US-Iran Talks – तुर्किये की मध्यस्थता से युद्ध टालने की नई कूटनीतिक पहल तेज
US-Iran Talks – मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच तुर्किये एक संवेदनशील और शांत कूटनीतिक प्रयास में जुटा है। अंकारा इस सप्ताह के अंत तक वॉशिंगटन और तेहरान के बीच एक अनौपचारिक, परन्तु गंभीर बैठक की जमीन तैयार करने की कोशिश कर रहा है। तुर्की सरकार का मानना है कि प्रत्यक्ष संपर्क ही गलतफहमियों को कम कर सकता है और सैन्य टकराव की आशंकाओं को धीमा कर सकता है। हालांकि, फिलहाल न तो अमेरिकी प्रशासन और न ही ईरानी नेतृत्व ने सार्वजनिक रूप से इस पहल में शामिल होने की औपचारिक सहमति दी है। तुर्की के वरिष्ठ अधिकारी अमेरिकी मध्यस्थ स्टीव विटकॉफ और ईरान के शीर्ष निर्णयकर्ताओं के बीच सीधी बातचीत का रास्ता खोलना चाहते हैं, ताकि पर्दे के पीछे से भरोसा कायम किया जा सके।

अमेरिकी सैन्य तैनाती और व्हाइट हाउस का रुख
कूटनीति की कोशिशों के साथ-साथ मैदान पर सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। अमेरिका ने हाल के दिनों में अपने सबसे शक्तिशाली विमानवाहक युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ विध्वंसक जहाजों का एक समूह पश्चिम एशिया के जलक्षेत्र में तैनात कर दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ संपर्क बना हुआ है और उन्हें उम्मीद है कि कोई राजनीतिक रास्ता निकलेगा। इसके बावजूद, उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि बातचीत विफल हुई तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। वहीं अमेरिकी रक्षा विभाग ने फिलहाल ईरान में शासन परिवर्तन की किसी प्रत्यक्ष योजना से इनकार करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़ा मामला बताया है।
यूरोपीय संघ बनाम तेहरान: नया टकराव
इसी बीच यूरोपीय संघ ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकवादी संगठन की श्रेणी में डालते हुए एक कड़ा कदम उठाया है। इस फैसले के जवाब में तेहरान ने राजधानी स्थित सभी यूरोपीय राजदूतों को तलब कर अपनी नाराजगी दर्ज कराई। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि यह प्रक्रिया रविवार से शुरू होकर सोमवार तक चली और आने वाले दिनों में औपचारिक जवाबी कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। समानांतर रूप से ब्रिटेन ने भी ईरान के गृह मंत्री समेत दस वरिष्ठ अधिकारियों पर सख्त प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे दोनों पक्षों के बीच दूरी और बढ़ गई है।
रिवोल्यूशनरी गार्ड और मानवाधिकार विवाद
रिवोल्यूशनरी गार्ड पर हालिया जनवरी प्रदर्शनों के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग के गंभीर आरोप लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों के मुताबिक इन विरोध प्रदर्शनों में 6,800 से अधिक लोग मारे गए, जबकि ईरानी सरकार ने 21 जनवरी तक मृतकों की संख्या 3,117 बताई थी। विवाद तब और गहरा गया जब एक सरकारी टीवी कार्यक्रम में इन मौतों का कथित रूप से उपहास उड़ाया गया, जिसके बाद चैनल प्रमुख, निर्माता और प्रस्तोता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई। इस घटना ने ईरान के भीतर और बाहर दोनों जगह तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं।
होर्मुज में सैन्य अभ्यास और वैश्विक चिंता
राजनीतिक खींचतान के बीच ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक अभ्यास शुरू कर दिया है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवनरेखा माना जाता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की टकरावपूर्ण गतिविधि अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकती है। अमेरिका ने तेहरान को चेतावनी दी है कि वह व्यापारिक जहाजों या अमेरिकी सैन्य पोतों के रास्ते में बाधा न डाले। उपग्रह तस्वीरों में इस इलाके में ईरानी नौसेना की बढ़ती गतिविधियां साफ देखी जा रही हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव और गहराने की आशंका बनी हुई है।
कुल मिलाकर, मध्य पूर्व एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां कूटनीति और सैन्य शक्ति दोनों आमने-सामने हैं। तुर्किये की मध्यस्थता अगर सफल होती है तो यह पूरे क्षेत्र के लिए राहत की सांस हो सकती है, लेकिन विफलता की स्थिति में टकराव का खतरा और बढ़ सकता है। आने वाले कुछ दिन इस दिशा में निर्णायक माने जा रहे हैं।



