Filaria Elimination – रांची में 10 फरवरी से शुरू होगा फाइलेरिया उन्मूलन अभियान
Filaria Elimination – रांची जिले में फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर बड़े पैमाने पर अभियान शुरू करने जा रहा है। मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए-26) के तहत यह कार्यक्रम 10 फरवरी से 25 फरवरी तक संचालित किया जाएगा। सोमवार को आयोजित प्रेसवार्ता में सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने अभियान की रूपरेखा साझा करते हुए लोगों से सहयोग की अपील की।

तीन प्रखंडों में केंद्रित रहेगा अभियान
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह अभियान रांची जिले के कांके, सोनाहातू और तमाड़ प्रखंडों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्रों में चलाया जाएगा। इन क्षेत्रों में फाइलेरिया के संभावित जोखिम को देखते हुए कुल 5,57,970 लोगों को लक्षित किया गया है। अभियान के दौरान फाइलेरिया रोधी दवाएं डीईसी और अल्बेंडाजोल पात्र लाभार्थियों को खिलाई जाएंगी। हालांकि गर्भवती महिलाएं, दो वर्ष से कम उम्र के बच्चे और अत्यंत गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को इस दवा से अलग रखा गया है।
पहले दिन बूथ व्यवस्था, फिर घर-घर पहुंच
अभियान की शुरुआत 10 फरवरी को बूथ आधारित दवा वितरण से होगी। इस दिन आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों, कॉलेजों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर विशेष बूथ लगाए जाएंगे। इसके बाद 11 फरवरी से 25 फरवरी तक स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर उन लोगों को दवा खिलाएंगे, जो पहले दिन किसी कारणवश वंचित रह गए हों। पूरे जिले में इसके लिए 619 बूथ बनाए गए हैं और 1238 ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर तैनात किए गए हैं।
निगरानी और प्रबंधन की पुख्ता व्यवस्था
अभियान की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 106 सुपरवाइजरों की तैनाती की गई है। ये सुपरवाइजर दवा वितरण, लोगों की सहभागिता और किसी भी तरह की समस्या पर नजर रखेंगे। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि मजबूत निगरानी व्यवस्था से शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।
जागरूकता पर विशेष जोर
सिविल सर्जन ने बताया कि केवल दवा वितरण से ही लक्ष्य पूरा नहीं होता, इसके लिए लोगों में सही जानकारी और भरोसा भी जरूरी है। इसी कारण अभियान से पहले और उसके दौरान व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। विभिन्न सरकारी विभागों और स्थानीय संस्थाओं के सहयोग से लोगों को यह समझाया जा रहा है कि दवा का सेवन सुरक्षित है और बीमारी से बचाव के लिए आवश्यक है।
फाइलेरिया क्या है और क्यों खतरनाक
फाइलेरिया एक वेक्टर जनित रोग है, जो गंदे पानी में पनपने वाले संक्रमित मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है। यह बीमारी आमतौर पर जानलेवा नहीं होती, लेकिन समय पर इलाज न होने पर शरीर में स्थायी सूजन, अंग विकृति और दिव्यांगता का कारण बन सकती है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती मानता है।
दवा सेवन में सावधानी जरूरी
स्वास्थ्य विभाग ने दवा सेवन को लेकर कुछ जरूरी सावधानियां भी बताई हैं। दवा खाली पेट नहीं लेनी चाहिए और स्वास्थ्यकर्मियों के निर्देशों का पालन करना जरूरी है। सिविल सर्जन ने लोगों से अपील की कि वे न सिर्फ खुद दवा लें, बल्कि अपने परिवार के सभी पात्र सदस्यों को भी दवा जरूर खिलाएं। अभियान की सफलता सीधे तौर पर जनभागीदारी पर निर्भर करती है।
स्वास्थ्य विभाग की सामूहिक जिम्मेदारी
प्रेसवार्ता के दौरान मलेरिया पदाधिकारी समेत स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन केवल विभाग का नहीं, बल्कि समाज की साझा जिम्मेदारी है।



