NaxalEncounter – बीजापुर के जंगलों में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, एक की मौत
NaxalEncounter – छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में गुरुवार सुबह सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक नक्सली के मारे जाने की पुष्टि हुई है। यह मुठभेड़ जिले के दक्षिणी हिस्से में स्थित घने जंगलों में उस समय शुरू हुई, जब सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम नक्सल विरोधी अभियान पर निकली थी। अधिकारियों के अनुसार, इलाके में अब भी सर्च ऑपरेशन जारी है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

सुबह के वक्त शुरू हुई गोलीबारी
पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, मुठभेड़ की शुरुआत सुबह करीब 7:30 बजे हुई। सुरक्षाबलों की टीम नियमित एंटी-नक्सल गश्त के दौरान जंगल में आगे बढ़ रही थी, तभी नक्सलियों की ओर से अचानक फायरिंग शुरू हो गई। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभाला, जिसके बाद दोनों ओर से गोलीबारी होने लगी। घटनास्थल दूरदराज और जंगलों से घिरा होने के कारण ऑपरेशन को बेहद सतर्कता के साथ अंजाम दिया जा रहा है।
एक नक्सली का शव और हथियार बरामद
मुठभेड़ स्थल से अब तक एक नक्सली का शव बरामद किया गया है। इसके साथ ही एक अत्याधुनिक AK-47 राइफल भी मिली है, जिससे यह संकेत मिलता है कि मारा गया नक्सली सशस्त्र दस्ते का सक्रिय सदस्य था। अधिकारियों ने बताया कि शव और हथियार को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इलाके में अन्य नक्सलियों की मौजूदगी की आशंका के चलते तलाशी अभियान फिलहाल जारी है।
ऑपरेशन पूरा होने के बाद आएगी पूरी जानकारी
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि मुठभेड़ से जुड़ी विस्तृत जानकारी ऑपरेशन के पूरी तरह समाप्त होने के बाद साझा की जाएगी। फिलहाल प्राथमिक उद्देश्य इलाके को पूरी तरह सुरक्षित करना और किसी भी संभावित खतरे को खत्म करना है। जंगलों में कई टीमों को अलग-अलग दिशाओं में तैनात किया गया है ताकि नक्सलियों को भागने का मौका न मिले।
इस साल अब तक 23 माओवादी मारे गए
इस ताजा कार्रवाई के साथ ही वर्ष 2026 में छत्तीसगढ़ में अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे गए माओवादियों की संख्या बढ़कर कम से कम 23 हो गई है। इससे पहले तीन जनवरी को बस्तर क्षेत्र में हुई दो अलग-अलग मुठभेड़ों में 14 नक्सली ढेर किए गए थे। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से संकेत मिलते हैं कि सुरक्षाबलों ने नक्सल नेटवर्क पर दबाव काफी हद तक बढ़ा दिया है।
बस्तर क्षेत्र लंबे समय से नक्सल गतिविधियों का केंद्र
बस्तर संभाग, जिसमें बीजापुर सहित कुल सात जिले शामिल हैं, लंबे समय से नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा है। दुर्गम भौगोलिक स्थिति और घने जंगल नक्सलियों के लिए छिपने के सुरक्षित ठिकाने रहे हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में सुरक्षाबलों की रणनीति, तकनीकी निगरानी और स्थानीय सहयोग के चलते नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगने की बात कही जा रही है।
पिछले साल मुठभेड़ों में मारे गए थे 285 माओवादी
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों के साथ हुई विभिन्न मुठभेड़ों में कुल 285 माओवादी मारे गए थे। यह आंकड़ा राज्य में नक्सल विरोधी अभियानों की तीव्रता को दर्शाता है। केंद्र और राज्य सरकारें लगातार इस दिशा में काम कर रही हैं कि हिंसा प्रभावित इलाकों में विकास और सुरक्षा दोनों को एक साथ आगे बढ़ाया जा सके।
लेफ्ट-विंग एक्सट्रीमिज्म खत्म करने की तय समयसीमा
केंद्र सरकार ने देश से लेफ्ट-विंग एक्सट्रीमिज्म को पूरी तरह समाप्त करने के लिए 31 मार्च की समयसीमा निर्धारित की है। इसी लक्ष्य के तहत छत्तीसगढ़ सहित अन्य प्रभावित राज्यों में बड़े पैमाने पर अभियान चलाए जा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि लगातार दबाव और क्षेत्र में विकास कार्यों के जरिए नक्सल समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है।



