VastuTips – घर में मछली रखने से जुड़ी मान्यताएं, धातु और दिशा का महत्व
VastuTips – वास्तु शास्त्र में घर की हर वस्तु को ऊर्जा का स्रोत माना गया है। कहा जाता है कि जब घर में रखी चीजें सही दिशा और संतुलन के साथ स्थापित होती हैं, तो उनका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर दिखाई देता है। वहीं, यदि किसी वस्तु का स्थान या स्वरूप वास्तु के नियमों के विरुद्ध हो, तो इसका असर मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह और आर्थिक परेशानियों के रूप में सामने आ सकता है। ऐसे में कई लोग वास्तु उपाय के तौर पर घर में मछली की प्रतिमा रखना पसंद करते हैं, लेकिन सही धातु और दिशा की जानकारी न होने से इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाता।

वास्तु शास्त्र में मछली का प्रतीकात्मक महत्व
वास्तु मान्यताओं के अनुसार मछली को निरंतर गति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। मछली जल तत्व से जुड़ी होती है, जो जीवन और प्रवाह का संकेत देती है। यही कारण है कि घर में मछली की आकृति रखने को शुभ माना जाता है। यह न केवल धन आकर्षण का संकेत मानी जाती है, बल्कि घर के वातावरण में स्थिरता और उत्साह भी बनाए रखने में सहायक बताई जाती है। कई परिवार इसे आर्थिक बाधाओं को दूर करने और रुके हुए कार्यों में गति लाने के उपाय के रूप में अपनाते हैं।
चांदी की मछली से जुड़ी मान्यताएं
वास्तु और ज्योतिष से जुड़े जानकारों के अनुसार चांदी की मछली को विशेष रूप से शुभ माना गया है। मान्यता है कि मछली का संबंध शनि ग्रह से जोड़ा जाता है, जबकि चांदी चंद्रमा और शुक्र ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है। चंद्रमा मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन का कारक माना जाता है, वहीं शुक्र सुख-सुविधा, वैभव और धन से जुड़ा ग्रह है। इन ग्रहों के संतुलन के कारण चांदी की मछली को घर में रखना सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला उपाय माना जाता है।
वास्तु नियमों के अनुसार चांदी की मछली को घर की ईशान दिशा, यानी उत्तर-पूर्व कोने में रखना सबसे उपयुक्त माना गया है। ध्यान रखा जाता है कि मछली का मुख हमेशा घर के भीतर की ओर हो, ताकि सकारात्मक ऊर्जा बाहर न जाए और घर में ही बनी रहे।
बढ़ती कीमतों के बीच पीतल एक व्यावहारिक विकल्प
वर्तमान समय में चांदी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे हर किसी के लिए चांदी की मछली खरीदना आसान नहीं रह गया है। ऐसे में वास्तु विशेषज्ञ पीतल की मछली को एक व्यवहारिक और प्रभावी विकल्प मानते हैं। पीतल को वास्तु शास्त्र में शुद्ध और पवित्र धातु का दर्जा दिया गया है। माना जाता है कि पीतल की वस्तुएं नकारात्मक ऊर्जा को कम करने और वातावरण को संतुलित करने में सहायक होती हैं।
पीतल की मछली रखने के लाभ
वास्तु मान्यताओं के अनुसार पीतल की मछली घर में रखने से वास्तु दोषों में कमी आती है और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इसे विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी माना जाता है, जिन्हें आर्थिक अस्थिरता, व्यवसाय में रुकावट या करियर में प्रगति न होने की समस्या का सामना करना पड़ रहा हो। पीतल की मछली को घर की उत्तर दिशा या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना शुभ बताया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे धन के नए अवसर बनते हैं और कार्यक्षेत्र में सकारात्मक परिणाम मिलने लगते हैं।
मछली रखते समय ध्यान रखने योग्य बातें
वास्तु जानकारों का कहना है कि मछली की प्रतिमा केवल सजावट की वस्तु नहीं है, बल्कि इसे सम्मान और नियमों के साथ रखना आवश्यक है। टूटी या क्षतिग्रस्त मछली की प्रतिमा घर में नहीं रखनी चाहिए। साथ ही, इसे ऐसे स्थान पर न रखें जहां गंदगी या अव्यवस्था हो। समय-समय पर इसकी साफ-सफाई करना भी जरूरी माना गया है, ताकि इसकी सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे।
आस्था और संतुलन का मेल
हालांकि वास्तु शास्त्र पर विश्वास व्यक्ति की आस्था पर निर्भर करता है, लेकिन यह भी सच है कि सही दिशा, स्वच्छता और संतुलन घर के वातावरण को बेहतर बनाते हैं। मछली की प्रतिमा को लेकर भी यही मान्यता है कि यदि इसे नियमों के अनुसार रखा जाए, तो यह घर में सकारात्मकता और स्थिरता का अनुभव करा सकती है।



