VoterList – पश्चिम बंगाल मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई
VoterList – सुप्रीम कोर्ट में आज पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से जुड़े विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) को लेकर महत्वपूर्ण सुनवाई हो रही है। इस मामले की गंभीरता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं अदालत में मौजूद रहीं और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ कार्यवाही पर नजर बनाए रखी। सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली भी शामिल हैं।

न्यायालय की टिप्पणी और पृष्ठभूमि
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि उन्हें पश्चिम बंगाल से जुड़े दो वरिष्ठ न्यायाधीशों से इस प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी मिली है। इन न्यायाधीशों ने पास प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था और उससे जुड़ी व्यावहारिक कठिनाइयों को समझाया, जिसके आधार पर इस मुद्दे को न्यायालय के समक्ष रखा गया। पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले में सामने आ रही प्रक्रियात्मक विसंगतियों को समझना आवश्यक है ताकि मतदाताओं के अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
राज्य सरकार की ओर से उठाए गए सवाल
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने अदालत को बताया कि पूर्व में न्यायालय ने तार्किक विसंगतियों की सूची सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था। उन्होंने आग्रह किया कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत संक्षिप्त नोट पर गंभीरता से विचार किया जाए, क्योंकि पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अब केवल चार दिन शेष हैं।
लाखों मतदाताओं के नाम पर संकट
अधिवक्ता दीवान ने आंकड़ों के माध्यम से स्थिति की गंभीरता को रेखांकित किया। उनके अनुसार, करीब 32 लाख मतदाता अभी तक सूचीबद्ध नहीं हो पाए हैं। इसके अलावा लगभग 1.36 करोड़ नाम तथाकथित तार्किक विसंगति सूची में डाल दिए गए हैं, जबकि 63 लाख से अधिक मामलों की सुनवाई अभी लंबित है। उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रक्रिया के लिए 8,300 सूक्ष्म पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है, जबकि संविधान में इस तरह की श्रेणी का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
दस्तावेज़ों की अस्वीकृति से बढ़ी परेशानी
राज्य सरकार की ओर से यह भी दलील दी गई कि कई वैध दस्तावेजों को स्वीकार नहीं किया जा रहा है। निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और ओबीसी प्रमाण पत्र जैसे मान्य दस्तावेजों को अस्वीकार किए जाने से आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को चार से पांच घंटे तक लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है, जिससे बुजुर्गों और कामकाजी नागरिकों के लिए स्थिति और कठिन हो गई है।
चुनाव आयोग के आदेशों को चुनौती
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी याचिका में चुनाव आयोग द्वारा 24 जून 2025 और 27 अक्टूबर 2025 को जारी किए गए सभी विशेष गहन पुनरीक्षण संबंधी आदेशों और निर्देशों को रद्द करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने न्यायालय से यह निर्देश देने का अनुरोध किया है कि आगामी विधानसभा चुनाव 2025 की अपरिवर्तित मतदाता सूची के आधार पर ही कराए जाएं।
मतदान अधिकारों पर खतरे का आरोप
याचिका में यह तर्क भी दिया गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया 2002 की आधारभूत सूची पर निर्भर करती है और इसकी सत्यापन प्रक्रिया अत्यंत जटिल है। इससे वास्तविक और पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। राज्य सरकार का कहना है कि इस तरह की प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत है।
टीएमसी सांसदों की याचिकाओं पर भी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, आज की सुनवाई में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों मोस्तरी बानू, डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन द्वारा दायर तीन अलग-अलग याचिकाओं पर भी विचार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की व्यक्तिगत याचिका को भी इसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है। मामले में अदालत के रुख पर राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।



