

विदेश मंत्री अराघची ने राजनयिकों को संबोधित करते हुए कहा कि यूरेनियम संवर्धन ईरान की मूल शर्तों में शामिल है। यह वही मुद्दा है, जिस पर अमेरिका, खासकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के साथ ईरान का सबसे बड़ा मतभेद रहा है। ट्रंप पहले भी इस कार्यक्रम को लेकर कड़ा रुख अपनाते रहे हैं।

अगले दौर की बातचीत पर चर्चा जारी

ईरान के विदेश मंत्री ने इससे पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि परमाणु वार्ता के अगले चरण की तारीख और स्थान को लेकर ओमान के साथ विचार-विमर्श चल रहा है। माना जा रहा है कि लारीजानी का मौजूदा दौरा इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मददगार हो सकता है।

इस्राइल की चेतावनी से बढ़ा तनाव

इन कूटनीतिक प्रयासों के बीच इस्राइल की ओर से भी सख्त बयान सामने आया है। इस्राइली नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि यदि जरूरत पड़ी तो वह अमेरिका की मदद के बिना भी ईरान के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। इसी सप्ताह इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात प्रस्तावित है, जिससे हालात और संवेदनशील हो गए हैं।

आगे की दिशा पर सबकी नजर

ओमान में जारी मध्यस्थता, ईरान के कड़े रुख और अमेरिका की रणनीति के बीच आने वाले दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं। यह साफ है कि परमाणु समझौते को लेकर बातचीत अभी लंबी चलेगी और इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता पर पड़ेगा।

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