उत्तर प्रदेश

PanchayatElection – वार्ड परिसीमन के बाद पंचायत सदस्य संख्या में बड़ी गड़बड़ी उजागर

PanchayatElection – उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों की तैयारियों के बीच एक अहम प्रशासनिक चूक सामने आई है। वार्डवार परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत सदस्यों की संख्या दर्ज करने में कई जिलों से गंभीर त्रुटियों की जानकारी मिली है। यह गड़बड़ी राज्य निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर अपलोड किए गए आंकड़ों और पंचायती राज विभाग की आधिकारिक सूची के बीच अंतर के रूप में सामने आई है।

आयोग के पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों में अंतर

राज्य निर्वाचन आयोग के संज्ञान में आया है कि विभिन्न जिलों से जो विवरण पोर्टल पर फीड किए गए हैं, वे पंचायती राज विभाग द्वारा जारी प्रामाणिक सूचियों से मेल नहीं खा रहे। कहीं सदस्य संख्या अधिक दर्ज की गई है तो कहीं वास्तविक संख्या से कम। यह स्थिति चुनावी तैयारियों के लिहाज से संवेदनशील मानी जा रही है, क्योंकि इन्हीं आंकड़ों के आधार पर आगे की पूरी प्रक्रिया तय होती है।

त्रुटियों को गंभीर मानते हुए सख्त निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने कहा है कि बिना विभागीय सूची से पूर्ण मिलान किए किसी भी प्रकार का आंकड़ा पोर्टल पर दर्ज न किया जाए। सभी जिलों को यह भी निर्देश दिया गया है कि पहले से दर्ज किए गए आंकड़ों की दोबारा जांच कर जल्द से जल्द सुधार सुनिश्चित किया जाए।

पंचायत चुनाव की समय-सीमा को देखते हुए बढ़ी सतर्कता

प्रदेश में पंचायत चुनाव मई 2026 तक कराए जाने प्रस्तावित हैं। चुनाव कार्यक्रम से पहले मतदाता सूची, परिसीमन और प्रतिनिधियों की संख्या से जुड़े सभी आंकड़ों का सटीक होना अनिवार्य है। ऐसे में इस तरह की प्रशासनिक लापरवाही को समय रहते ठीक करना आयोग की प्राथमिकता बन गई है। अधिकारियों को चेताया गया है कि भविष्य में इस तरह की चूक दोहराई न जाए।

अंतिम मतदाता सूची से पहले डेटा सुधार जरूरी

चुनावी प्रक्रिया के तहत अंतिम मतदाता सूची 28 मार्च को प्रकाशित की जानी है। इससे पहले सभी संबंधित आंकड़ों का सही और अद्यतन होना बेहद जरूरी माना जा रहा है। आयोग का मानना है कि यदि प्रारंभिक स्तर पर ही आंकड़ों में त्रुटि रह जाती है, तो इसका असर आगे चलकर नामांकन, आरक्षण और मतदान व्यवस्था तक पड़ सकता है।

जिलों से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट

राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलों से यह भी कहा है कि वे सुधार प्रक्रिया पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट भेजें। इसमें यह स्पष्ट किया जाए कि कहां-कहां गलती हुई, किस स्तर पर चूक सामने आई और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। इससे चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

चुनावी तैयारियों में समन्वय की जरूरत

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। पंचायती राज विभाग और निर्वाचन आयोग के आंकड़ों में तालमेल न होने से न केवल प्रशासनिक असुविधा होती है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। आयोग ने संकेत दिए हैं कि आगे चलकर डेटा एंट्री और सत्यापन की प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा।

समय रहते सुधार से टलेगी असमंजस की स्थिति

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अभी सुधार कर लिए जाते हैं, तो चुनाव के दौरान किसी तरह की भ्रम या विवाद की स्थिति से बचा जा सकता है। आयोग की सक्रियता से यह उम्मीद की जा रही है कि पंचायत चुनाव से पहले सभी तकनीकी और प्रशासनिक खामियों को दूर कर लिया जाएगा, ताकि निष्पक्ष और सुचारु चुनाव संपन्न कराए जा सकें।

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